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छलका देश के पहले मतदाता का दर्द, नेताओं पर दिया बड़ा बयान

Sun, 24 Sep 2017 01:16 PM IST
बीरबल नेगी/अमर उजाला, सांगला (किन्नौर)
बीरबल नेगी/अमर उजाला, सांगला (किन्नौर) Updated Sun, 24 Sep 2017 01:16 PM IST
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India first voter Shyam Saran Negi statement over politicians

उम्र के सौ बसंत देख चुके देश के पहले मतदाता श्याम सरण नेगी आज के नेताओं में वो ईमानदारी नहीं देखते जो उन्हें पहले के नेताओं में नजर आती थी। वे कहते हैं पहले के राजनेताओं में अपने कार्यों और घोषणाओं के प्रति ईमानदारी, सहनशीलता और जिम्मेदारी का भाव होता था। आज के दौर में उन्हें ऐसा नहीं दिखाई देता।

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नेगी कहते हैं भाग दौड़ के इस दौर में शायद लोगों को समय के साथ ही तेजी से दौड़ना पड़ रहा है। आज के राजनेता भी इसी भाग दौड़ में बदल गए हैं। राजनेताओं में धैर्य की कमी है। अमर उजाला से बातचीत में नेगी ने कहा कि इस बार भी यदि भगवान की कृपा से स्वास्थ्य ठीक रहा तो विधानसभा चुनाव में वे निश्चित रूप से मतदान करेंगे।
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अच्छे उम्मीदवार को जिताना सबकी जिम्मेदारी है। काबिल सरकार बनाने में उनका योगदान भी होना ही चाहिए। नेगी ने कहा कि सरकार चलाने के लिए अच्छे लोगों के हाथों में कमान से ही देश का विकास होता है। यदि जनता सरकार में नालायक लोगों को चुनकर भेजेगी तो विकास के सारे सपने टूटकर बिखर जाएंगे।

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ऐसे बने देश के पहले वोटर

India first voter Shyam Saran Negi statement over politicians

किन्नौर जिले के कल्पा गांव में 30 जून 1917 को जन्मे आजाद भारत के पहले मतदाता एवं चुनाव आयोग के ब्रांड एंबेसडर श्याम सरण नेगी भारतीय लोकतंत्र की ऐतिहासिक कड़ी हैं। देश का पहला वोटर बनने के पीछे की कहानी भी दिलचस्प है। 

बर्फ से ढके रहने वाले किन्नौर जिला में नेगी अध्यापक होने की वजह से ड्यूटी पर थे। स्नो बाउंड क्षेत्र होने की वजह से 1951-52 के आम चुनाव का सबसे पहले मतदान 25 अक्तूबर 1951 में किन्नौर जिले में ही कराया गया। 

बूथ नंबर 50 में जाकर किया मतदान
नेगी ने बताया कि अध्यापक होने के नाते उनकी शौंगटोंग से लेकर नेसंग तक पोलिंग स्टेशनों पर ड्यूटी लगी थी। इस दौरान उन्होंने सुबह सबसे पहले किन्नौर जिले के कल्पा के चिनी गांव की प्राथमिक पाठशाला के बूथ नंबर 50 में जाकर मतदान किया। 

यह देश के पहले चुनाव का सबसे पहला वोट दर्ज हुआ। शेष भारत में आम चुनाव के मतदान की प्रक्रिया वर्ष 1952 के फरवरी और मार्च महीने तक चली।

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