हिमाचल: जयराम ठाकुर बोले- विधायकों के मताधिकार पर कोर्ट जाने को कानूनी राय ले रही भाजपा
प्रदेश सरकार की ओर से विधायकों को मेयर और डिप्टी मेयर के चुनाव में मतदान का अधिकार देने के निर्णय पर भाजपा कोर्ट जाने को लेकर कानूनी राय ले रही है।
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पूर्व सीएम एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि मेयर और डिप्टी मेयर चुनाव में राजनीतिक लाभ के लिए नियमों को ताक पर रखा जा रहा है। प्रदेश सरकार की ओर से विधायकों को मेयर और डिप्टी मेयर के चुनाव में मतदान का अधिकार देने के निर्णय पर भाजपा कोर्ट जाने को लेकर कानूनी राय ले रही है। इसी आधार पर आगामी निर्णय लिया जाएगा। विधायकों को मतदान अधिकार देने के पीछे प्रदेश सरकार की मंशा जोड़-तोड़ कर अपने मेयर और डिप्टी मेयर बनाने की है, लेकिन सरकार की यह मंशा पूरी नहीं होगी। मंडी में पत्रकारों से बातचीत में जयराम ने कहा कि पहले सरकार ने जिलाधीशों के माध्यम से विधायकों के मतदान अधिकार को लेकर राय मांगी।
इस पर कानूनी तौर पर इनकार कर दिया गया। बाद में सरकार ने अपने इन्हीं आदेशों को पलटते हुए नोटिफिकेशन जारी करके विधायकों को वोटिंग अधिकार दे दिए। यह एक कानून है और इसमें किसी भी तरह का बदलाव विधानसभा में प्रस्ताव लाकर ही किया जा सकता है। अभी विधानसभा का सत्र भी शुरू होने जा रहा है। इसलिए इस दौरान ऐसी कोई भी नोटिफिकेशन नहीं निकाली जा सकती थी। जयराम ठाकुर ने कहा कि व्यवस्था परिवर्तन का नारा देने वाली सरकार में सबकुछ अव्यवस्थित होकर रह गया है। इस मौके पर उनके साथ विधायक अनिल शर्मा, चुनाव पर्यवेक्षक एवं विधायक राकेश जंबाल, विधायक इंद्र सिंह गांधी, पूर्ण चंद ठाकुर, विनोद कुमार, जिला परिषद अध्यक्ष पाल वर्मा, जिलाध्यक्ष निहाल चंद शर्मा उपस्थित रहे।
विधायकों को वोटिंग अधिकार देना सरकार का सही फैसला : नरेश
मेयर और डिप्टी मेयर चुनाव में विधायकों को वोटिंग का अधिकार देना सरकार का सही फैसला है। यह बात मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार (मीडिया) नरेश चौहान ने शनिवार को शिमला में पत्रकारों से कही।
चौहान ने कहा कि लंबे समय से विधायकों की ओर से मांग की जा रही थी कि विधायकों को मत देने का अधिकार भी दिया जाना चाहिए। उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि चंडीगढ़ में भी नगर निगम महापौर व उपमहापौर के चुनाव में सांसद भी वोट डालते हैं। ऐसे में हिमाचल में विधायकों को वोटिंग अधिकार देना गलत नहीं है।
चौहान ने कहा कि डबल इंजन सरकार होने का दावा करने वाली पूर्व भाजपा सरकार ने ही प्रदेश को कर्ज के बोझ तले दबाया। उन्होंने 10,000 करोड़ का कर्ज लेने के भाजपा के आरोप को सिरे से खारिज किया। कहा कि केंद्र सरकार ने एक साल में केवल 6,000 करोड़ रुपये का ऋण लेने और विदेशी अनुदान की भी सीमा तय कर दी है, जिससे प्रदेश के विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पर 10 हजार करोड़ रुपये का ऋण लेने का आरोप लगाने वाली पूर्व की जयराम सरकार ने खुद एक साल में 15,000 करोड़ रुपये तक का ऋण ले लिया था।