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जयराम रमेश पर दायर मानहानि केस में दर्ज होंगे पूर्व सीएम धूमल के बयान

Sun, 06 Jan 2019 11:38 AM IST
Priyesh Mishra न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला Published by: Priyesh Mishra Updated Sun, 06 Jan 2019 11:38 AM IST
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jairam ramesh and Prem Kumar dhumal defamation case in Himachal High court

हाईकोर्ट ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश के खिलाफ  दायर मानहानि मामले में वादी पूर्व सीएम प्रेम कुमार धूमल के बयान 31 मार्च तक दर्ज करने के आदेश दिए। यह मामला प्रेम कुमार धूमल की ओर से दायर किया गया था। कोर्ट ने यह आदेश इस मामले में नियुक्त लोकल कमिश्नर अधिवक्ता पीएस गोवर्धन को दिए हैं, जिनका दायित्व वादी के बयान रिकॉर्ड करना है। 

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न्यायाधीश संदीप शर्मा के समक्ष सुनवाई के लिए लगे इस मानहानि मामले में मुख्य रूप से छह मुद्दों पर दोनों पक्षकारों की ओर से साक्ष्य पेश किए जाएंगे। मानहानि मामले में दिए तथ्यों के अनुसार वरिष्ठ कांग्रेसी नेता जयराम रमेश ने दो अगस्त 2015 को प्रेस कांफ्रें स में धूमल पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे। तीन अगस्त को उनके खिलाफ  भ्रष्टाचार को लेकर खबरें प्रकाशित हुई थीं। प्रार्थी धूमल ने अपने दावे में आरोप लगाया है कि उनको बदनाम करने के इरादे से उन पर आधारहीन आरोप लगाए गए।
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प्रतिवादी ने उनकी राजनीतिक और सामाजिक छवि खराब करने के इरादे से प्रेस कांफ्रेंस की। धूमल का आरोप है कि प्रतिवादी की ओर से उनकी छवि को पहुंचाए गए आघात की भरपाई किसी भी तरीके से नहीं की जा सकती। फिर भी फिलहाल उन्होंने प्रतिवादी जयराम रमेश के खिलाफ  एक करोड़ रुपये की मानहानि का मुकदमा दायर किया है।

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शिमला-मटौर फोरलेन हाईवे पर हाईकोर्ट ने मांगी स्टेटस रिपोर्ट

jairam ramesh and Prem Kumar dhumal defamation case in Himachal High court

प्रदेश हाईकोर्ट ने शिमला से मटौर तक के फोरलेन निर्माण की स्टेटस रिपोर्ट मांगी है। न्यायालय ने इस बाबत राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण, राज्य सरकार और मैसर्ज इंटर कांटिनेंटल कंसल्टेंट्स एंड टेक्नोक्रेट को आदेश जारी किए हैं। कोर्ट ने शिमला से मटौर तक फोरलेन बनाने को लेकर अब तक उठाए गए कदमों की विस्तृत जानकारी मांगी है।

सुनवाई के दौरान मैसर्ज इंटर कांटिनेंटल कंसल्टेंट्स एंड टेक्नोक्रेेट की ओर से बताया गया कि पैकेज चार के लिए अंतिम डीपीआर 31 जनवरी तक प्रस्तुत कर दी जाएगी। शेष पैकेज के लिए डीपीआर 30 अप्रैल तक पेश कर दी जाएगी। कंपनी ने बताया कि कोर्ट की ओर से पारित आदेशों के संदर्भ में डीपीआर तैयार कर ली गई है। इसके कुछ भाग को अंतिम रूप दे दिया गया है।

फोरलेन का मुख्य उद्देश्य शिमला से मटौर के बीच राष्ट्रीय राजमार्ग की दूरी को कम करना है। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के प्रतिनिधि ने बताया कि पैकेज एक को छोड़कर सर्वेक्षण कार्य पूरा कर लिया गया है। जो पैकेज अभी भी राज्य सरकार की ओर सौंपा जाना है, उस पर महाधिवक्ता अशोक शर्मा ने अदालत को सूचित किया कि उस पैकेज को सौंपने में कोई बाधा नहीं है। इसे राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण को सौंप दिया जाएगा।

एडवोकेट जनरल ने बताया कि इस कार्य के लिए जमीन अधिग्रहण का कार्य वहां शुरू कर दिया गया है जहां डीपीआर को अंतिम रूप दिया गया है। सुनवाई की पिछली तारीख को अदालत को सूचित किया गया था कि फोरलेन के उन्नयन के उद्देश्य के लिए शिमला से मटौर तक पूरे प्रोजेक्ट को पांच पैकेजों में विभाजित किया गया है।

पैकेज एक शिमला से शालाघाट तक, पैकेज दो शालाघाट से नौनी चौक तक, पैकेज तीन बघेड़ से हमीरपुर बाईपास, पैकेज चार हमीरपुर बाईपास से ज्वालामुखी तक और पैकेज पांच ज्वालामुखी बाईपास से कांगड़ा बाईपास तक है।

कोताही बरत रहे एफआरसी प्रधानों के नाम बताएं, हटाने को जारी होंगे नोटिस

jairam ramesh and Prem Kumar dhumal defamation case in Himachal High court

प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में ठोस कचरा प्रबंधन का कोई प्रावधान न होने पर संज्ञान लेने वाली याचिका में प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को मामले पर दोबारा कार्यवाही करने के आदेश जारी किए।  हाईकोर्ट ने आदेश में कहा है कि इस बाबत गठित की गई प्रत्येक कमेटी को यह स्पष्ट करें कि गांव में ठोस कचरे की उपयुक्त डंपिंग न होने के लिए ग्रामवासी जिम्मेदार होंगे।
डंपिंग साइट के लिए एनओसी देने के मामले में अगर एफ आरसी के प्रधान के कोताही बरत रहे हैं तो उनके नाम बताए जाएं। कोर्ट ने उन्हें पद से हटाने के लिए कारण बताओ नोटिस जारी करेगा। कोर्ट ने मुख्य सचिव को बैठक कर ठोस उपाय तलाशने के आदेश दिए। मामले पर अगली सुनवाई 26 मार्च को होगी। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की खंडपीठ ने याचिका पर सुनवाई की।

पीठ ने प्रधान सचिव शहरी विकास की ओर से दायर शपथ पत्र का अवलोकन कर पाया कि राज्य सरकार ठोस कचरे के लिए स्थलों की पहचान करने में असहाय है। इसके लिए वन अधिकार अधिनियम 2006 के अनुरूप गठित की गई कमेटी से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेने की आवश्यकता पड़ती है और प्रधान इस बाबत अनापत्ति प्रमाण पत्र देने के लिए तैयार नहीं है। न्यायालय ने आदेश जारी किए कि ऐसे प्रधानों के नाम पूरे विवरण के साथ हाईकोर्ट के समक्ष रखें ताकि उन्हें उनके पदों से हटाने के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किया जा सके।

न्यायालय ने उपायुक्त शिमला को आदेश दिए कि वह एक सप्ताह के भीतर अनुपालन रिपोर्ट प्रधान सचिव शहरी विकास को भेजें। ताकि अगली स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की जा सके। न्यायालय ने इस बात पर भी नाखुशी जाहिर की कि बद्दी के अलावा अन्य जगह पर राज्य सरकार ने डंपिंग साइट को विकसित करने के लिए क्लस्टर चिह्नित नहीं किए हैं। पिछली सुनवाई के दौरान कोर्ट ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से भी ठोस कचरा प्रबंधन के लिए प्रस्तावित प्लांटों की विस्तृत जानकारी मांगी थी।

नगर निगमों, नगर परिषदों और नगर पंचायतों से बाहर होने के कारण वहां न तो ठोस कचरा एकत्रित करने की व्यवस्था है और न ही उसके निपटारे का कोई यंत्र। कोर्ट को बताया गया था कि ग्रामीण क्षेत्रों में ग्रामीणों, वहां आने जाने वाले लोगों और पर्यटकों के उत्सर्जित कूड़े को ठिकाने लगाने के लिए सरकार की ओर से किसी तरह की व्यवस्था की स्थापना का कोई प्रस्ताव नहीं है। कोई विकल्प न होने के कारण ग्रामीण कूड़ा खुले में फेंकने के लिए मजबूर हैं। इससे जंगल, घासनिया व नाले प्रदूषित हो रहे हैं।

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