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Himachal News: फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस मामले में हिमाचल हाईकोर्ट सख्त, एफआईआर करने, एसआईटी बनाने के आदेश
Tue, 12 May 2026 05:00 AM IST
Ankesh Dogra
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
Published by: Ankesh Dogra
Updated Tue, 12 May 2026 05:00 AM IST
सार
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने प्रदेश में फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने के गंभीर आरोपों पर कहा कि यदि कोई संज्ञेय अपराध बनता है, तो एसपी ऊना तुरंत एफआईआर दर्ज करें। जानें पूरा मामला...
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
विस्तार
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने प्रदेश में फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने के गंभीर आरोपों पर कड़ा संज्ञान लिया है। खंडपीठ ने इस मामले में ऊना के पुलिस अधीक्षक (एसपी) को प्रतिवादी के रूप में शामिल करने का निर्देश दिया है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आदेश दिया है कि यदि कोई संज्ञेय अपराध बनता है, तो एसपी ऊना तुरंत एफआईआर दर्ज करें।
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कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पुलिस को अदालती कार्यवाही के अंतिम परिणाम का इंतजार किए बिना एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के नेतृत्व में विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन कर जल्द जांच शुरू करनी होगी। अदालत ने सरकार और पुलिस प्रशासन को अगली सुनवाई तक स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 23 जून को होगी। जनहित याचिका में चौंकाने वाले तथ्य पेश किए गए हैं। उन्होंने बताया कि ड्राइविंग लाइसेंस जारी करते हुए दस्तावेजों में भारी गड़बड़ी पाई गई है। एक ही आधार नंबर पर दो लाइसेंस जारी किए गए हैं। कई ऐसे ड्राइविंग लाइसेंस जारी किए गए हैं, जिनके लाभार्थी संबंधित राज्यों के निवासी तक नहीं हैं।
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एक मामले में लाइसेंस पर मध्य प्रदेश लिखा है, लेकिन जारी करने वाली अथॉरिटी डीटीओ ईटानगर (अरुणाचल प्रदेश) है, जबकि लाइसेंस नंबर उत्तर प्रदेश से शुरू हो रहा है और व्यक्ति ऊना का निवासी है। एक अन्य दस्तावेज में लाइसेंस बिहार सरकार की ओर से जारी किया दिखाया गया है, लेकिन उस पर आरटीओ सुल्तानपुर अंकित है और लाइसेंस नंबर (महाराष्ट्र) का है। सबसे गंभीर आरोप यह है कि ऊना निवासी मनजीत सिंह और हरदीप कुमार नामक दो अलग-अलग व्यक्तियों के आधार कार्ड नंबर एकसमान पाए गए हैं।
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