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Solan News: हिमाचल के उद्योगपति अब बाहर से भी मंगवा सकेंगे ढुलाई के लिए ट्रक
Sat, 12 Aug 2023 11:17 AM IST
Krishan Singh
संवाद न्यूज एजेंसी, बद्दी (सोलन)
संवाद न्यूज एजेंसी, बद्दी (सोलन)
Published by: Krishan Singh
Updated Sat, 12 Aug 2023 11:17 AM IST
सार
प्रदेश के सोलन जिले के बीबीएन (बद्दी, बरोटीवाला, नालागढ़) क्षेत्र में उद्योगपति अब माल ढुलाई के लिए बाहर से भी ट्रक मंगवा सकेंगे। बद्दी, बरोटीवाला, नालागढ़ औद्योगिक संघ ने यह जानकारी दी।
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ट्रक
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले के बीबीएन (बद्दी, बरोटीवाला, नालागढ़) क्षेत्र में उद्योगपति अब माल ढुलाई के लिए बाहर से भी ट्रक मंगवा सकेंगे। बद्दी, बरोटीवाला, नालागढ़ औद्योगिक संघ ने यह जानकारी दी। संघ ने बताया कि परिवहन व्यावसाय के एकाधिकार से जुड़े मामले की याचिका का निपटारा करते हुए उच्च न्यायालय ने यह व्यवस्था दी है। उच्च न्यायालय ने इस निर्देश के साथ याचिका का निपटारा कर दिया है कि निजी प्रतिवादी (ट्रक यूनियनों) को वाहनों के संचालन या माल ढुलाई शुल्क के निर्धारण के मामले में कोई अधिकार नहीं है।
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बीबीएनआईए के अध्यक्ष राजीव अग्रवाल और महासचिव वाईएस गुलेरिया ने बताया कि अदालत ने इसके लिए सोलन, बद्दी और बिलासपुर के उपायुक्तों और पुलिस अधीक्षकों को आवश्यक निर्देश दिए हैं। यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि ट्रक यूनियनों की ओर से उनकी व्यावसायिक गतिविधि के संबंध में याचिकाकर्ता एसोसिएशन के सदस्यों के वाहनों की मुक्त आवाजाही में कोई अनुचित बाधा उत्पन्न न की जाए।
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उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालय ने यह भी माना है कि तत्काल निर्णय में निहित निर्देशों का कोई भी उल्लंघन अदालत की अवमानना होगी। प्रतिवादियों को सूचित किया गया है कि उनके ओर से किए गए ऐसे कार्यों को अदालत की अवमानना माना जाएगा। उपायुक्त और पुलिस अधीक्षक को भी हलफनामा दायर करना आवश्यक है कि 15 दिनों के भीतर इस आदेश के अनुपालन में उठाए गए कदमों की जानकारी दें।
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बता दें कि चार साल पहले मालभाड़े को लेकर बीबीएनआईए ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। याचिका दायर कर बीबीएनआईए ने हाईकोर्ट में दलील रखी थी कि यूनियनों से निर्धारित मालभाड़ा अधिक है और उद्योगपति इतना भाड़ा नहीं दे सकते। इससे उनके उत्पाद की उत्पादन लागत प्रभावित हो रही है। ट्रक यूनियन के एकाधिकार के चलते उद्योगपति बाहर से ट्रक नहीं मंगवा सकते है। अदालत ने माना की कोई भी निजी ऑपरेटरों को उद्योगों का भाड़ा निर्धारित करने का कोई अधिकार नहीं है। वह जबरन भाड़ा निर्धारित नहीं कर सकते।