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कोटी में पांच नहीं; इतने बीघा से काटे गए पेड़, सड़क भी बना डाली

Tue, 16 Jan 2018 01:47 PM IST
विजय खाची/नरेश भारद्वाज, अमर उजाला, शिमला
विजय खाची/नरेश भारद्वाज, अमर उजाला, शिमला Updated Tue, 16 Jan 2018 01:47 PM IST
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illicit felling in koti forest range around 50 bigha land

कोटी रेंज के शलोट के जंगल में हुए अवैध कटान में बड़ा खुलासा हुआ है। जहां तक भी नजर जा रही है, हरे- भरे पेड़ गाजर मूली की तरह कटे पड़े हैं। हैरत है पेड़ों को ठिकाने लगाने के लिए वन भूमि में करीब एक किलोमीटर अवैध सड़क भी निकाली गई है। 

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इतना सब कुछ हो गया और जिस महकमे पर वनों की रक्षा का जिम्मा है, वह महकमा सोया रहा। क्या अब भी प्रदेश के वन मंत्री अपने अफसरों की पीठ थपथपाएंगे? उनको पुरस्कृत करेंगे? 
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जहां तक सड़क बनती गई वहां तक पेड़ कटते गए, ताकि पेड़ों को काटकर इसके स्लीपरों की ढुलाई आसानी से हो सके। क्या यह सब वन महकमे के अफसरों ने मौके पर पहुंचे वन मंत्री को नहीं दिखाया। कई तरह के सवाल उठने लाजिमी है। 
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क्या सड़क रातों रात बन गई और पेड़ भी रातों रात कट गए। ‘अमर उजाला’ की टीम ने सोमवार को जब मौके का मुआयना किया तो हकीकत कुछ और दिखी। पेड़ कोई दस या बीस बीघे में नहीं बल्कि लगभग 50 बीघा जमीन पर काटे गए हैं। 

टनों लकड़ियों के ढेर लगे हैं और न जाने कितने टन लकड़ियों और स्लीपरों को मामले के खुलासे से पहले ही दबा दिया गया होगा। संवाददाता विजय खाची और फोटो जर्नलिस्ट नरेश भारद्वाज ने मौके का जायजा लिया। 

यहां-वहां पड़े हैं बान, चील और देवदार पेड़

illicit felling in koti forest range around 50 bigha land

शलोट नाले से जंगल के लिए नई सड़क निकाली गई है। करीब 300 मीटर ऊपर जेसीबी मशीन खड़ी है। जंगल में काटे गए पेड़ों को गाड़ियों में लोड करने के लिए मशीनों की मदद ली जा रही है। करीब 50 मीटर आगे सड़क पर पेड़ों की लकड़ी के ढेर लगे हुए हैं।

पहाड़ी की चोटी की ओर जाने पर नजारा ही बदल जाता है। यहां जंगल के बीच कतार में पेड़ काट कर गिरा दिए गए हैं। बान और चील के कटे पेड़ यहां वहां पड़े हैं। पहाड़ी की चोटी पर देवदार के पेड़ काट कर गिराए गए हैं, देवदार की लकड़ी मौके से गायब है और ठूंठ आग से झुलसे हुए हैं।

पहाड़ी से नाले की ओर करीब एक किलोमीटर सड़क बनी हुई है। हैरत की बात यह कि यहां न तो कोई घर है न आबादी, देखने पर लगता है कि पेड़ काटने के बाद लकड़ी ठिकाने लगाने के लिए ही यह सड़क तैयार की गई है। 

दोपहर बाद करीब तीन बजे शलोट नाले में वन विभाग की टीम ब्लॉक अधिकारियों की अगुवाई में पहुंच गई है। विभाग के करीब एक दर्जन कर्मी पहाड़ी से लकड़ियां सड़क की ओर लुढ़का रहे हैं।

कुछ कर्मी जेसीबी मशीन की मदद से लकड़ी गाड़ियों में लोड कर रहे हैं और कुछ लंबी लकड़ियों को काट कर छोटे टुकड़े बना रहे हैं, ताकि इन्हें आसानी से गाड़ियों में लोड किया जा सके।

मुख्य सड़क पर राजस्व विभाग से तहसीलदार और कानूनगो जमीन की पैमाइश और निशानदेही के लिए पहुंचे हुए हैं। जांच अधिकारी की अगुवाई में पुलिस टीम भी मौके पर पहुंची हुई है, जिस व्यक्ति पर पेड़ काटने का आरोप है वह भी पुलिस टीम के साथ मौके पर मौजूद है।

आरोपी बोला : लीज पर मिली है जमीन, मैंने काटे हैं पेड़

illicit felling in koti forest range around 50 bigha land

सवाल : क्या यह पेड़ आपने काटे हैं? और क्यों ?
जवाब : हां, मैंने ही पेड़ काटे हैं, मुझे यह जमीन सरकार से क्रेशर और माइनिंग के लिए लीज पर मिली है।
सवाल : क्या आपको सरकार से पेड़ काटने की स्वीकृति मिली है? 
जवाब : मैंने 2014 में क्रेशर और माइनिंग के लिए सरकार से परमिशन मांगी थी, जिस पर मई 2015 में एसडीएम ग्रामीण को संयुक्त निरीक्षण के लिए फाइल भेजी गई थी जो आज तक लंबित है।
सवाल : स्वीकृति न मिलने की सूरत में आपने पेड़ों का कटान कैसे कर लिया?
जवाब : 2017 में मैने दोबारा एसडीएम ग्रामीण से संयुक्त निरीक्षण के लिए दरख्वास्त की, जिसके बाद मुझे उलझाने के लिए एसडीएम ने मुझसे दोबारा पूरे केस के कागजात मांगे, इसके बाद मैने कागज दोबारा देने के लिए लिखित में इंकार कर दिया।
सवाल : कितने समय के अंदर आपने यह पेड़ काटे?
जवाब : सितंबर माह में पेड़ कटान शुरू किया। 8 नवंबर तक पेड़ काटे।
सवाल : वन विभाग के किसी कर्मी ने आपको पेड़ कटान से नहीं रोका?
जवाब : वन कर्मी कई बार मौके पर आए, उन्हें मैने अपनी जमीन के कागज भी दिखाए।
सवाल : पेड़ कटान को लेकर वन विभाग ने आपसे कब पूछताछ शुरू की?
जवाब : 8 या 9 जनवरी को दोबारा गार्ड मौके पर आया। उसके बाद मुझे आरओ का फोन आया और बोला कि जिस जमीन पर आपने पेड़ काटे हैं उसके कागज गार्ड और बीओ को दिखाना। दूसरे दिन गार्ड और बीओ मौके पर आए और बीओ ने कहा कि आपके कागजात ठीक हैं। मंत्री जब मौके पर आए तो मुझे उनसे मिलने ही नहीं दिया गया जबकि मैं अपना पक्ष रखना चाहता था।

बीओ से सीधे सवाल

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सवाल : पेड़ कटान का आपको कब पता चला?
जवाब : 10 जनवरी को गार्ड ने पेड़ कटान की सूचना दी, जिसके बाद जांच शुरू की गई।
सवाल : विभाग के आला अधिकारियों को इसे लेकर कब सूचित किया?
जवाब : दस जनवरी को ही रेंज आफिसर को अवैध कटान की सूचना दी गई और पुलिस में एफआईआर दर्ज करवाई गई।
सवाल : पेड़ कटान का सिलसिला कब से चल रहा था?
जवाब : पिछले करीब आठ दस सालों से पेड़ कटान चल रहा था।
सवाल : कुछ पेड़ ताजा कटे हैं, यह आठ दस साल पुराने कैसे हो सकते हैं?
जवाब : कुछ ताजा पेड़ सात-आठ महीने पहले कटे हैं।
सवाल : क्या पहले भी मौके का दौरा किया था?
जवाब : हां, पहले भी क्षेत्र का दौरा किया था लेकिन सड़क से ही गुजरा था।
सवाल : क्या इस घटना से पहले गार्ड ने अवैध कटान की कोई सूचना दी थी?
जवाब : नहीं, पहले गार्ड ने ऐसी कोई सूचना नहीं दी।

अवैध कटान में आरओ पर गिर सकती है गाज

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प्रदेश सरकार ने शिमला समेत कई अन्य इलाकों में पूर्व में हुई अवैध पेड़ कटान की घटनाओं पर सख्त निर्देश जारी किए हैं। शासन की ओर से वन विभाग के आला अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि किसी भी सूरत में अवैध कटान को रोका जाए।

अगर कहीं अवैध पेड़ कटान की घटना सामने आती है तो उस पर तत्परता के साथ कार्रवाई करते हुए आरोपियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएं। इसके अलावा यह भी कहा गया है कि अगर किसी कर्मचारी या अधिकारी की भूमिका संदिग्ध पाई जाए तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

इधर, विभागीय सूत्रों की मानें तो रिटायर्ड फॉरेस्ट गार्ड की भूमिका की जांच के अलावा विभागीय जांच टीम रेंज अफसर की भी भूमिका की जांच कर रही है। दरअसल, जितनी बड़ी संख्या में पेड़ काटे और उनका परिवहन किया गया, उससे स्थानीय अधिकारियों की कार्यशैली पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।

एनजीटी और हाईकोर्ट के अलावा विभाग का भी पेड़ कटने की सूरत में स्थानीय डीएफओ से लेकर रेंज अफसर तक पर कार्रवाई करने का प्रोसेस है, ऐसे में विभाग जांच कमेटी की रिपोर्ट के आने का इंतजार कर रहा है।

यह निर्देश शिमला के कोटी जंगल में 400 से ज्यादा पेड़ काटे जाने की घटना के सामने आने के बाद जारी किए गए हैं। फॉरेस्ट गार्ड की सूचना पर विभाग ने बड़े पैमाने पर पेड़ कटान तथा कटे हुए पेड़ों के स्लीपर बरामद किए हैं।

खुद वन मंत्री गोविंद ठाकुर ने कर्मचारियों की तारीफ भी कर दी, लेकिन लंबे समय में क्यों किसी को इसकी भनक नहीं लगी, इस पर सवाल उठने शुरू हो गए हैं। डीएफओ से लेकर रेंज अफसर तक के जिम्मे क्षेत्र की साल में एक बार निरीक्षण की रिपोर्ट तैयार की जानी होती है।

ऐसे में आला अधिकारियाें को इतने बड़े पैमाने पर हो रही अवैध पेड़ कटान की जानकारी क्यों और कैसे नहीं लगी, इसको लेकर भी अफसरों की भूमिका सवालों के घेरे में है। 

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