Kullu: कुल्लू के खलाड़ा और भालठा में 30 साल बाद मनाया काहिका उत्सव, देवधुनों पर थिरके देवता और देवलू
कुल्लू जिले की लगघाटी के गांव खलाड़ा और भालठा में तीन दशक के बाद काहिका उत्सव मनाया गया। काहिका में जहां दैवीय शक्ति से लोग रूबरू हुए, वहीं देव वाद्ययंत्रों की धुनों पर देवता और देवलू थिरके।
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हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले की लगघाटी के गांव खलाड़ा और भालठा में तीन दशक के बाद काहिका उत्सव मनाया गया। काहिका में जहां दैवीय शक्ति से लोग रूबरू हुए, वहीं देव वाद्ययंत्रों की धुनों पर देवता और देवलू थिरके। सैकड़ों की संख्या में लोगों का हुजूम काहिका उत्सव के दिव्य नजारे को देखने उमड़ा। कारकूनों ने देवताओं से काहिका संपन्न होने के बाद क्षेत्र में सुख-समृद्धि की गुहार लगाई। खलाड़ा गांव में स्थानीय देवता खलाड़ी नारायण के सम्मान में काहिका उत्सव मनाया गया। इसमें माता शोझरी, दड़का के फलाणी नारायण के देवरथ भी शामिल हुए।
सुबह के समय मंदिर में 60 फीट लंबी ध्वजा खड़ी की गई। बुरी शक्तियों के प्रभाव को कम करने के लिए हवा में आटा भी फेंका गया। मान्यता है कि हवा में आटा फेंकने से बुरी शक्तियों का प्रभाव कम होता है। चौथे पहर में नड़ को मूर्छित करने की रस्म शुरू हुई। देवविधि के साथ नड़ को मूर्छित किया गया। दैवीय शक्ति से देवताओं ने नड़ को सचेत किया। वहीं भालठा गांव में काहिका देवता भालठी नारायण के सम्मान में हुआ। देवता भालठी नारायण मंदिर में गुरुवार सुबह सभी देव परंपराओं का निर्वहन किया गया। इसके सैकड़ों की संख्या में लोग साक्षी बने।
चौथे पहर शाम करीब 4:00 बजे के बाद नड़ को मूर्छित करने की प्रक्रिया शुरू की गई। चारों दिशाओं में देवता की ओर से चुने गए व्यक्ति ने तीर छोड़े। पांचवां तीर हवा में छोड़ते ही नड़ मूर्छित हो गया। देवलुओं और देवता ने परिक्रमा भी की। इसमें देवता और देवलू वाद्ययंत्रों की थाप पर थिरके। दोनों गांवों में दिनभर उत्सव का माहौल बना रहा। देवता भालठी नारायण के कारदार चमन ठाकुर ने कहा कि काहिका में देव परंपराओं का निर्वहन किया गया। उन्होंने कहा कि सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालुओं ने काहिका उत्सव में हाजिरी लगाई।