चौंकाने वाला खुलासा, हिमाचल की जमीन पर जेएंडके का कब्जा
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हिमाचल की 18 हजार बीघा जमीन पर दशकों से पड़ोसी राज्य जम्मू कश्मीर ने कब्जा किया हुआ है। जिला चंबा के सलूणी में सीमा से सटी इस जमीन पर जेएंडके सरकार ने चरागाहें बना रखी हैं। इसके लिए बाकायदा वहां के लोगों को परमिट दिए हैं।
कई पशुपालकों को यहां कोठे बनाने की इजाजत दे रखी है। केंद्र सरकार के बजट से यहां सड़क का निर्माण किया जा चुका है। सीमा विवाद के बाद राजस्व विभाग चंबा ने जब जमीन की पैमाइश करवाई तो खुंडी मराल से पद्दरी जोत तक लगभग 18 हजार बीघा जमीन हिमाचल की निकली है।
राजस्व रिकॉर्ड में यह जमीन हिमाचल सरकार के अधीन है। इस जमीन में हिमाचली पशुपालकों को जानवर चराने की इजाजत भी नहीं है। इस जमीन पर करोड़ों रुपये की वन संपदा और लुप्त होती वन्य प्रजातियां मौजूद हैं।
पैमाइश के बाद अब चंबा जिला प्रशासन जागा है। उन्होंने इसके लिए जेएंडके सरकार से संपर्क किया है। जिला परिषद अध्यक्ष चंबा धर्मसिंह पठानिया ने बताया कि जब जमीन हमारी है तो यहां के लोगों को चरागाहों के परमिट मिलने चाहिए।
लाहौल में भी किया है 17 किमी तक कब्जा
जनजातीय जिले लाहौल-स्पीति के सरचू में भी जम्मू-कश्मीर ने हिमाचल की करीब 17 किलोमीटर जमीन पर कब्जा किया हुआ है। जम्मू-कश्मीर के लोग यहां अस्थायी कारोबार कर रहे हैं।
सीमा विवाद के चलते सरचू में 11 अगस्त 2016 को हिमाचल और जम्मू-कश्मीर सरकार के अधिकारियों के साथ सर्वे ऑफ इंडिया टीम की बैठक हुई थी। सर्वे ऑफ इंडिया के मैप के अनुसार उक्त 17 किलोमीटर जमीन हिमाचल की है। बावजूद अभी स्थिति जस की तस है।
सीमा विवाद का मामला अंतरराज्यीय है। जमीन की पैमाइश रिपोर्ट प्रदेश सरकार को भेज दी है। जेएंडके में डोडा के उपायुक्त से भी इस बारे में बात की गई है। वे भी अपने स्तर पर इस मामले की जांच कर रहे हैं- सुदेश मोख्टा, उपायुक्त चंबा