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Shimla News: एचपी बोर्ड की ही किताबें खरीदने के आदेश से सैकड़ों अभिभावक परेशान

Fri, 25 Apr 2025 11:59 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Fri, 25 Apr 2025 11:59 PM IST
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Hundreds of parents are upset due to the order to buy only HP Board books
निजी स्कूलों को बच्चों को बोर्ड का लोगो लगी किताबें पढ़ानीं होंगी, उल्लंघन करने पर होगी कार्रवाई
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अभिभावक पहले ही खरीद चुके हैं बाजार से किताबें
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड से संबद्ध निजी स्कूलों में बोर्ड की तरफ से जारी पाठ्य और प्रायोगिक पुस्तकें उपलब्ध करवाने के आदेशों ने निजी स्कूलों के अभिभावकों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। 11 फरवरी से शुरू हो चुके नए शैक्षणिक सत्र के लिए स्कूल शिक्षा बोर्ड के डिपो में किताबें उपलब्ध न होने पर अभिभावकों ने बाजार से पुस्तकें खरीद ली हैं, इनमें एनसीईआरटी की किताबें भी हैं।
वहीं अब स्कूलों को बोर्ड से जारी हुए आदेशों के बाद अभिभावकों को मैसेज मिल रहे हैं कि वह सुनिश्चित करें कि उनके बच्चों के पास बोर्ड में छपी और बताईं किताबें हैं या नहीं। निजी स्कूलों को बाकायदा छात्रों ने कहां से किताबें खरीदी हैं, उसके बिल और बोर्ड की पंजीकृत दुकानों से किताबों के बिल काउंटर साइन कर बोर्ड को भेजने को कहा है। स्कूल शिक्षा बोर्ड के सचिव की ओर से जारी आदेशों में निजी स्कूलों को चेतावनी दी है कि बोर्ड की टीम कभी भी किसी भी संबद्ध स्कूल का निरीक्षण कर छात्रों के पास उपलब्ध किताबों की जांच कर सकती है। यदि एनसीईआरटी की किताबें मिलीं तो स्कूलों पर संबद्धता नियम 16.13.2 (b) (h) के तहत कार्रवाई होगी। स्कूल की ओर से आए मैसेज के बाद अभिभावकों को अब उनके पास एनसीईआरटी की किताबें हैं जिनमें एचपी बोर्ड नहीं छपा है, तो उन्हें दोबारा किताबें खरीदनी पड़ेंगी। अभिभावक पूजा, रीना ठाकुर, चंपा शर्मा, पूजा शर्मा और अल्का हिमटा ने कहा कि कक्षाएं शुरू हुए एक माह से अधिक का समय बीत चुका है, अब स्कूलों से आ रहे इन मैसेजों के बाद एनसीईआरटी की जगह बोर्ड की किताबें खरीदनी पड़ेंगी। इससे दोहरा खर्च हो जाएगा।
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हिमाचल प्रदेश संबद्ध पब्लिक स्कूल एसोसिशन की मांग पर लागू की गई है व्यवस्था
हिमाचल प्रदेश संबद्ध पब्लिक स्कूल एसोसिएशन के अध्यक्ष जगजीत सिंह ठाकुर ने बोर्ड सचिव से शिकायत की थी जिसके बाद बोर्ड की किताबों की अनिवार्यता को लागू किया है। शिकायत में कहा था कि निजी स्कूल अपनी मर्जी से हर साल किताबें बदल रहा है। एसोसिएशन ने बीस जनवरी को बोर्ड सचिव को लिखे पत्र में बोर्ड के बुक वितरण केंद्रों से पुस्तकें उपलब्ध करवाने की मांग की थी। कहा था कि पुस्तक विक्रेता पूरी किताबों के सेट उपलब्ध नहीं करवा रहे थे। इसमें बोर्ड से किताबों को दस फीसदी छूट के साथ उपलब्ध करवाने और जो किताबें नहीं बिकी हैैं उसे वापस करने की सुविधा देन की मांग की थी। इसके बाद ही बोर्ड ने 29 जनवरी को बोर्ड से संबद्ध निजी स्कूलों को पत्र जारी कर बोर्ड के अधीन पंजीकृत पुस्तक विक्रेताओं या डिपो से किताबें खरीद कर वितरित करने की व्यवस्था करने को कहा था।
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फैसले पर पुनर्विचार करे बोर्ड : कश्यप
प्राइवेट स्कूल फेडरेशन के अध्यक्ष एवं पूर्व में भाजपा सरकार में शहरी विकास मंत्री रहे रूप दास कश्यप ने कहा कि पहली बार लागू की इस व्यवस्था में निजी स्कूलों को कुछ छूट दी जानी चाहिए। अधिकतर अभिभावक पाठ्य पुस्तकों को दुकानों से खरीद चुके हैं। इनसे ब्योरा एकत्र करना और बिलों को काउंटर साइन के साथ जमा करवाना मुश्किल हो रहा है। इसलिए बोर्ड इस निर्णय पर अभिभावकों और स्कूल संचालकों की दिक्कतों को देखते हुए पुनर्विचार करें और कुछ छूट दें।


स्वागत योग्य है फैसला : मंच
छात्र-अभिभावक मंच के राज्य संयोजक विजेंद्र मेहरा ने स्कूल शिक्षा बोर्ड के इस फैसले का स्वागत किया है। कहा कि इससे निजी स्कूलों की पाठ्य पुस्तकों को लेकर चल रही मनमानी रुकेगी। बोर्ड की किताबों को अनिवार्य किए जाने के साथ हर सत्र के शुरू होने पर यह पुस्तकें उपलब्ध करवाना सुनिश्चित करें।
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