हैंडीक्राफ्ट और हैंडलूम उत्पादों में होगा हर्बल रंगों का इस्तेमाल
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हैंडीक्राफ्ट और हैंडलूम उत्पादों में अब हर्बल रंगों का इस्तेमाल होगा। हिमाचल में हैंडीक्राफ्ट और हैंडलूम विभाग ने इसकी कवायद शुरू कर दी है। पहले चरण में कांगड़ा जिले के बैजनाथ में 20 महिलाओं को प्रशिक्षण दिया गया है। जल्द प्रशिक्षण कार्य प्रदेश भर में शुरू किया जाएगा। पहले हिमाचल और फिर उत्तर भारत में हर्बल रंगों के इस्तेमाल को प्रभावी बनाया जाएगा।
हर्बल रंगों का इस्तेमाल एलर्जी के बढ़ते मामलों को देखते हुए किया जा रहा है। हैंडीक्राफ्ट और हैंडलूम के उपाध्यक्ष संजीव कटवाल का कहना है कि केमिकल युक्त रंगों की वजह से उत्पाद इस्तेमाल करने वाले लोगों को एलर्जी हो रही है। विभाग ने उपभोक्ताओं की सेहत को देखते हुए हर्बल रंगों के प्रयोग की तैयारी कर ली है। इससे स्वास्थ्य सुरक्षा तो होगी ही, प्रदेश में रोजगार के नए अवसर भी खुलेंगे।
इनसे बनेंगे हर्बल रंग
प्रदेश में हर्बल रंग बनाने के लिए मेहंदी, अखरोट के छिलके, प्याज का वेस्ट, चीड़ की हरी पत्तियां, अनार के छिलके, हल्दी आदी से प्राकृतिक हर्बल रंग तैयार होंगे। इनमें किसी भी प्रकार के केमिकल का प्रयोग नहीं किया जाएगा।
पहले चरण में इन वस्तुओं में प्रयोग होगा हर्बल रंग
योजना के अनुसार शॉल, मफलर, स्टॉल सहित अन्य कपड़ों पर हर्बल रंग का प्रयोग किया जाएगा। योजना पहले प्रदेश में लागू होगी। इसके बाद इसे उत्तर भारतीय राज्यों तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा। जहां पर कपड़ों का उत्पादन होता है, उन राज्यों में यहां से रंग सप्लाई किए जाएंगे। खादी बोर्ड की जरूरत को ध्यान में रखकर भी काम किया जाएगा।
इनको मिलेगा इसका लाभ
हर्बल रंग बनाने के लिए प्रदेश हैंडीक्राफ्ट-हैंडलूम की ओर महिलाओं को रंग बनाने के लिए ट्रेनिंग दी जाएगी। ट्रेनिंग महिलाओं को समूहों में दी जाएगी। बाद में हर्बल रंग का उत्पादन कर प्रदेश की हजारों महिलाएं अपना स्वरोजगार शुरू कर सकेंगी।