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Shimla News: एचपीयू खरीदेगा 32 सीटर नई बस, प्रस्ताव को मंजूरी
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कम बसें होने से परेशान हैं छात्र और कर्मचारी
एक और बस मिलने से आंशिक राहत की उम्मीद
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) शिमला जल्द एक 32 सीटर बस खरीदेगा। बस खरीद के प्रस्ताव को विवि प्रबंधन ने मंजूरी प्रदान कर दी है। बसों की कमी और सीमित संख्या में ही वाहनों के संचालन के कारण छात्रों तथा कर्मचारियों को रोजाना विवि तक आवागमन करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
अभी विश्वविद्यालय की 4 में से 2 ही बसें चल रही हैं। दो बसें खराब हैं, अब एक नई बस आने से कर्मचारियों और छात्रों को कुछ राहत मिलेगी। उपलब्ध बसों की संख्या आवश्यकता के मुकाबले कम होने से स्थिति लगातार बिगड़ती गई। कई बसें तकनीकी कारणों से नियमित रूप से संचालन में नहीं रह पा रही थीं जिससे पूरे विश्वविद्यालय का परिवहन बोझ कुछ ही बसों पर आ गया था। हालात यह है कि केवल गिनी-चुनी बसें ही नियमित रूप से चल रही हैं जबकि यात्रियों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।
सुबह और शाम के समय बसों में भीड़ आम बात है। 32 सीटर नई बस की मंजूरी से विश्वविद्यालय को कुछ राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। इस बस के विवि के बेड़े में शामिल होने से प्रमुख रूटों पर दबाव कम होगा। विश्वविद्यालय में परिवहन व्यवस्था को लेकर आगे भी सुधार की मांग उठ रही है। छात्रों और कर्मचारियों का कहना है कि जब तक बसों की संख्या में बढ़ोतरी नहीं होती तब तक समस्या पूरी तरह हल नहीं होगी।
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एक और बस मिलने से आंशिक राहत की उम्मीद
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) शिमला जल्द एक 32 सीटर बस खरीदेगा। बस खरीद के प्रस्ताव को विवि प्रबंधन ने मंजूरी प्रदान कर दी है। बसों की कमी और सीमित संख्या में ही वाहनों के संचालन के कारण छात्रों तथा कर्मचारियों को रोजाना विवि तक आवागमन करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
अभी विश्वविद्यालय की 4 में से 2 ही बसें चल रही हैं। दो बसें खराब हैं, अब एक नई बस आने से कर्मचारियों और छात्रों को कुछ राहत मिलेगी। उपलब्ध बसों की संख्या आवश्यकता के मुकाबले कम होने से स्थिति लगातार बिगड़ती गई। कई बसें तकनीकी कारणों से नियमित रूप से संचालन में नहीं रह पा रही थीं जिससे पूरे विश्वविद्यालय का परिवहन बोझ कुछ ही बसों पर आ गया था। हालात यह है कि केवल गिनी-चुनी बसें ही नियमित रूप से चल रही हैं जबकि यात्रियों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।
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सुबह और शाम के समय बसों में भीड़ आम बात है। 32 सीटर नई बस की मंजूरी से विश्वविद्यालय को कुछ राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। इस बस के विवि के बेड़े में शामिल होने से प्रमुख रूटों पर दबाव कम होगा। विश्वविद्यालय में परिवहन व्यवस्था को लेकर आगे भी सुधार की मांग उठ रही है। छात्रों और कर्मचारियों का कहना है कि जब तक बसों की संख्या में बढ़ोतरी नहीं होती तब तक समस्या पूरी तरह हल नहीं होगी।
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