जयंती विशेष: स्वतंत्रता सेनानी भगत राम ने जेल में ताउम्र खादी पहनने का लिया प्रण, प्रजामंडल आंदोलन का किया आगाज
22 दिसंबर 1914 को हमीरपुर जिले के कड़ोहता गांव में जन्मे लाला भगत राम कड़ोहता 16 वर्ष की आयु से स्वतंत्रता आंदोलन में कूद पड़े। जब 15 अगस्त 1947 को भारत आजाद हुआ उस समय बिलासपुर, सुकेत और मंडी रियासतें रजवाड़ा शाही के चुंगल में थी।
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सादगी और स्वाभिमान के प्रतीक स्वतंत्रता सेनानी लाला भगत राम कड़ोहता की जयंती 22 दिसंबर को मनाई जाएगी। उन्होंने प्रजामंडल आंदोलन का आगाज किया और जेल में ताउम्र खादी पहनने का प्रण लिया। 22 दिसंबर 1914 को हमीरपुर जिले के कड़ोहता गांव में जन्मे लाला भगत राम कड़ोहता 16 वर्ष की आयु से स्वतंत्रता आंदोलन में कूद पड़े। जब 15 अगस्त 1947 को भारत आजाद हुआ उस समय बिलासपुर, सुकेत और मंडी रियासतें रजवाड़ा शाही के चुंगल में थी। लाला भगत राम कड़ोहता ने दौलत संख्यान, स्वामी कृष्णा नंद को प्रोत्साहित करके प्रजामंडल आंदोलन को नई ताकत दी। बिलासपुर मैदान में प्रजामंडल कार्यकर्ताओं पर हुए लाठीचार्ज से कड़ोहता घायल हो गए। इस दौरान उनको और उनके परिवार के सदस्यों का बिलासपुर और सुकेत रियासतों में प्रवेश बंद कर दिया और संपत्ति जब्त कर ली। इस दौरान कड़ोहता स्थित उनका घर बिलासपुर के प्रजामंडल नेताओं को आश्रय बन गया था।
हमीरपुर जिले की स्थापना के उपरांत लाला भगत राम कड़ोहता ने पं. मिलखी राम के साथ जिला कांग्रेस की जिम्मेवारी संभाली। वह कई वर्षों तक जिला हमीरपुर के वरिष्ठ उपप्रधान और प्रधान रहे। पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह और पूर्व शिक्षा मंत्री नारायण चंद पराशर के साथ भी उनका विशेष लगाव रहा है। 85 वर्ष की आयु में 12 दिसंबर 1999 को उनका देहांत हो गया। उनकी जीवन गाथा प्रदेश के युवाओं के लिए प्ररेणा स्रोत है। स्वतंत्रता सेनानी के पुत्र क्रांति कुमार ने कहा कि इस बार लाला भगत राम कड़ोहता के जयंती परिवार के सदस्य ही मनाएंगे। लाला भगत राम कड़ोहता की पड़पोती आरुषी कतना ने कहा कि परदादा भगत राम कड़ोहता की कुर्बानी की कहानी परिवार के सदस्यों को सुनी है। जिससे उन्हें प्रेरणा मिलती है।