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Shimla News: धामी में जमींदोज भवन और डिग्री कॉलेज का हुआ जियोलॉजिकल सर्वे
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हर्षित शर्मा
शिमला। राजधानी के पास 16 मील में शनिवार को पांच मंजिला भवन के जमींदोज होने के बाद रविवार को एनआईटी हमीरपुर से आई विशेषज्ञों की टीम मौके पर पहुंची। भू-वैज्ञानिकों ने जमींदोज मकान और साथ लगती पहाड़ी में आईं दरारों का निरीक्षण किया। इसके बाद विशेषज्ञों ने खतरे की जद में आए राजकीय महाविद्यालय धामी का भी मुआयना किया। शुरुआती जांच में भू-वैज्ञानिकों ने बताया कि भवन के गिरने का कारण पहाड़ की अवैज्ञानिक कटाई मुख्य वजह है। एक सप्ताह में एनआईटी हमीरपुर की रिपोर्ट आएगी।
भू-वैज्ञानिकों ने सैंपल लिए, जिनकी एनआईटी हमीरपुर में जांच की जाएगी। इसके अलावा धामी कॉलेज के पास भू-वैज्ञानिकों ने जीएसआर मशीन से रीडिंग भी ली, जिससे धामी कॉलेज के 30 मीटर नीचे तक चट्टानों की परतों के बारे में पता लग पाएगा। शुरुआती जांच में पाया कि अवैज्ञानिक कटाई से पहाड़ की चट्टान 35 सेंटीमीटर खिसक गई थी। पहाड़ी में दो इंच तक दरारें हैं। चट्टान खिसकने से डिग्री कॉलेज, सड़क और भवन में दरारें आ गई थीं। डिग्री कॉलेज धामी के 27 मीटर भाग में बड़ी-बड़ी दरारें पड़ गई हैं। वैज्ञानिकों ने असुरक्षित घोषित किया है। कटिंग से पूरी पहाड़ी अस्थिर हो गई है। एनआईटी हमीरपुर के डाॅ. आरएस बाशतू, डाॅ एमवी कुमार और साहिल धीमान ने निरीक्षण किया। इनके अलावा विशेष सचिव आपदा डीसी राणा, पुलिस, जिला प्रशासन और लोक निर्माण विभाग के अधिकारी भी मौके पर मौजूद रहे।
भू-वैज्ञानिक डाॅ. आरएस बाशतू ने बताया कि पहाड़ी अभी भी बैठ रही है। भूस्खलन रोकने के लिए कटिंग तुरंत रोकने के लिए कहा है। जमींदोज मकान की पिछली ओर डंगा लगाने के लिए कहा गया है। दरारों को तिरपाल और प्लास्टिक से ढकने के लिए कहा है। राजकीय महाविद्यालय धामी के तुरंत गिरने का खतरा कम है। एनआईटी हमीरपुर में सैंपल की जांच की जाएगी। रिपोर्ट आने के बाद कॉजेल को बचाने की रणनीति बनाई जाएगी।
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शिमला। राजधानी के पास 16 मील में शनिवार को पांच मंजिला भवन के जमींदोज होने के बाद रविवार को एनआईटी हमीरपुर से आई विशेषज्ञों की टीम मौके पर पहुंची। भू-वैज्ञानिकों ने जमींदोज मकान और साथ लगती पहाड़ी में आईं दरारों का निरीक्षण किया। इसके बाद विशेषज्ञों ने खतरे की जद में आए राजकीय महाविद्यालय धामी का भी मुआयना किया। शुरुआती जांच में भू-वैज्ञानिकों ने बताया कि भवन के गिरने का कारण पहाड़ की अवैज्ञानिक कटाई मुख्य वजह है। एक सप्ताह में एनआईटी हमीरपुर की रिपोर्ट आएगी।
भू-वैज्ञानिकों ने सैंपल लिए, जिनकी एनआईटी हमीरपुर में जांच की जाएगी। इसके अलावा धामी कॉलेज के पास भू-वैज्ञानिकों ने जीएसआर मशीन से रीडिंग भी ली, जिससे धामी कॉलेज के 30 मीटर नीचे तक चट्टानों की परतों के बारे में पता लग पाएगा। शुरुआती जांच में पाया कि अवैज्ञानिक कटाई से पहाड़ की चट्टान 35 सेंटीमीटर खिसक गई थी। पहाड़ी में दो इंच तक दरारें हैं। चट्टान खिसकने से डिग्री कॉलेज, सड़क और भवन में दरारें आ गई थीं। डिग्री कॉलेज धामी के 27 मीटर भाग में बड़ी-बड़ी दरारें पड़ गई हैं। वैज्ञानिकों ने असुरक्षित घोषित किया है। कटिंग से पूरी पहाड़ी अस्थिर हो गई है। एनआईटी हमीरपुर के डाॅ. आरएस बाशतू, डाॅ एमवी कुमार और साहिल धीमान ने निरीक्षण किया। इनके अलावा विशेष सचिव आपदा डीसी राणा, पुलिस, जिला प्रशासन और लोक निर्माण विभाग के अधिकारी भी मौके पर मौजूद रहे।
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भू-वैज्ञानिक डाॅ. आरएस बाशतू ने बताया कि पहाड़ी अभी भी बैठ रही है। भूस्खलन रोकने के लिए कटिंग तुरंत रोकने के लिए कहा है। जमींदोज मकान की पिछली ओर डंगा लगाने के लिए कहा गया है। दरारों को तिरपाल और प्लास्टिक से ढकने के लिए कहा है। राजकीय महाविद्यालय धामी के तुरंत गिरने का खतरा कम है। एनआईटी हमीरपुर में सैंपल की जांच की जाएगी। रिपोर्ट आने के बाद कॉजेल को बचाने की रणनीति बनाई जाएगी।
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