बजट से ढीली होगी जेब, शिमला, मनाली घूमना अब और महंगा
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आम बजट में सर्विस टैक्स में बढ़ोतरी से हिमाचल का पर्यटन कारोबार प्रभावित होगा। पहली अप्रैल से सूबे में घूमना-फिरना और खाना-पीना महंगा हो जाएगा। केंद्र सरकार ने सर्विस टैक्स को 14.5 से 15 प्रतिशत कर दिया है। बीते साल सर्विस टैक्स को 12.36 से बढ़ाकर 14.5 किया गया था। सर्विस टैक्स बढ़ने से होटलों के कमरे महंगे मिलेंगे।
रेस्तरां में खाना भी महंगा हो जाएगा। सैलानियों को पहले से ज्यादा अपनी जेबें ढीली करनी पड़ेंगी। अब उन्हें पहले से अधिक बजट प्लान कर घूमने के लिए निकलना होगा। सूबे में लाखों की संख्या में प्रतिवर्ष सैलानी देश-विदेश से आते हैं। शिमला, मनाली, धर्मशाला, डलहौजी, कसौली, खजियार, कुल्लू, रोहतांग सहित कई अन्य पर्यटक स्थलों में सैलानी गर्मियों और सर्दियों के मौसम में आते हैं।
हिमाचल में हजारों लोगों का रोजगार पर्यटन कारोबार से जुड़ा है। सैलानी कम आने का खामियाजा पर्यटन कारोबारियों को भुगतना पड़ेगा। होटलियर एसोसिएशन शिमला के अध्यक्ष हरनाम कुकरेजा का कहना है कि सर्विस टैक्स बढ़ने से होटलों के कमरों का
अधिक किराया चुकाना होगा। बाहर खाना-पीना भी महंगा होगा। सैलानियों पर सीधे तौर पर आर्थिक बोझ पड़ेगा। होटलियरों पर ही नहीं टैक्सी ऑपरेटरों पर भी इसकी मार पड़ेगी। सर्विस टैक्स के अलावा भी होटल कारोबारियों को कई अन्य तरह के टैक्स चुकाने पड़ रहे हैं।
कृषि प्रधान हिमाचल को मिलेगा बजट का फायदा
केंद्र सरकार के वित्त मंत्री अरुण जेटली की ओर से सोमवार को लोकसभा में साल 2016-17 के लिए पेश बजट पर राजनीतिक दलों और नेताओं की प्रतिक्रिया भले जो भी हो, लेकिन एक्सपर्ट इसे सधा हुआ बजट मान रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि हिमाचल प्रदेश जैसे कृषि प्रधान प्रदेश को इस बजट से ज्यादा फायदा मिल सकता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि प्रदेश की करीब नब्बे फीसदी आबादी आज भी ग्रामीण अंचल में ही रहती है और कृषि क्षेत्र से ही जुड़ी है।
ऐसे में इस बजट में घोषित हुई कृषि आधारित योजनाओं से लाभान्वित हो सकते हैं। बजट विशेषज्ञ और प्रदेश के पूर्व एडवाइजर प्लानिंग डा एसके शाद कहते हैं कि केंद्र सरकार का यह बजट हिमाचल प्रदेश जैसे कृषि प्रधान राज्य के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो सकता है। कृषि क्षेत्र पर केंद्रित इस बजट में 55 सौ करोड़ की प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, किसानों को 9 लाख करोड़ रुपये के ऋण, सिंचाई के लिए 17 हजार करोड़ का प्रावधान किया गया है। इन सबका सीधे तौर पर हिमाचल के किसानों और बागवानों को फायदा मिल सकता है।
ग्रामीण सड़कों को भी लाभ- शाद कहते हैं कि चूंकि हिमाचल पहाड़ी इलाका है, जहां पहले ही सड़कों को लेकर खासी परेशानी रहती है। ऐसे में राष्ट्रीय उच्च मार्गों के लिए 55 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान करना भी हिमाचल के हित में है। इसके अलावा 10 हजार किलोमीटर के नये राष्ट्रीय उच्च मार्गों तथा 50 हजार किलोमीटर ग्रामीण सड़कों का निर्माण करने की घोषणा में भी हिमाचल को लाभ मिल सकता है।
गरीबों से हमदर्दी- मनरेगा के माध्यम से पांच लाख कुओं एवं तालाबों के निर्माण से हिमाचल में रोजगार के अवसर तो बढ़ेंगे, साथ ही पीने के पानी की समस्या से भी निजात मिल सकती है। इसके अलावा सस्ती दवाई की दुकानें खोलने की घोषणा से भी गांवों के लोगों को सस्ता इलाज मिलने की उम्मीद जगेगी।
100 प्रतिशत एफडीआई से हिमाचल को फायदा
केंद्र सरकार ने अपने बजट में पहली बार देश में उत्पादित और विनिर्मित खाद्य उत्पादों के मार्केटिंग के लिए 100 प्रतिशत विदेशी निवेश को मंजूरी देने की घोषणा की है। विदेशी निवेश प्रमोशन बोर्ड के जरिये होने वाले इस इनवेस्टमेंट का लाभ देशभर के किसानों को होगा, लेकिन पहाड़ी इलाका और कम कनेक्टिविटी होने की परेशानी झेल रहे हिमाचल प्रदेश के किसानों के लिए यह महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।
कृषि विशेषज्ञ एचआर शर्मा भी सरकार के इस कदम को किसानों के लिए फायदेमंद बताते हैं। अभी तक हिमाचल के किसानों व बागवानों को अपने उत्पादों को बेचने के लिए स्थानीय मार्केट पर ही निर्भर रहना पड़ता था। इसकी वजह से उनके उत्पाद की सही कीमत नहीं मिल पाती थी। लिहाजा किसान लागत निकालकर ही संतुष्ट हो जाते थे। ऐसा इसलिए था कि या तो उनके पास अपने
उत्पाद को बड़ी मंडियों या मार्केट तक ले जाने के लिए संसाधन ही नहीं होते थे या फिर सड़क व अन्य परेशानियां रहती थीं लेकिन 100 प्रतिशत एफडीआई होने से हिमाचल के सेब व अन्य तरह के उत्पादों को विदेशी निवेशकों की मदद से राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय मार्केट में पहुंचाया जा सकेगा। इससे न सिर्फ किसानों को उनकी फसल की बेहतर कीमत मिलेगी बल्कि रोजगार के अवसर पर भी उपलब्ध होंगे।
डायलिसिस सेंटर और सस्ती दवा दुकानों से मिलेगी राहत
हिमाचल में अब मरीजों को अपने जिले में ही डायलिसिस की सुविधा मिलेगी। केंद्र सरकार ने आम बजट में देश के हर जिला अस्पताल में इस सुविधा को देने की घोषणा की है। वर्तमान में हिमाचल में मंडी, धर्मशाला, सोलन के अलावा इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज शिमला और डॉ. राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कॉलेज टांडा में डायलिसिस की सुविधा मरीजों को दी जा रही है।
केंद्र सरकार की घोषणा के बाद सूबे के हर जिला में मरीजों को डायलिसिस की सुविधा मिल सकेगी। केंद्र की इस घोषणा से मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी। समस्या के प्रकार और गंभीरता के अनुसार डायलिसिस दो प्रकार का होता है। हीमो डायलिसिस और पेरिटोनियल डायलिसिस।
हिमाचल में मरीजों को अस्पतालों में 58 तरह की मुफ्त दवाएं मिलने की सुविधा के बाद अब सस्ती दवाओं की दुकानों का तोहफा मिलने वाला है। केंद्र सरकार ने सोमवार को आम बजट में देश में तीन हजार सस्ती दवाओं की दुकानें खोलने की घोषणा की है। ऐसे में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा के गृह राज्य हिमाचल में अधिक से अधिक सस्ती दवाओं की दुकानों के खुलने की संभावना है।
उम्मीद जताई जा रही है कि प्रदेश के 12 जिलों के साथ-साथ कई अन्य मुख्य शहरों को भी सस्ती दवाओं की दुकानें मिल सकती हैं। इन दुकानों के खुलने से मरीजों को बाजार से महंगी दवाएं खरीदने के लिए मजबूर नहीं होना पड़ेगा। केंद्र की इस घोषणा से जहां स्वास्थ्य सेवाएं सुदृढ़ होंगी वहीं मरीजों की जेब भी नहीं कटेगी।
छोटे उद्यमियों को राहत, बड़े निराश
प्रदेश में माइक्रो उद्योग लगाना अब आसान होगा। भारी भरकम इनवेस्टमेंट की क्षमता न रखने वाले बेरोजगारों के लिए बजट राहत लेकर आया है। लघु उद्योग भारती के प्रदेश उपाध्यक्ष एनपी कौशिक ने बताया कि माइक्रो उद्योगों के लिए केंद्र सरकार ने टैक्स में छूट दी है। बिजली में भी छूट दी है। इससे नए उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा। एक्सपोर्ट में छोटे उद्योगों की भागीदारी बढ़ेगी और बेरोजगारों को रोजगार मिलेगा। 25 लाख से कम निवेश वाले उद्योग माइक्रो उद्योगों की श्रेणी में आते हैं।
दूसरी तरफ प्रदेश के सबसे बड़े औद्योगिक क्षेत्र बद्दी को वित्त मंत्री अरुण जेटली के बजट ने बड़ी राहत नहीं दी है। यह बजट इंडस्ट्री ओरियंटल बजट न होकर गरीब व किसानों के उत्थान के लिए है। बजट में बड़े उद्योगों को नहीं छुआ गया। तंबाकू को छोड़ अन्य सामान पर एक्साइज ड्यूटी और सेंट्रल एक्साइज टैक्स में कोई भी बढ़ोतरी नहीं की है। सूक्ष्म, लघु व मध्य उद्यमियों को बैंकों से मिलने वाले ब्याज में कोई भी छूट नहीं दी गई।
ब्याज दर में कमी नहीं- बीबीएनआई के अध्यक्ष शैलेष अग्रवाल ने बताया कि केंद्र सरकार के बजट से उद्योगों की अनदेखी हुई है। एमएसएमई देश की अर्थ व्यवस्था की रीढ़ है, लेकिन इसके लिए ब्याज दर में कोई कमी नहीं की गई। आज भी बड़े उद्योगों की अपेक्षा एमएसएमई को बैंक ब्याज दर अधिक देता है जबकि 80 फीसदी (एनपीए) डिफाल्टर बड़े उद्योग हैं।
अपना ही जमा पैसा निकलवाने पर टैक्स क्यों
केंद्र सरकार के आम बजट से कर्मचारियों को कोई राहत नहीं मिली है। सरकार ने टैक्स स्लैब में कोई राहत नहीं दी। पीएफ का पैसा निकलवाना पहले टैक्सेबल नहीं था। अब सरकार ने 60 प्रतिशत से अधिक पीएफ का पैसा निकालने पर टैक्स लगा दिया है।
इससे कर्मचारी निराश हैं। अपने ही जमा पैसे को निकलवाने पर टैक्स थोपना कर्मचारी विरोधी है। पीएफ जमा करवाने पर मिलने वाली छूट और पैसा निकलवाने पर टैक्स लगने से बात बराबर हो गई है। -हीरालाल वर्मा, महासचिव प्रदेश बिजली बोर्ड कर्मचारी यूनियन
एचपीयू के अर्थशास्त्र विभाग के प्रो. सिकंदर कुमार ने केंद्रीय मंत्री अरूण जेटली के पेश किए गए केंद्रीय बजट को आर्थिक सुधार, ग्रामीण विकास और गरीबी उत्थान वाला करार दिया है। उन्होंने कहा कि बजट में सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य ग्रामीण विकास को बजट प्रावधान कर अर्थव्यवस्था में सुधार और सुदृढ़करने में मदद करेगा। बजट में महंगाई कम करने को कारगर कदम उठाए गए है।
महंगाई दर को डब्बल डिजिट से घटाकर सिंगल 5.4 फीसदी करना सराहनीय है। किसानों और गरीबी रेखा से नीचे रह रहे लोगों के लिए मनरेगा, स्वच्छ भारत अभियान जैसी मूल सुविधाओं को बजट रखा गया है। सर्व शिक्षा अभियान, राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन, सड़क निर्माण, कृषि बागवानी को सिंचाई योजनाओं को बजट अलग से बढ़ाया गया है। उनका कहना है कि बजट ओवरऑल दूरगामी सोच वाला है। -अर्थशास्त्री प्रो. सिकंदर कुमार(एचपीयू)
पर्यटन कारोबारियों के हाथ लगी मायूसी
बजट से पर्यटन कारोबारियों को मायूसी ही हाथ लगी है। हम उम्मीद कर रहे थे कि शिमला जैसे पहाड़ी राज्य में पर्यटन विकास के लिए विशेष पैकेज जारी होगा लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। सर्विस टैक्स में बढ़ोतरी से पर्यटन कारोबार बुरी तरह प्रभावित होगा।
शिमला में 1000 रुपये के कमरे से सर्विस टैक्स शुरू हो जाता है। कम से कम इसे 5000 रुपये से अधिक के कमरे पर लागू करना चाहिए। -हरनाम सिंह कुकरेजा, अध्यक्ष होटलियर एसोसिएशन शिमला
बजट में केंद्र सरकार की ओर से किसानों को भ्रमित करने का प्रयास किया गया है। भाजपा ने अपने चुनावी घोषणापत्र में डा. स्वामीनाथन कमीशन की सिफारिशें लागू करने का वादा किया था, बजट में यह झलकना चाहिए था, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ।
बजट से 70 फीसदी किसानों को कोई लाभ नहीं हुआ है। किसानों के लिए की गई घोषणाएं महज ऊंट के मुंह में जीरे के समान है। -राकेश सिंघा, अध्यक्ष हिमाचल प्रदेश फल एवं सब्जी उत्पादक संघ
महिलाएं बोलीं, नहीं आए हमारे अच्छे दिन
सोलन की गृहिणी रुचि शर्मा का कहना है कि इस बार गृहिणियों के लिए कोई विशेष राहत बजट में नहीं मिली है। आम लोगों की थाली से जुड़ी दालें, सब्जियों की कीमतें आसमान छू रही हैं। एल्यूमिनियम फाइल जैसी चीजों को महंगा करके सरकार बताना चाहती है कि वह कितने अच्छे दिन लाना चाहती है।
रामपुर की समाज सेविका नीना शर्मा का कहना है कि मोदी सरकार का बजट किसानों की बेहतरी के लिए है। कॉस्मेटिक चीजें महंगी होने से गरीब को ज्यादा फर्क नहीं पडे़गा। क्योंकि इन चीजों को ज्यादातर अमीर लोग ही उपयोग करते हैं।
ऊना की गृहिणी रोमा शर्मा का कहना है कि आम आदमी पहले ही महंगाई की आग में जल रहा है। इस बजट में भी ऐसा कुछ नहीं है, जिससे महंगाई कम हो। इस बजट से घर के बजट पर कोई अच्छा असर नहीं हुआ।
मंडी की गृहिणी पूनम गुलेरिया का कहना है कि केंद्र के आम बजट में महंगाई रोकने के लिए कोई प्रावधान नहीं किया गया है। बजट में बीपीएल परिवारों को रसोई गैस कनेक्शन की बात कही गई। लेकिन एक मध्यम वर्ग परिवारों को महंगाई से कैसे निजात मिलेगी, इसका जिक्र बजट में नहीं है। आज महंगाई के कारण घर का खर्चा चलाना मुश्किल हो गया है।
हमीरपुर की गृहिणी नीतू कुमारी का कहना है कि बजट में पहली बार मकान खरीदने वालों को 35 लाख रुपये तक के ऋण का प्रावधान किया गया है। बजट में 35 लाख रुपये तक के ऋणों के लिए 50 हजार रुपये प्रतिवर्ष के अतिरिक्त ब्याज के लिए कटौती देने का प्रावधान है। इससे फायदा मिलेगा।
बजट पर क्या रही नेताओं की प्रतिक्रिया
हर वर्ग के लिए सौगात लेकर आया बजट- गांव, गरीब, किसान, मजदूर और समाज के हर वर्ग के कल्याण के लिए बजट में सभी प्रकार की योजनाएं हैं। मनरेगा में 38500 करोड़ का प्रावधान स्वरोजगार, ग्रामीण विकास एवं जनकल्याण के लिए बहुत ही लाभप्रद रहेगा। मनरेगा के माध्यम से ही पांच लाख कुओं एवं तालाबों के निर्माण के लिए स्वच्छ जल और स्वरोजगार पैदा करने के लिए
बहुत अच्छी योजना है। गरीब के लिए एक लाख रुपये का बीमा, 3000 नई सस्ती दवाई की दुकानें खोलना केंद्र सरकार का अच्छा प्रयास है। डिजिटल साक्षर मिशन आम युवा को स्किल डेवलपमेंट के क्षेत्र में आगे बढ़ने का अवसर प्रदान करेगा। हिमाचल भाजपा बजट का स्वागत करती है। -सतपाल सिंह सत्ती, अध्यक्ष हिमाचल भाजपा
बजट में सबका साथ, सबका विकास- प्रधानमंत्री के विकास के मूल मंत्र ‘सबका साथ, सबका विकास’ को ध्यान में रखते हुए बजट बनाया गया है। यह बजट देश को आगे ले जाने वाला है। इसमें गांवों और किसानों का खास ध्यान रखा गया है। डा. बाबा भीमराव अंबेडकर के 125वें जन्म वर्ष में दलितों के लिए विभिन्न योजनाएं लाई गई हैं।
अनुसूचित जाति उप योजना और ट्राइबल सब प्लान में भी बढ़ोतरी की गई है। किसानों की वार्षिक आय 2022 तक दो गुणा करने के लिए विभिन्न योजनाओं का प्रावधान किया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री अरुण जेटली बजट के लिए बधाई के पात्र हैं। -वीरेंद्र कश्यप, सांसद शिमला
गरीबों को दी राहत, अमीरों पर डाला थोड़ा बोझ
भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं सांसद शांता कुमार ने केंद्रीय बजट को विकास उन्मुख बताया है। इससे देश के ग्रामीण क्षेत्रों के समग्र विकास का संकल्प पूरा होगा। प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के तहत देश में उद्यमिता, शिक्षा एवं प्रशिक्षण केंद्रों की स्थापना से युवाओं को अपने रोजगार स्थापित करने का मौका मिलेगा। स्वास्थ्य सुरक्षा योजना बहुत बड़ी राहत होगी।
कश्मीर से कन्याकुमारी तक सड़कों और रेल तंत्र को विस्तार से देश का बुनियादी ढांचा सुदृढ़ होगा। इस बजट में अमीरों पर थोड़ा सा बोझ डाला गया, जबकि गरीब किसान और गांव को बहुत बड़ी राहत दी गई है। यह बजट महात्मा गांधी और दीनदयाल उपाध्याय की अंत्योदय की भावना को पूरा करने वाला है।
पहली बार गांव की ओर मुड़ी बजट की दिशा- केंद्रीय बजट 2016-17 किसान, बागवान और आम आदमी का बजट है। इसमें सभी वर्गों का ध्यान रखा गया है। पहली बार बजट की दिशा गांव की ओर मुड़ी है। इसमें कृषि क्षेत्र को विकसित करने के लिए 35 हजार 985 करोड़ रुपये तथा किसानों को 9 लाख करोड़ रुपये के ऋण का भी प्रावधान किया गया है।
सिंचाई के लिए 17 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान है। जनहित के इस बजट को संतुलित एवं विकासगामी बनाने के लिए वित्त मंत्री अरुण जेतली को बधाई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सपनों को साकार करते हुए इस बजट में आम आदमी को बड़ी राहत दी गई है। -प्रो. प्रेमकुमार धूमल, पूर्व मुख्यमंत्री
केंद्र सरकार का आम बजट दूरदर्शी
केंद्र सरकार का आम बजट दूरदर्शी है। स्वास्थ्य सुरक्षा योजना, जिला अस्पतालों में डायलिसिस सेवा और तीन हजार जन औषधि केंद्र खुलने से स्वास्थ्य सेवाएं सुदृढ़ होंगी। स्वास्थ्य मंत्रालय से जुड़ी सभी योजनाओं को निर्धारित समय के भीतर लागू किया जाएगा।
डायलिसिस सेवा को जिला अस्पतालों में पीपीपी मोड पर चलाया जाएगा। देशवासियों को इस सुविधा से बड़ी राहत मिलेगी। केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने समाज के सभी तबके के लोगों को ध्यान में रखते हुए बजट पेश किया है। इस बजट से देश को एक नई दिशा मिलेगी। -जेपी नड्डा, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री
ग्राम पंचायतों को मिलेगी मजबूती- सरकार ने देश के 300 शहरी क्षेत्रों को विकसित करने का भी प्रस्ताव दिया है, जो स्मार्ट सिटी प्रोग्राम की तरह स्मार्ट गांव होंगे। ग्रामीण अर्थव्यवस्था में तेजी लाने के लिए ग्राम पंचायतों और नगरपालिकाओं को अब तक की सर्वाधिक 2.87 लाख करोड़ की वित्तीय सहायता दी गई है। व्यापक तथा सभी वर्गों को शामिल करने वाले दूरदर्शी बजट प्रस्तुत
करने के लिए वित्त मंत्री अरुण जेटली को धन्यवाद। स्किल इंडिया प्रोग्राम को जारी रखते हुए मोदी सरकार देश के युवाओं को प्रशिक्षित करने, उन्हें रोजगार देने और सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। यह एक ऐसा व्यापक और जनसाधारण का बजट है, जिससे भारत नई बुलंदियों पर जाएगा। -अनुराग ठाकुर, सांसद हमीरपुर