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आईजीएमसी शिमला ने 10 सालों में रोशन की 250 लोगों की जिंदगी

Mon, 26 Aug 2019 03:08 PM IST
Krishan Singh न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Mon, 26 Aug 2019 03:08 PM IST
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IGMC Shimla illuminated 250 lives in 10 years
फाइल फोटो

इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज शिमला ने पिछले 10 सालों में 250 लोगों की आंखों का प्रत्यारोपण कर अंधेरी जिंदगी को रोशन किया है। वर्ष 2010 में शुरू हुए आई बैंक में अभी तक 1147 लोग मृत्यु के बाद अपनी आंखें दान करने की शपथ ले चुके हैं। जबकि 325 आंखें दान की चुकी हैं। 

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आईजीएमसी के नेत्ररोग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. राम लाल ने बताया कि हर वर्ष 40 से 50 आंखों का का प्रत्यारोपण किया जा रहा है। यह आंखें लोगों की दान की हुई होती हैं।
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आईजीएमसी में प्रदेश भर के मरीजों को फायदा पहुंच रहा है। मौजूदा समय में 160 के करीब मरीज अभी भी वेटिंग में हैं। उधर, रविवार से आंखों के डोनेशन को लेकर पंद्रह दिन का पखवाड़ा भी चल रहा है, जो आठ सितंबर को पूरा होगा।
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इस बीच विभाग के डॉक्टर व अन्य स्टाफ वार्डों में जाकर आंखें दान करने को लेकर शपथ दिलाकर जागरूक कर रहा है। उधर, आईजीएमसी के वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डॉ. जनक राज ने बताया कि विभाग में इस सुविधा को और बेहतर बनाने के प्रयास किए जाएंगे।

मुफ्त में होता है ऑपरेशन

विभागाध्यक्ष डॉ. राम लाल ने बताया कि जिन लोगों को यह आंखें लगाई जाती हैं उनका प्रत्यारोपण मुफ्त में किया जाता है। इस पूरे ऑपरेशन में करीब डेढ़ घंटे का समय लगता है। हालांकि मृत व्यक्ति की आंखें निकालने के दौरान उसके ब्लड एचआईवी व अन्य गंभीर बीमारियों के टेस्ट किए जाते हैं। अगर इन टेस्ट की रिपोर्ट पॉजिटिव आती है तब मरीज को यह आंखें नहीं लगाई जाती हैं।

कुछ घंटों के भीतर आंखें निकालनी पड़ती है
डॉक्टरों के मुताबिक व्यक्ति के मरने कुछ घंटों के भीतर के यह आंखें निकालनी होती है। इसके लिए डॉक्टरों की टीम अस्पताल या व्यक्ति के घर जाकर आंखें निकालती है और उसकी जगह कृत्रिम आंखें लगाई जाती हैं। इसके अलावा निकाली गई आंखों से चार से सात दिनों तक सुरक्षित रखती हैं। इस दौरान जिस मरीज को आंखों की जरूरत होती है उन्हें प्रत्यारोपण किया जाता है। 

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