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सदियों पुरानी परंपरा, लोटे में रखा पानी बताता है कैसा रहेगा इस साल मौसम

Sat, 02 Dec 2017 09:08 AM IST
रंजीत शर्मा/अमर उजाला, भरमौर (चंबा)
रंजीत शर्मा/अमर उजाला, भरमौर (चंबा) Updated Sat, 02 Dec 2017 09:08 AM IST
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interesting facts about weather in bharmour

मौसम विभाग की भविष्यवाणी से इतर गांव में लोग गड़वे (लोटे) में रखे पानी से साल भर के मौसम का पूर्वानुमान लेते हैं। हिमाचल के चंबा जिले के उपमंडल भरमौर के एक मंदिर में यह प्रथा बहुत पुरानी है, जिसे लोग आज भी पूरी आस्था के साथ मानते हैं।

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उपमंडल भरमौर से 33 किलोमीटर की दूरी पर स्थित ऐतिहासिक कार्तिक स्वामी के मंदिर में गड़वे में पानी रखने के पांच महीने बाद अगले एक साल के मौसम का पूर्वानुमान जारी होता है। इस परंपरा (मान्यता) का अनुसरण आज भी क्षेत्र के लोग कर रहे हैं।
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कार्तिक स्वामी के इस भव्य मंदिर में हर वर्ष सैकड़ों की तादाद में श्रद्धालु शीश नवाने पहुंचते हैं। सर्दियों के दौरान कार्तिक स्वामी के मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाते हैं। ऐसी मान्यता है कि कार्तिक स्वामी मंदिर के गर्भगृह में कपाट बंद होने से पूर्व एक लोटे में पानी भर दिया जाता है।
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मंदिर के कपाट खुलने के वक्त यदि पानी का लोटा खाली मिले तो उस वर्ष इलाके में सूखे की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। इसी तरह से यदि लोटा पानी से भरा ही मिले तो उपमंडल में उस वर्ष खूब वर्षा और अच्छी फसल होने का संकेत माना जाता है। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है।

आठ किमी पैदल सफर कर पहुंचते हैं मंदिर तक

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तहसील मुख्यालय भरमौर से 33 किलोमीटर दूरी पर स्थित कार्तिक स्वामी का भव्य मंदिर है। उपमंडल भरमौर से 25 किलोमीटर तक गाड़ी के माध्यम से पहुंचा जा सकता है।

उसके आगे श्रद्धालुओं को आठ किलोमीटर पैदल सफर तय करना पड़ता है। इस सफर को तय कर सैकड़ों श्रद्धालु भगवान शिव के पुत्र कार्तिक के दर्शन करने पहुुंचते हैं।

आज बंद हो गए मंदिर के कपाट
कार्तिक स्वामी मंदिर के पुजारी जोधा राम शर्मा और मचलू राम शर्मा ने बताया कि वीरवार को मंदिर के कपाट बंद कर दिए गए हैं। इससे पूर्व मंदिर में पूजा, अर्चना और हवन किए गए।

इसके उपरांत मंदिर के गर्भगृह में एक लोटा पानी से भरकर रखने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। पांच माह बाद कपाट खुलने के बाद मंदिर में रखे गड़वे के पानी की स्थिति से अगले एक वर्ष के मौसम का पूर्वानुमान लिया जाता है।

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