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Shimla News: ऋण का भुगतान नहीं किया तो गारंटर की संपत्ति होगी कुर्क
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न्यायाधीश अपूर्व राज की अदालत ने सुनाया फैसला
कोटखाई के मोहम्मद रफी ने लिए लिया था 2.50 लाख का ऋण
परिचित ने ऋण के लिए जमीन रखवाई थी गिरवी
साल 2007 में अल्पसंख्यक वित्त एवं विकास निगम का मामला
दीपक मेहता
शिमला। सिविल न्यायाधीश अपूर्व राज ने वादी (हिमाचल प्रदेश अल्पसंख्यक वित्त एवं विकास निगम) को तहसील कोटखाई के मोहम्मद रफी और प्रेम लाल (प्रतिवादियों) से ऋण राशि की वसूली करने के आदेश दिए हैं।
अदालत ने माना कि निगम प्रतिवादियों से 3,36,167 रुपये की राशि वसूल करने का हकदार है। इसमें 31 दिसंबर 2023 तक का ब्याज 6 प्रतिशत की दर से बकाया, भविष्य का ब्याज और 3 प्रतिशत प्रति वर्ष की दर से दंडात्मक ब्याज वसूली तक सहित मुकदमे का खर्च शामिल है। प्रतिवादियों को निर्देश दिए हैं कि 6 महीने के भीतर न्यायालय में 3,36,167 रुपये की राशि जमा करे। भुगतान में चूक होने पर वादी बंधक रखी संपत्ति या उसके पर्याप्त भाग को बेचने का हकदार होगा। बिक्री से प्राप्त धनराशि न्यायालय में जमा की जाएगी और वादी को देय राशि के भुगतान में (बिक्री के व्यय में से कटौती के बाद) विधिवत रूप से लागू की जाएगी। शेष राशि प्रतिवादियों या उसके हकदार अन्य व्यक्तियों को दी जाएगी। साल 2007 में प्रतिवादी मोहम्मद रफी ने निगम से 2.50 लाख रुपये का ऋण लिया था। प्रेम लाल ने ऋण के लिए कोटखाई के मोहाल मंडोली में बीघा जमीन गिरवी रखी थी।
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यह है पूरा मामला
14 मार्च 2007 को प्रतिवादी मोहम्मद रफी ने शटरिंग इकाई के व्यवसाय के लिए कसुम्पटी स्थित हिमाचल प्रदेश अल्पसंख्यक वित्त एवं विकास निगम से 2.50 लाख रुपये का ऋण लिया था। इसके लिए मोहम्मद रफी ने प्रेम लाल (जमानत/गारंटर) की जमीन गिरवी रखी। समझौते के तहत ऋण राशि को ब्याज सहित मासिक किस्तों में चुकाने पर सहमति व्यक्त की थी। आरोप लगे कि मोहम्मद रफी वर्ष 2011 से 2023 तक ऋण समझौते की शर्तों के अनुसार ऋण चुकाने में विफल रहे। कानूनी नोटिस जारी किए लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। आखिर में अदालत के समक्ष केस दायर किया था। न्यायालय में केस के दौरान दलीलें दी गईं और सबूतों के आधार पर न्यायालय ने बैंक को प्रतिवादियों से ऋण की वसूली के आदेश देते हुए यह फैसला सुनाया है।
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