फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Shimla News ›   illegal mining at shimla.

छापेमारी के लिए बस में जाती है खनन विभाग की टीम

Sat, 06 Feb 2016 10:50 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला Updated Sat, 06 Feb 2016 10:50 AM IST
विज्ञापन
illegal mining at shimla.

शिमला जिले में शराब, ड्रग्स माफिया के बाद अब खनन माफिया ने भी अपनी जड़ें मजबूत कर ली हैं। शिमला में पत्थर, रेत और बजरी की तस्करी बेरोकटोक बडे़ पैमाने पर हो रही है। खनन अधिकारी सीमित संसाधन और मुट्ठी भर स्टाफ की वजह से खनन माफिया पर जिला में नजर रख पाने में विफल है। हैरत इस बात की है कि खनन विभाग की टीम छापेमारी के लिए बस में जाती है।

विज्ञापन


इस नेटवर्क को तोड़ने के लिए सरकारी अमला आंखें मूंदें बैठा है। वजह जो भी हो इस ढील की वजह से खनन माफिया की पौ बारह है। किसकी शह पर अवैध कारोबार का यह खेल चल रहा है, यह तहकीकात के बाद ही महकमा जान पाएगा। जिस महकमे को इस पर नजर रखने की जिम्मेदारी दी है वह सिस्टम की मार से पंगु बना दिए गए हैं। इन्हें पर्याप्त संसाधन तक क्यों नहीं दिए जा रहे? इस पर भी सवाल उठना लाजमी है।
विज्ञापन


जिला शिमला में कुल आठ लोगों की टीम हैं जिन्हें खनन माफिया पर नजर रखनी है। इतना ही नहीं मौके पर पहुंचने के लिए गाड़ी तक नहीं है। एक जिला खनन अधिकारी, चार इंस्पेक्टर और दो गार्ड हैं। स्थिति बद से बद्तर है और सरकार आए दिन अवैध तौर पर हो रहे खनन पर बड़े-बड़े दावे करती नजर आती है लेकिन जमीनी हकीकत बेहद कड़वी है। जिला में सबसे अधिक अवैध खनन के मामले रामपुर, रोहड़ू और सुन्नी से आते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


रोहडू में एक इंस्पेक्टर है। इसके पास सरस्वती नगर से लेकर चिड़गांव तक का इलाका है। व्यावहारिक तौर पर इतना बड़ा इलाका संभालना एक इंस्पेक्टर के बूते से बाहर है। यहां पब्बर नदी से खनन रोकना अकेले अधिकारी के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। रामपुर के साथ कुल्लू की सीमा लगती है, वहां अवैध खनन होता है और इसका ट्रांस्पोर्टेशन शिमला के लिए होता है। इस तस्करी को रोकने का कोई पुख्ता इंतजाम नहीं है। इससे सरकार को भी हर माह लाखों के राजस्व का घाटा झेलना पड़ रहा है। सुन्नी में भी खनन माफिया तेजी से अपनी जड़े मजबूत कर रहा है। यहां से जिला मंडी की सीमा लगती है।

तत्तापानी से अवैध तौर पर रेत शिमला की सीमा में बेरोक टोक लाया जाता है। शिमला में बैठे खनन अधिकारी को इस बात की जानकारी भी दी जाए तो वहां तक पहुंचने के लिए कोई स्थायी साधन नहीं हैं। अवैध खनन के अधिकतर मामले शाम को होते हैं। लेकिन इस महकमे के पास पेट्रोलिंग व्हीकल तक नहीं है। ऐसा नहीं है कि सरकार इन सब बातों से बेखबर है।

हर बार बजट के लिए प्रस्ताव तैयार किए जाते हैं लेकिन अवैध खनन को रोकने के लिए कोई गंभीर नहीं है। कभी कभार पुलिस प्रशासन अपने स्तर पर खनन माफिया के खिलाफ अभियान छेड़कर इक्का दुक्का मुकदमे दे देते हैं। इसके अलावा कोई दूसरा महकमा इस पर अंकुश लगाने के लिए तैयार नहीं है। शहर में या शहर से बाहर अवैध खनन को लेकर कोई शिकायत आती है तो वहां तक पहुंचना ही सबसे बड़ी चुनौती महकमे के पास रहती है।


विभाग के पास नहीं है गाड़ी : शर्मा
स्टेट जियोलॉजिस्ट रजनीश शर्मा ने कहा कि जिला शिमला में सीमित स्टाफ है। मौके पर जाने वाली टीम के पास फिलहाल स्थायी गाड़ी नहीं है। सूचना मिलने पर टीम बस में भी गंतव्य तक पहुंचती है। टीम के लिए गाड़ी की जरूरत है, एक टैक्सी किराये पर लेने पर विचार किया जा रहा है। अवैध खनन के मामलों की धर पकड़ भी की जा रही है। कानून के मुताबिक उन पर कार्रवाई हो रही है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed