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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   HP High Court: speedy disposal of the case fundamental right of the accused

HP High Court: मुकदमे का शीघ्र निपटारा अभियुक्त का मौलिक अधिकार

Wed, 22 Feb 2023 11:03 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Wed, 22 Feb 2023 11:03 PM IST
सार

हाईकोर्ट ने विचाराधीन कैदी को जमानत पर रिहा करने के मामले में अहम निर्णय सुनाया है। न्यायाधीश सत्येन वैद्य ने कहा कि मुकदमे का शीघ्र निपटारा किया जाना अभियुक्त का मौलिक अधिकार है। 

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HP High Court: speedy disposal of the case fundamental right of the accused
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने विचाराधीन कैदी को जमानत पर रिहा करने के मामले में अहम निर्णय सुनाया है। न्यायाधीश सत्येन वैद्य ने कहा कि मुकदमे का शीघ्र निपटारा किया जाना अभियुक्त का मौलिक अधिकार है। इस अधिकार को कठोर नियम से कमजोर नहीं किया जा सकता है। मादक पदार्थ निरोधक अधिनियम की धारा 37 की व्याख्या करते हुए अदालत ने यह निर्णय सुनाया। अदालत ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया कि हिरासत की अवधि के दौरान मुकदमे के लंबित रहने पर धारा 37 के प्रावधानों को समान प्रभावकारिता के रुप में नहीं माना जा सकता। मादक पदार्थ निरोधक अधिनियम की धारा 37 में प्रावधान है कि किसी अभियुक्त को जमानत तब तक नहीं दी जानी चाहिए जब तक कि अभियुक्त दोहरी शर्तों को पूरा करने में सक्षम न हो। यानी यह विश्वास करने के लिए उचित आधार हो कि अभियुक्त इस तरह के अपराध का दोषी नहीं है।

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साथ ही अभियुक्त इस तरह का अपराध नहीं करेगा या ऐसा करने की संभावना नहीं है। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का हवाला देते हुए अपने निर्णय में कहा कि बिना दोष सिद्धि के आरोपी को कारावास में रखना उचित नहीं है। अदालत ने पाया कि कुल्लू निवासी विद्या देवी से पुलिस ने 1.8 किलोग्राम चरस बरामद की थी जोकि एक वाणिज्यिक मात्रा है। पुलिस ने उसके खिलाफ मादक पदार्थ निरोधक अधिनियम की धारा 20 के तहत प्राथमिकी दर्ज की। अदालत को बताया गया कि आरोपी 16 फरवरी 2020 से हिरासत में है। विचारण अदालत में अभी अभियोजन पक्ष के 16 गवाहों में से सिर्फ पांच गवाहों के बयान दी दर्ज किए गए हैं। ऐसे में विचारण अदालत को मुकदमे का निपटारा करने में लंबा समय लग सकता है।

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