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चैडविक फॉल्स को प्रदूषित करने वाले स्रोतों की करें पहचान : हाईकोर्ट
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प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट में खुलासा बिना उपचारित पी सकते चैडविक फॉल्स का पानी, पता करें कहां से आ रहा है गंदा पानी
झरने के पानी में दोगुना मिला है कॉलीफॉर्म का स्तर
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हाईकोर्ट ने राजधानी शिमला के चैडविक फॉल्स (झरने) व सांगटी कैचमेंट एरिया के संरक्षण और पानी में फैल रही गंदगी को लेकर दायर याचिका पर सख्त रुख अपनाया है।
मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश चिराग भानु की खंडपीठ ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, संबंधित अधिकारियों को प्रदूषण के वास्तविक स्रोतों की पहचान करने का आदेश दिया है। राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक चैडविक फॉल्स के सतही पानी को बिना उपचार के पीना सुरक्षित नहीं है। पानी में टोटल कॉलीफॉर्म का स्तर 920 एमपीएन/100 एमएल पाया गया है, जबकि खुले में नहाने के लिए निर्धारित अधिकतम मानक 500 एमपीएन/100 एमएल है। अदालत ने चिंता जताते हुए कहा कि इससे पहले भी कॉलीफॉर्म का स्तर 540 और 920 दर्ज किया था लेकिन अधिकारी अभी तक यह पता लगाने में पूरी तरह विफल रहे हैं कि सीवेज का पानी कहां से आ रहा है।
खंडपीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए) शिमला के सचिव को निर्देश दिए हैं कि वह मामले से जुड़े न्यायमित्र और अन्य पक्षों को नोटिस जारी कर उनके साथ दोबारा चैडविक फॉल्स का निरीक्षण करें। सचिव को स्वतंत्र रिपोर्ट सौंपने को कहा है कि प्रशासन की ओर से बताए सुधारात्मक कदम जमीनी स्तर पर कितने प्रभावी हैं। हाईकोर्ट ने सरकार को प्रदूषण के सटीक स्रोतों की पहचान करने के संबंध में बेहतर हलफनामा दायर करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 28 अक्तूबर को होगी।
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राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से 13 मई 2026 को जारी जल गुणवत्ता रिपोर्ट के अनुसार चैडविक फॉल्स का सतही पानी बिना उपचार के पीने योग्य नहीं है। रिपोर्ट में झरने के पानी में कॉलीफॉर्म का स्तर 920 एमपीएन/100 एमएल पाया गया। खुले में नहाने के लिए निर्धारित अधिकतम मानक 500 एमपीएन/100 एमएल है। ऐसे में चैडविक फॉल्स के पानी में कॉलीफॉर्म का स्तर निर्धारित सीमा से लगभग दोगुना है। कोर्ट ने इस पर नाराजगी जताई कि मार्च 2026 में भी कॉलीफॉर्म की रीडिंग इतनी ही खराब थी लेकिन अधिकारियों ने अभी तक प्रदूषण के स्रोत का पता लगाने में कोई खास प्रगति नहीं की है।
डीसी ने कोर्ट में पेश की अनुपालना रिपोर्ट
डीसी शिमला की ओर से पेश अनुपालन हलफनामे में बताया गया कि एडीसी की अध्यक्षता में 21 अप्रैल 2026 को चैडविक फॉल्स और सांगटी का संयुक्त निरीक्षण किया गया था। झरने के निचले हिस्से में एक तालाब बनाया गया है, शौचालय तैयार है और पर्यटकों के लिए कैफेटेरिया का निर्माण जारी है। डीएफओ (वाइल्डलाइफ) को पैदल रास्तों पर रेलिंग लगाने, तालाब से गाद हटाने और चेक डैम बनाने के निर्देश दिए थे। तीन चेक डैम पहले ही बनाए जा चुके हैं। डीएफओ की रिपोर्ट के अनुसार, 140 मीटर फेंसिंग की गई है और कूड़ेदान बदले गए हैं। अधिकतर घरों को सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट से जोड़ दिया गया है। भौगोलिक कारणों से जिन तीन घरों को सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट से नहीं जोड़ा जा सका है, वहां सेप्टिक टैंक सुचारू रूप से काम कर रहे हैं। अदालत को बताया कि सांगटी नाले में बिना सुरक्षा उपायों के अवैध मलबा डंप करने के आरोप में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने दो स्थानीय निवासियों पर एक-एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया था। हालांकि, इनमें से एक पक्ष की अपील मंजूर हो चुकी है। इसके अलावा, तारादेवी-टटू बाईपास पर भरयाल में डिमोलिशन वेस्ट डिस्पोजल साइट चालू है।
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झरने के पानी में दोगुना मिला है कॉलीफॉर्म का स्तर
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हाईकोर्ट ने राजधानी शिमला के चैडविक फॉल्स (झरने) व सांगटी कैचमेंट एरिया के संरक्षण और पानी में फैल रही गंदगी को लेकर दायर याचिका पर सख्त रुख अपनाया है।
मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश चिराग भानु की खंडपीठ ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, संबंधित अधिकारियों को प्रदूषण के वास्तविक स्रोतों की पहचान करने का आदेश दिया है। राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक चैडविक फॉल्स के सतही पानी को बिना उपचार के पीना सुरक्षित नहीं है। पानी में टोटल कॉलीफॉर्म का स्तर 920 एमपीएन/100 एमएल पाया गया है, जबकि खुले में नहाने के लिए निर्धारित अधिकतम मानक 500 एमपीएन/100 एमएल है। अदालत ने चिंता जताते हुए कहा कि इससे पहले भी कॉलीफॉर्म का स्तर 540 और 920 दर्ज किया था लेकिन अधिकारी अभी तक यह पता लगाने में पूरी तरह विफल रहे हैं कि सीवेज का पानी कहां से आ रहा है।
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खंडपीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए) शिमला के सचिव को निर्देश दिए हैं कि वह मामले से जुड़े न्यायमित्र और अन्य पक्षों को नोटिस जारी कर उनके साथ दोबारा चैडविक फॉल्स का निरीक्षण करें। सचिव को स्वतंत्र रिपोर्ट सौंपने को कहा है कि प्रशासन की ओर से बताए सुधारात्मक कदम जमीनी स्तर पर कितने प्रभावी हैं। हाईकोर्ट ने सरकार को प्रदूषण के सटीक स्रोतों की पहचान करने के संबंध में बेहतर हलफनामा दायर करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 28 अक्तूबर को होगी।
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राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से 13 मई 2026 को जारी जल गुणवत्ता रिपोर्ट के अनुसार चैडविक फॉल्स का सतही पानी बिना उपचार के पीने योग्य नहीं है। रिपोर्ट में झरने के पानी में कॉलीफॉर्म का स्तर 920 एमपीएन/100 एमएल पाया गया। खुले में नहाने के लिए निर्धारित अधिकतम मानक 500 एमपीएन/100 एमएल है। ऐसे में चैडविक फॉल्स के पानी में कॉलीफॉर्म का स्तर निर्धारित सीमा से लगभग दोगुना है। कोर्ट ने इस पर नाराजगी जताई कि मार्च 2026 में भी कॉलीफॉर्म की रीडिंग इतनी ही खराब थी लेकिन अधिकारियों ने अभी तक प्रदूषण के स्रोत का पता लगाने में कोई खास प्रगति नहीं की है।
डीसी ने कोर्ट में पेश की अनुपालना रिपोर्ट
डीसी शिमला की ओर से पेश अनुपालन हलफनामे में बताया गया कि एडीसी की अध्यक्षता में 21 अप्रैल 2026 को चैडविक फॉल्स और सांगटी का संयुक्त निरीक्षण किया गया था। झरने के निचले हिस्से में एक तालाब बनाया गया है, शौचालय तैयार है और पर्यटकों के लिए कैफेटेरिया का निर्माण जारी है। डीएफओ (वाइल्डलाइफ) को पैदल रास्तों पर रेलिंग लगाने, तालाब से गाद हटाने और चेक डैम बनाने के निर्देश दिए थे। तीन चेक डैम पहले ही बनाए जा चुके हैं। डीएफओ की रिपोर्ट के अनुसार, 140 मीटर फेंसिंग की गई है और कूड़ेदान बदले गए हैं। अधिकतर घरों को सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट से जोड़ दिया गया है। भौगोलिक कारणों से जिन तीन घरों को सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट से नहीं जोड़ा जा सका है, वहां सेप्टिक टैंक सुचारू रूप से काम कर रहे हैं। अदालत को बताया कि सांगटी नाले में बिना सुरक्षा उपायों के अवैध मलबा डंप करने के आरोप में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने दो स्थानीय निवासियों पर एक-एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया था। हालांकि, इनमें से एक पक्ष की अपील मंजूर हो चुकी है। इसके अलावा, तारादेवी-टटू बाईपास पर भरयाल में डिमोलिशन वेस्ट डिस्पोजल साइट चालू है।