एचपीयू शिमला की ईसी और कोर्ट सदस्य चुनाव में कांग्रेस-माकपा का परचम
नव निर्वाचित ईसी सदस्य राज कुमारी और कोर्ट सदस्य राम लाल ने सहयोग के लिए कर्मचारियों का आभार जताया। कहा कि कर्मचारियों को बांटने की रची जा रही साजिशों को विवि के कर्मचारियों ने जवाब दिया है। यह विवि का चुनाव है, इसलिए कर्मचारियों ने विवि और आम कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए अपने मत का प्रयोग किया है।
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हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय की कार्यकारी परिषद (ईसी) और विश्वविद्यालय कोर्ट सदस्य के बुधवार को हुए चुनाव में कांग्रेस-माकपा विचारधारा के कर्मचारियों ने जीत हासिल कर परचम फहराया। चुनाव में ईसी सदस्य के पद पर कांग्रेस और माकपा गठबंधन की ओर से मैदान में उतरीं राजकुमारी ने 21 मतों से जीत दर्ज की है। विचारधारा के रामलाल ने 51 मतों से चुनाव जीता। बुधवार को शाम 5:15 बजे विवि के कुलसचिव सुनील शर्मा ने नतीजों की विधिवत घोषणा की। चुनाव में 851 में से 728 मतदाताओं ने वोट डाले। ईसी सदस्य के पद पर विजयी रही राजकुमारी को 367 मत पड़े, जबकि भाजपा विचारधारा के कर्मचारियों की ओर से मैदान में उतारे गए बिपन कुमार को 346 मत पड़े। 15 मत अमान्य घोषित किए गए। कोर्ट सदस्य के चुनाव में विजयी रहे रामलाल को 385 मत पड़े। भाजपा विचारधारा के उम्मीदवार रहे बुद्धि राम को 334 मत पड़े। इस पद पर 9 मत अमान्य करार दिए गए। विजयी उम्मीदवारों ने कुलपति कार्यालय के बाहर जीत का जश्न मनाया।
कर्मचारियों को बांटने की कोशिश हुई नाकाम : राजकुमारी
शिमला। नव निर्वाचित ईसी सदस्य राज कुमारी और कोर्ट सदस्य राम लाल ने सहयोग के लिए कर्मचारियों का आभार जताया। कहा कि कर्मचारियों को बांटने की रची जा रही साजिशों को विवि के कर्मचारियों ने जवाब दिया है। यह विवि का चुनाव है, इसलिए कर्मचारियों ने विवि और आम कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए अपने मत का प्रयोग किया है। उनका प्रयास रहेगा कि वह आम कर्मचारियों की ओर से जताए गए विश्वास को कायम रखें। गैर शिक्षक कर्मचारी संघ के अध्यक्ष राजेश ठाकुर सहित कर्मचारी नेता तेज राम शर्मा, गीता राम अन्य नेताआें ने विवि कर्मचारी एकता जिंदाबाद के नारे लगवाए। पूर्व में चार बार सदस्य रहे सेवानिवृत्त कर्मचारी नेता चौधरी वरयाम सिंह बैंस ने राज कुमारी और राम लाल को जीत पर बधाई दी।
भाजपा समर्थकों को पटकनी से उत्साहित कांग्रेस और माकपा
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में हाल ही में कर्मचारियों के हुए चुनाव में लगातार दूसरी बार भाजपा समर्थित कर्मचारियों की हार हुई है। विवि में सब कुछ सरकार के हाथों में होने के बावजूद कर्मचारियों ने इन दो चुनाव में आखिर क्यों भाजपा समर्थितों को नकारा है, यह अहम सवाल है। जबकि इन चुनावों में लगातार भाजपा विचारधारा के समर्थित जीतते आ रहे थे।
पहले विवि के सबसे बड़े कर्मचारी संघ गैर शिक्षक संघ चुनाव में कांग्रेस-माकपा ने हाथ मिलाकर चुनाव लड़ने का निर्णय लिया और उनकी भाजपा समर्थितों का बाहर करने की यह रणनीति कामयाब रही। चुनाव में भाजपा समर्थितों का पूरा पैनल ही हार गया। फिर विवि की निर्णायक संस्थाओं कार्यकारिणी परिषद और विवि कोर्ट सदस्य के बुधवार को हुए चुनाव में एक बार फिर से भाजपा समर्थित विचार के दोनों ही उम्मीदवार हार गए। इन चुनावी नतीजों के कारणों पर हारे उम्मीदवारों को मंथन करना जरूरी है।