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समझौते के पांच लाख नहीं देने पर डेढ़ साल कारावास
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
Updated Wed, 24 Oct 2018 06:00 AM IST
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प्रदेश उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति पीएस राणा और सदस्य विजयपाल खाची ने शशि सेन बनाम उत्कर्ष इंफ्राकॉम प्राइवेट लिमिटेड मंडी मामले में सजा सुना दी है। मामले में प्रतिवादी को डेढ़ साल के कारावास की सजा सुनाई गई है और साथ ही 5000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।
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जुर्माना न देने की स्थिति में डेढ़ महीने और कारावास की सजा सुनाई गई है। वादी अशोक सिंह सेन ने राज्य उपभोक्ता आयोग में उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 1986 की धारा 17 के अंतर्गत उत्कर्ष इंफ्राकॉम प्राइवेट लिमिटेड जिला मंडी के निदेशक हर्ष गुप्ता के खिलाफ मुकदमा दायर किया था।
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सुनवाई के दौरान वादी और प्रतिवादी में समझौता हो गया। इसके अनुसार प्रतिवादी ने वादी को कुल दस लाख रुपये देने थे। पांच लाख रुपये की पहली किस्त 25 मई 2016 और दूसरी किस्त 25 जुलाई 2016 को देनी थी। प्रतिवादी ने पहली किस्त तय अवधि में आयोग में जमा करवा दी।
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दूसरी किस्त तय अवधि मेें जमा नहीं करवाई। वादी ने दोबारा आयोग में धारा 27 में शिकायत दर्ज करवाई। आयोग ने पाया कि वादी ने तय अवधि के भीतर समझौता पूरा नहीं किया। दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद अब आयोग ने इस पर फैसला सुना दिया है।