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Shimla News: भाजपा ने लगाई सेंध, अपने सभी सदस्यों के वोट तक नहीं ले पाई सत्ताधारी कांग्रेस
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जिला परिषद अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव में क्रॉस वोटिंग से कैसे बदले समीकरण, कांग्रेस करेगी जांच
पिछले चुनाव में क्रॉस वोटिंग ने सुरेंद्र रेटका को दिलाई थी बढ़त, इस बार इसी ने बिगाड़ा खेल
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। जिला परिषद शिमला में निर्दलियों के दम पर बहुमत का दावा करने वाली सत्ताधारी कांग्रेस को अध्यक्ष-उपाध्यक्ष के चुनाव में करारी हाल झेलनी पड़ी। पार्टी अध्यक्ष-उपाध्यक्ष की कुर्सी के लिए वीरवार को करवाए गए चुनाव में बहुमत हासिल करना तो दूर, अपने सभी सदस्यों के वोट तक हासिल नहीं कर पाई।
चुनाव से ठीक एक दिन पहले सीएम सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने बुधवार शाम ओकओवर में हुई बैठक में सदस्यों को एकजुटता का संदेश दिया था। उम्मीद थी कि सत्ता के बलबूते विपक्षी खेमे से क्रॉस वोटिंग के जरिये कांग्रेस अध्यक्ष-उपाध्यक्ष बना लेगी। हालांकि, दूसरे ही दिन वीरवार को कांग्रेसी खेमे में बिखराव नजर आया। पार्टी के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद के दावेदार दो निर्दलियों समेत अपनी पार्टी के सभी वोट तक नहीं ले पाए। अध्यक्ष पद के दावेदार सुरेंद्र रेटका को 12 सदस्यों में से 10 वैध मत हासिल हुए। दो वोट रिजेक्ट किए गए। वहीं, उपाध्यक्ष पद के लिए भी दस ही वोट मिले। एक वोट अवैध हुआ जबकि एक वोट भाजपा के उपाध्यक्ष पद के दावेदार को चली गई। अब पार्टी का कहना है कि आखिर चुनाव में उम्मीद से कम वोटिंग कैसे हुई, इसकी जांच की जाएगी। शिमला ग्रामीण कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष हरिकृष्ण हिमराल ने कहा कि पार्टी प्रत्याशियों को उम्मीद से भी कम वोट पड़े हैं। क्रॉस वोटिंग तो हुई ही है, साथ ही दो वोट अवैध भी हो गए। ये किसके वोट हैं, इसकी जांच की जाएगी। कहा कि बहुमत का आंकड़ा पार्टी के पास नहीं था जिसके चलते हार हुई है।
इस बार वोटिंग में पिछड़े रेटका
पिछले जिला परिषद चुनाव में उपाध्यक्ष पद के लिए कांग्रेस के सुरेंद्र रेटका ने क्रॉस वोटिंग में अपने अध्यक्ष से भी ज्यादा वोट हासिल कर लिए थे। उन्हें कुल 17 वोट पड़े थे जबकि अध्यक्ष को 15 वोट मिले थे। इस बार भी रेटका को 12 वोट मिलना तय था, लेकिन उन्हें सिर्फ दस वोट ही मिले।
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पिछले चुनाव में क्रॉस वोटिंग ने सुरेंद्र रेटका को दिलाई थी बढ़त, इस बार इसी ने बिगाड़ा खेल
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। जिला परिषद शिमला में निर्दलियों के दम पर बहुमत का दावा करने वाली सत्ताधारी कांग्रेस को अध्यक्ष-उपाध्यक्ष के चुनाव में करारी हाल झेलनी पड़ी। पार्टी अध्यक्ष-उपाध्यक्ष की कुर्सी के लिए वीरवार को करवाए गए चुनाव में बहुमत हासिल करना तो दूर, अपने सभी सदस्यों के वोट तक हासिल नहीं कर पाई।
चुनाव से ठीक एक दिन पहले सीएम सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने बुधवार शाम ओकओवर में हुई बैठक में सदस्यों को एकजुटता का संदेश दिया था। उम्मीद थी कि सत्ता के बलबूते विपक्षी खेमे से क्रॉस वोटिंग के जरिये कांग्रेस अध्यक्ष-उपाध्यक्ष बना लेगी। हालांकि, दूसरे ही दिन वीरवार को कांग्रेसी खेमे में बिखराव नजर आया। पार्टी के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद के दावेदार दो निर्दलियों समेत अपनी पार्टी के सभी वोट तक नहीं ले पाए। अध्यक्ष पद के दावेदार सुरेंद्र रेटका को 12 सदस्यों में से 10 वैध मत हासिल हुए। दो वोट रिजेक्ट किए गए। वहीं, उपाध्यक्ष पद के लिए भी दस ही वोट मिले। एक वोट अवैध हुआ जबकि एक वोट भाजपा के उपाध्यक्ष पद के दावेदार को चली गई। अब पार्टी का कहना है कि आखिर चुनाव में उम्मीद से कम वोटिंग कैसे हुई, इसकी जांच की जाएगी। शिमला ग्रामीण कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष हरिकृष्ण हिमराल ने कहा कि पार्टी प्रत्याशियों को उम्मीद से भी कम वोट पड़े हैं। क्रॉस वोटिंग तो हुई ही है, साथ ही दो वोट अवैध भी हो गए। ये किसके वोट हैं, इसकी जांच की जाएगी। कहा कि बहुमत का आंकड़ा पार्टी के पास नहीं था जिसके चलते हार हुई है।
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इस बार वोटिंग में पिछड़े रेटका
पिछले जिला परिषद चुनाव में उपाध्यक्ष पद के लिए कांग्रेस के सुरेंद्र रेटका ने क्रॉस वोटिंग में अपने अध्यक्ष से भी ज्यादा वोट हासिल कर लिए थे। उन्हें कुल 17 वोट पड़े थे जबकि अध्यक्ष को 15 वोट मिले थे। इस बार भी रेटका को 12 वोट मिलना तय था, लेकिन उन्हें सिर्फ दस वोट ही मिले।
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