HPBOSE: 12वीं की मेरिट में इन जिलों का दबदबा, सरकारी स्कूलों का डंका
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हिमाचल स्कूल शिक्षा बोर्ड की ओर से घोषित 12वीं की मेरिट लिस्ट में शिमला और बिलासपुर के मेधावियों का दबदबा रहा है। जबकि, दुर्गम जिले किन्नौर और लाहौल-स्पीति से एक भी विद्यार्थी मेरिट में स्थान नहीं बना सका है।
तीनों संकायों के कुल 58 टॉप-10 स्थानों पर दोनों जिलों से एक भी बच्चे का नाम शामिल नहीं हैं। जमा दो में शिमला और बिलासपुर ने सर्वाधिक नौ-नौ टॉपर्स हैं। हमीरपुर और कुल्लू सात-सात टॉपर के साथ दूसरे कांगड़ा और ऊना छह-छह टॉपर्स के साथ तीसरे स्थान पर हैं।
सिरमौर से पांच, मंडी से चार, सोलन से तीन और चंबा से दो बच्चों ने मेधावी सूची में दर्ज करवाए हैं। इसके अलावा कला संकाय में लाहौल-स्पीति और किन्नौर के साथ सोलन से एक भी टॉपर्स नहीं है, जबकि वाणिज्य में चंबा, कांगड़ा, हमीरपुर, बिलासपुर, लाहौल-स्पिति और किन्नौर, विज्ञान में लाहौल-स्पीति, किन्नौर, चंबा और सिरमौर से एक भी टॉपर नहीं है।
सरकारी स्कूलों का डंका, प्राइवेट पिछड़े
मनमानी फीस वसूली के विवाद में फंसे निजी स्कूल इस बार टॉपर देने में सरकारी स्कूलों से पिछड़ गए। कला, वाणिज्य और विज्ञान के कुल 58 मेधावी बच्चों की सूची में 31 सरकारी और 27 निजी स्कूलों के हैं। टॉप-3 में कुल 11 नामों में से निजी स्कूलों के सात, जबकि सरकारी स्कूल के चार बच्चे हैं।
कला संकाय में टॉप-10 में कुल 18 में से 17 सरकारी और निजी स्कूल का एक ही छात्र है। वाणिज्य की टॉप-10 सूची में नौ सरकारी और चार निजी, जबकि विज्ञान संकाय में कुल 27 टॉप-10 में से 22 निजी और पांच सरकारी स्कूलों के बच्चे शामिल हैं।
मेधावियों और शिक्षकों को सम्मानित करेगा बोर्ड
शिक्षा बोर्ड मेधावी बच्चों के अलावा अच्छे परिणाम देने वाले अध्यापकों को सम्मानित करेगा। इसके लिए बोर्ड जुलाई में सम्मान समारोह आयोजित करेगा।
50 फीसदी घटे नकल के मामले
स्कूल शिक्षा बोर्ड की वार्षिक परीक्षाओं में पिछले साल के मुकाबले इस बार नकल के मामले 50 फीसदी कम आए हैं। साल 2018 में बोर्ड की परीक्षाओं में 1000 से अधिक नकल के मामले सामने आए थे, जो इस बार 450 रह गए हैं। इसमें 344 जमा दो, दसवीं में 104 और मिडल में मात्र दो नकल के मामले सामने आए हैं।
स्कूल शिक्षा बोर्ड ने जमा दो की वार्षिक परीक्षाओं के परिणाम को घोषित करने में इस बार नया रिकॉर्ड बनाया है। पिछले साल के मुकाबले जमा दो का परिणाम दो दिन पहले निकाला गया है। पिछले साल 24 अप्रैल को जमा दो का परिणाम आया था।
शीघ्र परिणाम देने के ये हैं फायदे
जमा दो की वार्षिक परीक्षाओं के बाद कई विश्वविद्यालयों में प्रवेश सहित विभिन्न संस्थाओं में नौकरियों के लिए आवेदन मई-जून माह में मांगे जाते हैं। आवेदन करते समय कई फार्मों में जमा पास की शर्त रखी गई होती है। ऐसे में परिणाम देरी से आने के कारण कई बच्चे इस फार्मों को नहीं भर पाते थे