कुल्लू दशहरा: छुट्टी लेकर देवताओं की चाकरी में जुटे सरकारी कर्मचारी
देव परंपरा का निर्वहन करने के लिए अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव में पहुंचे देवी देवताओं की चाकरी के लिए कई सरकारी कर्मचारियों ने छुट्टी ले रखी है। घर परिवार छोड़कर ये कर्मचारी इन दिनों देवी-देवताओं के अस्थायी शिविरों में पहुंचे हुए हैं। देव नियमों से बंधे हरियानों को देवता के पास अपनी उपस्थिति दर्ज कराना जरूरी है। ऐसा न करने पर जुर्माने का प्रावधान है। इतना ही नहीं, व्यक्ति को देव समाज से भी बाहर किया जा सकता है।
कुल्लू दशहरा उत्सव में इस बार 264 देवी देवताओं के रथ पहुंचे हैं। देवता के साथ उनके हरियान क्षेत्रों के लोगों की उपस्थिति बेहद जरूरी है। दशहरा उत्सव के मौके पर मंदिर व देवता कमेटी के कड़े नियम बनाए होते हैं, जिससे सभी हरियानों व कारकूनों को इसकी जानकारी दी जाती है। कारकून और हरियान नियमों का उल्लंघन करते हैं तो उनके खिलाफ मंदिर कमेटी जुर्माने के साथ कई तरह के प्रतिबंध लगा सकती है। वहीं, देवी देवता के प्रकोप की भी मान्यता है।
दशहरा उत्सव के मौके पर देवी देवताओं के साथ कारकूनों, हरियानों व देवलुओं की अलग-अलग ड्यूटी लगाई जाती है। इसके लिए सरकारी कर्मचारी छुट्टी लेकर हाजिरी भरते हैं। देवता कोट पझारी के कारदार भागे राम राणा ने कहा कि देव परंपरा का निर्वहन सर्वोपरि है। जिला के देवी देवताओं की कमेटियों ने इसके लिए अलग-अलग नियम बनाए हैं, जिसका हरियान क्षेत्र के लोगों को सच्चे मन से पालन करना पड़ता है। ऐसा न करने पर जुर्माने के साथ प्रतिबंध का भी प्रावधान है।
कर्मचारियों को दी जाए छुट्टी
देवी देवताओं के महाकुंभ कुल्लू दशहरा में शिरकत कर रहे देवी-देवताओं के हरियान, कारकून कुल्लू जिला के अलावा दूसरे जिला में सेवारत कर्मचारी भी शामिल हैं। जिला कर्मचारी महासंघ के पूर्व अध्यक्ष अमर ठाकुर ने कहा कि दशहरा उत्सव पर कर्मचारियों के लिए छुट्टी लेना मजबूरी है। सरकार को दशहरा के मौके पर देव चाकरी में शामिल कर्मचारियों के लिए छुट्टी घोषित की जानी चाहिए।
एक दर्जन से अधिक कारदार सरकारी कर्मचारी
जिला कुल्लू में एक दर्जन से अधिक कारदार सरकारी कर्मचारी हैं। शिक्षक व राजस्व विभाग में सेवारत इन कारदारों की देव समाज में सबसे अहम भूमिका है। लेकिन सात दिनों तक दशहरा पर्व के चलते इन लोगों को भी अवकाश लेना पड़ रहा है।