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छात्र संघ चुनाव को बहाल करे एचपीयू : एसएफआई

Sat, 01 Nov 2025 11:59 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Sat, 01 Nov 2025 11:59 PM IST
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HPU should restore student union elections: SFI
संगठन ने कुलपति को सौंपा ज्ञापन, हॉस्टल सुविधा मुहैया करवाने का भी किया आग्रह
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4000 छात्रों में से 1200 को ही हॉस्टल सुविधा

संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) की हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय इकाई ने कुलपति महावीर सिंह को ज्ञापन सौंपकर छात्र संघ चुनाव बहाल करने की मांग की है।

संगठन के विश्वविद्यालय परिसर सचिव मुकेश और इकाई अध्यक्ष अंकुश ठाकुर ने कहा कि पिछले एक दशक से छात्र राजनीति को लगातार दबाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि 2013 से हिमाचल प्रदेश में छात्र संघ चुनाव बंद हैं, जिससे छात्र समुदाय का प्रतिनिधित्व समाप्त हो गया है और प्रशासन के प्रति जवाबदेही की भावना कमजोर पड़ी है। एसएफआई ने कहा कि छात्र संघ चुनाव न केवल नेतृत्व निर्माण का माध्यम हैं बल्कि यह विश्वविद्यालय में लोकतांत्रिक संवाद और पारदर्शिता को भी मजबूत करते हैं। संगठन ने मांग की कि हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में प्रत्यक्ष छात्र संघ चुनाव शीघ्र बहाल किए जाएं।
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एसएफआई नेताओं ने वर्ष 2019 में किए 103वें सांवैधानिक संशोधन का उल्लेख करते हुए कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (ईडब्ल्यूएस) के छात्रों को उच्च शिक्षा में 10 प्रतिशत आरक्षण का अधिकार मिला है, लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन ने इसे अभी तक लागू नहीं किया है। संगठन ने इसे संविधान की भावना का उल्लंघन बताया और आरक्षण की तुरंत बहाली की मांग की। संगठन ने विश्वविद्यालय में छात्रावासों की गंभीर कमी पर भी चिंता जताई। कॉमरेड मुकेश ने कहा कि लगभग 4000 छात्रों में से केवल 1200 को ही हॉस्टल सुविधा मिल रही है। एसएफआई ने विश्वविद्यालय में गैर-शिक्षक कर्मचारियों की लंबित भर्ती का मुद्दा भी उठाया। संगठन ने कहा कि 2019 और 2021 में भर्ती के विज्ञापन जारी किए गए, लेकिन अब तक कोई नियुक्ति नहीं हुई। आवेदन शुल्क के रूप में विश्वविद्यालय ने लगभग 4.5 करोड़ रुपये वसूले हैं जबकि भर्ती प्रक्रिया पूरी नहीं की गई। एसएफआई ने इसे बेरोजगार युवाओं के साथ अन्याय बताया और मांग की कि भर्ती प्रक्रिया को बिना किसी देरी के पूरा किया जाए। अंकुश ठाकुर ने कहा कि पहले विवि के पास आठ बसें थीं जिनमें से अब केवल चार ही चल रही हैं। इससे डे-स्कॉलर्स को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है।
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