यहां रूठे मतदाताओं को मनाने के लिए कटते हैं बकरे
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हिमाचल के सिरमौर जिले के संगड़ाह में चुनाव के दौरान कई परंपराएं हैं। यहां जीत के बाद बकरों की धाम देने देनी पड़ती है। रूठे मतदाताओं को मनाने के लिए भी बकरे का मीट खिलाना पड़ता है। संगड़ाह में यूं तो हर साल 11 तथा 12 जनवरी को मनाए जाने वाले पारंपरिक माघी त्योहार में हजारों बकरे कटते हैं, लेकिन इस बार चुनाव के चलते दिसंबर में ही बकरों की शामत आ चुकी है।
संगड़ाह खंड की 41 पंचायतों में से बेशक छह पंचायतों में निर्विरोध प्रधान तथा अन्य प्रतिनिधि चुने जा चुके हों, मगर इससे चुनाव में बकरों की दावत का सिलसिला नहीं रुकेगा। ज्यादातर उम्मीदवार कड़े मुकाबले वाली पंचायतों में फंसे हैं इसके चलते इन पंचायतों में ज्यादा बकरे काटे जाते हैं। निर्विरोध चुनी गई पंचायतों के नवनिर्वाचित प्रतिनिधि भी पंचायत में दो से छह बकरों की धाम मतदाताओं को आभार के लिए देंगे।
जुर्माने के रूप में भी बकरा देने की परंपरा
गिरिपार में रूठे मतदाताओं को मनाने के लिए बकरा काटने की परंपरा सदियों पुरानी है। वर्षों पहले रूठे लोगों को भी उम्मीदवार पंचायत चुनाव के दौरान जुर्माने के रूप में बकरा काटकर मनाते हैं। संगड़ाह खंड की सांगना पंचायत में अब तक दर्जनों बकरे काटे जा चुके हैं।
बढ़ी बकरों की मांग, 16 हजार में 40 किलो का बकरा
करीब 72 हजार की आबादी वाले विकास खंड संगड़ाह में इस पंचायत चुनाव में 500 के करीब बकरों की धाम उड़ाई जाएगी। पंचायत चुनाव तथा माघी त्योहार साथ-साथ होने के चलते क्षेत्र में बकरों की कीमत तथा मांग में भारी उछाल आ गया है तथा 40 किलो का बकरा औसतन 16 हजार में बिक रहा है।