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आईआईटी मंडी: अब जान सकेंगे भूकंप के लिहाज से कितनी मजबूत हैं आपकी इमारतें, तकनीक की विकसित

Fri, 25 Nov 2022 11:07 PM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी Published by: Krishan Singh Updated Fri, 25 Nov 2022 11:07 PM IST
सार

 संवेदनशील हिमालयी क्षेत्रों में कंकरीट की इमारतें कितनी मजबूत हैं, किस पैमाने तक झटके सह सकती हैं, इसका आकलन अब भूवैज्ञानिक कर सकेंगे। साथ ही समय रहते कमजोर इमारतों की मरम्मत कर इन्हें भूकंपरोधी बना सकेंगे।

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IIT Mandi researchers have developed a rapid visual screening technique to know the weakness and strength of b
आईआईटी मंडी के शोधकर्ता। - फोटो : संवाद

विस्तार

भूकंप की दृष्टि से संवेदनशील हिमालयी क्षेत्रों में कंकरीट की इमारतें कितनी मजबूत हैं, किस पैमाने तक झटके सह सकती हैं, इसका आकलन अब भूवैज्ञानिक कर सकेंगे। साथ ही समय रहते कमजोर इमारतों की मरम्मत कर इन्हें भूकंपरोधी बना सकेंगे। इससे जानमाल का नुकसान कम किया जा सकेगा। यह संभव होगा रैपिड विजुअल स्क्रीनिंग (आरवीएस) तकनीक से। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मंडी के शोधकर्ताओं ने इस तकनीक को विशेष तौर पर जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नगालैंड, सिक्किम, त्रिपुरा और असम के क्षेत्रों के लिए विकसित किया है। हिमाचल के मंडी की इमारतों का अध्ययन करके प्रोटोटाइप तैयार किया है। 

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क्या है आरवीएस तकनीक
आरवीएस किसी इमारत के विजुअल इन्फार्मेशन से यह तय करता है कि वह सुरक्षित है या नहीं। या फिर क्या उसकी भूकंप सुरक्षा बढ़ाने के लिए किस तरह का तत्काल इंजीनियरिंग कार्य करना आवश्यक है। शोध के निष्कर्ष अमेरिका के बुलेटिन ऑफ अर्थक्वेक इंजीनियरिंग में प्रकाशित किए गए हैं। शोध प्रमुख सहायक प्रोफेसर, स्कूल ऑफ सिविल एवं एनवायरनमेंटल इंजीनियरिंग, आईआईटी मंडी डॉ. संदीप कुमार साहा और सह लेखक उनकी पीएचडी छात्रा यती अग्रवाल हैं। पीएचडी स्कॉलर यती ने बताया कि प्रस्तावित प्रक्रिया से पहाड़ी क्षेत्रों में कंकरीट से बनी इमारतों का भूकंप के संभावित खतरों के अनुसार वर्गीकरण करना संभव है। हिमालयी क्षेत्र में इमारतों का जल्द आकलन आवश्यक है। केवल इसलिए नहीं कि इस क्षेत्र में भूकंप का खतरा बना रहता है, बल्कि इसलिए भी कि पिछली दो शताब्दियों के सिस्मिक गैप के चलते किसी भी समय बड़े भूकंप की आशंका है। 
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भूकंप के लिए हिमालय सबसे अधिक संवेदनशील
हिमालय दुनिया के सबसे अधिक भूकंप संभावित क्षेत्रों में से एक है। इसकी वजह भारतीय और यूरेशियन प्लेटों का आपस में टकराना है। इसलिए इन क्षेत्रों में अकसर भूकंप के झटके आते रहते हैं। इससे जानमाल का भारी नुकसान होता है। 2005 में भूकंप से कश्मीर में 1,350 से अधिक लोगों की जान चली गई। कम से कम 1,00,000 लोग घायल हुए। हजारों घर तहस नहस हो गए और लाखों लोग बेघर हो गए। हिमाचल में भी आए दिन भूकंप के झटके  आते रहते हैं।
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कंप्यूटेशन से तैयार होगा डिजाइन
इमारतों की जांच की नई पद्धति में एक पृष्ठ का आसान ऑनलाइन आरवीएस फॉर्म भरना होता है। यह विभिन्न कमजोर पक्षों को ध्यान में रखता है, जो केस स्टडी के तहत इस क्षेत्र की इमारतों में आम तौर पर पाए जाते हैं। इन अवलोकनों के आधार पर इमारतों के लिए भूकंपीय खतरों का स्कोर निर्धारित किया जाता है। इस तरह कमजोर इमारतों को मजबूत इमारतों से अलग वर्गीकरण करना संभव होता है और फिर उनकी सुरक्षा व मरम्मत का बेहतर निर्णय लेना आसान होता है। कंप्यूटेशन से इमारत की मजबूती को डिजाइन किया जाता है।

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