दिल्ली में नहीं रुक रहा बागवानों से अवैध कमीशन वसूली का धंधा
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हिमाचल के लाखों सेब बागवानों से दिल्ली मंडी में छह फीसदी कमीशन वसूली का धंधा चल रहा है। हिमाचल, हरियाणा और पंजाब मंडी समिति एक्ट के अनुसार कमीशन की राशि सेब खरीदारों से वसूलती है, लेकिन दिल्ली में यह कमीशन लदानियों और बागवानों से ली जा रही है।
अभी तक सेब बागवानों को इस अवैध कमीशन से करोड़ों की मार पड़ चुकी है। पिछले 15 साल से सेब बागवानों का आर्थिक शोषण हो रहा है। बागवानों को विरोध के बावजूद जबरन यह राशि दिल्ली के आढ़तियों को चुकानी पड़ रही है।
दिल्ली आजादपुर मंडी की देखादेखी देश की अन्य बड़ी मंडियों के आढ़तियों ने भी छह फीसदी कमीशन राशि बागवानों से वसूलने की प्रथा शुरू कर दी है। बागवान लंबे समय से प्रदेश सरकारों से कमीशन की अवैध वसूली का मामला उठाते रहे, लेकिन आज तक कोई राहत नहीं मिली है।
सेब सीजन के दौरान छह फीसदी कमीशन का मसला उठाया जाता रहा है, लेकिन सीजन खत्म होते ही मामला ठंडा पड़ जाता है। पिछले कई साल से यही कुछ होता रहा है।
क्या कहते हैं बागवानों के प्रतिनिधि
हिमाचल प्रदेश फल एवं सब्जी उत्पादक संघ के अध्यक्ष हरीश चौहान कहते हैं कि देश की सबसे बड़े आजादपुर सब्जी मंडी में सेब उत्पादकों से छह फीसदी कमीशन सेब बेचने की एवज में गलत तरीके से लिया जा रहा है।
मंडी समिति एक्ट के तहत यह छह फीसदी कमीशन सिर्फ फल खरीदार से वसूला जा सकता है। हिमाचल, हरियाणा और पंजाब मंडी समिति के तहत आने वाले आढ़ती सिर्फ लदानी से छह फीसदी कमीशन लेते हैं।
बागवानों से फलों की बिक्री पर कोई कमीशन नहीं लिया जाता। सरकार दिल्ली मंडी में व्यवस्था में सुधार करती है तो देश की अन्य मंडियों में सुधार आ जाएगा और बागवानों का आर्थिक शोषण रोका जा सकेगा।