जज्बे को सलाम, पुष्पा ने बिना हाथों के लिख डाली अपनी तकदीर
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
...हाथों की लकीरों पर मत कर गुमान इतना, तकदीर उनकी भी होती है जिनके हाथ नहीं होते। हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले के हरोली के भदसाली में तैनात आंगनबाड़ी कार्यकर्ता पुष्पा देवी पर यह पंक्ति सटीक बैठती है।
पुष्पा ने दोनों हाथों के बगैर ही अपनी तकदीर लिख डाली है। वह महज छह महीने की थी तो घर में जलते चूल्हे की आग में उसके दोनों हाथ जल गए। मुफलिसी के दौर में हादसे ने परिवार को सदमा दे दिया था।
लेकिन दोनों हाथ गंवा चुकी पुष्पा देवी थोड़ी बड़ी होने पर घर के काम-काज में हाथ बंटाने समेत पढ़ाई में अव्वल आने लगे। इससे माता पिता के लिए वह नई उम्मीद बन गई।
तीन बहनों और दो भाइयों में सबसे छोटी पुष्पा देवी ने जमा दो की परीक्षा पास करने के बाद बीए द्वितीय वर्ष की भी परीक्षा दी, लेकिन किस्मत ने उसका साथ नहीं दिया और वह बीए नहीं कर सकी।
जुनून और कड़ी मेहनत के दम पर पा लिया मुकाम
लेकिन अपने जुनून और कड़ी मेहनत के दम पर उसने आंगनबाड़ी कार्यकर्ता का रोजगार हासिल कर लिया। मूलत: हरोली के लोअर बढेड़ा की रहने वाली पुष्पा देवी की शादी भदसाली के शशिपाल से हुई। पुष्पा बतौर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता क्षेत्र के बच्चों को अक्षर ज्ञान दे रही है।
पुष्पा की कहानी ऐसी बेटियों के लिए प्रेरणा बन रही है जो किसी न किसी रूप से अक्षम हैं या किसी हादसे की वजह से सामान्य जीवन नहीं जी पा रही हैं। दोनों हाथ न होने के बावजूद पुष्पा हर वो कार्य कर लेती, जो एक सामान्य इंसान करता है। वह अपने दोनों बाजुओं के सहारे पेन या चौक पकड़ कर लिखती है।
वहीं, खाना पकाना, कपड़े धोना और बर्तन साफ करना आदि कार्य भी बड़ी कुशलता से करती है। पुष्पा देवी का कहना है कि उसे महसूस नहीं होता कि वह दोनों हाथों से लाचार है। पुष्पा का कहना है कि व्यक्ति को कभी हिम्मत नहीं हारनी चाहिए। अपनी कमजोरी को ताकत बनाकर आगे बढ़ना चाहिए।