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एचपी: डीएचएस से डॉक्टरों को विकल्प पूछे बिना डीएमई कैडर में तैनात करने पर हाईकोर्ट की रोक, सरकार से मांगा जवाब

Fri, 11 Sep 2026 05:15 AM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Fri, 11 Sep 2026 05:15 AM IST
सार

डीएचएस में कार्यरत चिकित्सा अधिकारियों को उनकी सहमति या विकल्प लिए बिना चिकित्सा शिक्षा कैडर (डीएमई) में असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में तैनात करने के राज्य सरकार के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है।

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hp High Court stays posting of DHS doctors to the DME cadre without seeking their preference; seeks response f
हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने स्वास्थ्य सेवा निदेशालय (डीएचएस) में कार्यरत चिकित्सा अधिकारियों को उनकी सहमति या विकल्प लिए बिना चिकित्सा शिक्षा कैडर (डीएमई) में असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में तैनात करने के राज्य सरकार के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है। न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ की अदालत ने 13 अगस्त की उस अधिसूचना के क्रियान्वयन पर रोक लगाई है, जिसके तहत याचिकाकर्ताओं को डॉ. वाईएस परमार राजकीय मेडिकल कॉलेज नाहन और अन्य संस्थानों में असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में नामित किया गया था।

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अदालत ने स्पष्ट किया कि सभी याचिकाकर्ताओं को उनके मूल डीएचएस कैडर में ही कार्य करने दिया जाए और उनकी वर्तमान तैनाती वाले स्थानों पर सेवाएं जारी रखी जाएं। हाईकोर्ट ने यह अंतरिम राहत डॉ. तरुण कुमार और अन्य चिकित्सा अधिकारियों की ओर से दायर रिट याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान दी। अदालत ने राज्य सरकार को मामले में तीन सप्ताह के भीतर विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि याचिकाकर्ता डीएचएस कैडर से संबंध रखते हैं।

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स्वीकार नहीं की सरकार की दलील
30 मार्च की सरकारी अधिसूचना के अनुसार कॉमन कैडर लागू करने से पहले पात्र चिकित्सा अधिकारियों से डीएचएस या डीएमई कैडर में शामिल होने के लिए लिखित विकल्प लेना आवश्यक था। याचिकाकर्ताओं से ऐसा कोई विकल्प नहीं लिया गया था। ऐसे में उन्हें उनकी इच्छा के विरुद्ध डीएमई कैडर में स्थानांतरित करना नियमों के अनुरूप नहीं है। राज्य सरकार की ओर से दलील दी गई कि 25 सितंबर 2017 की अधिसूचना के तहत सरकार को आपात स्थिति या जनहित में नियमों में छूट देने का अधिकार है। अदालत ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने कहा कि 2017 की व्यवस्था के तहत भी इच्छुक और पात्र डॉक्टरों से आवेदन आमंत्रित कर पैनल तैयार करने की प्रक्रिया निर्धारित है।

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