सजा काटकर घर गए कैदी ने लगाई जेल में रहने की गुहार
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
यूं तो जेल को हिकारत की नजर से देखा जाता है, लेकिन हिमाचल में सजा पूरी होने के बाद भी कैदी जेल छोड़ने को तैयार नहीं हैं। प्रदेश की एक जेल में सजा काट घर गए कैदी ने फिर से जेल में रहने की गुहार लगाई है। परिवार और समाज से तिरस्कृत होने का हवाला देकर कैदी ने फिर जेल में रहने के लिए आवेदन किया है।
कैदी का कहना है कि वह सजा पूरी कर घर लौटा था, लेकिन उसे किसी ने स्वीकार नहीं किया। जेल में टेलरिंग का काम कर वह पांच हजार रुपये प्रतिमाह बचत करता था। ऐसे में उसे सजायाफ्ता कैदी की तर्ज पर जेल में रहकर टेलरिंग शॉप में काम करने दिया जाए। कैदी के इस आवेदन से जेल प्रशासन अब असमंजस में है। कैदी के आवदेन पर विचार किया जा रहा है।
दरअसल, सूबे की कंडा जेल से एक कैदी को पिछले दिनों सजा पूरी होने पर रिहा कर दिया गया। रिहा होने से पहले वह जेल विभाग की ही टेलरिंग शॉप में बतौर टेलर काम कर रहा था। शर्ट, सदरी से लेकर अन्य कपड़ों की सिलाई से होने वाली कमाई से उसकी औसतन पांच हजार रुपये प्रतिमाह बचत हो रही थी।
कैदी ने आवेदन में कहा है कि जेल में रहकर वह आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता महसूस कर रहा था। घर जाने पर उसे किसी ने नहीं स्वीकारा। ऐसे में वह जेल में रहकर टेलर की शॉप पर काम करना चाहता है। उसे स्वेच्छा से वहीं रहने दिया जाए।
इस अनोखे आवेदन पर जेल महानिदेशक सोमेश गोयल ने बताया कि कैदी ने जेल में लौटने की इच्छा व्यक्त कर परिवार वालों के तिरस्कार और समाज में हीन भावना को बड़ी वजह बताया है। वह खुद को एडजस्ट नहीं कर पा रहा है। रिहाई के दस दिन बाद ही उसने जेल में आने की अनुमति का आवेदन किया है।
सोमेश गोयल का कहना है कि नियमों में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है कि कैदियों को रिहाई के बाद भी जेल में रखा जा सके, लेकिन विभाग अब विचार कर रहा है कि क्या ऐसे कैदियों को रिहाई के बाद भी आवेदन पर एडजस्ट किया जा सकता है।