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निजी बस मालिक को कोर्ट में झूठ बोलना पड़ा महंगा, नोटिस जारी
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
Updated Sat, 06 May 2017 10:07 AM IST
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झूठ बोलकर सरकारी खर्च पर वकील पाना एक निजी बस के मालिक को महंगा पड़ गया है। हाईकोर्ट ने प्रतिवादी के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई चलाने के लिए नोटिस जारी किया है। मामले पर सुनवाई 24 मई को होगी।
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न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि यह सुविधा केवल समाज के उस कमजोर वर्ग को दी जाती है, जो वकील करने में सक्षम नहीं होता है। निजी बसों के टाइम टेबल को लेकर हाईकोर्ट के समक्ष रतन चंद द्वारा दायर एक मामले में कांगड़ा के एक निजी बस सर्विस के प्रतिवादी मालिक ने यह कहकर सरकारी खर्च पर कानूनी सहायता प्रदान करने की मांग की थी कि वह वकील करने की स्थिति में नहीं है।
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हालांकि उसे 29 अप्रैल 2016 को पारित आदेशों के मुताबिक कोर्ट ने पिछले तीन साल की इनकम टैक्स रिटर्न दायर करने को कहा था। कोर्ट में दायर 2013-14, 2014-15 और 2015-16 की रिटर्न के मुताबिक प्रतिवादी की आय क्रमश: 234699, 307196 और 365386 बताई गई थी।
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कोर्ट ने पाया कि यह प्रतिवादी मुफ्त कानूनी सहायता पाने का पात्र नहीं था। कोर्ट ने कहा कि हर मुवक्किल का यह दायित्व बनता है कि वह कोर्ट के समक्ष झूठ न बोले। ईमानदार व साफ तरीके से पेश आए। कोर्ट ने प्रतिवादी के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई चलाने के लिए नोटिस जारी किया है। मामले पर सुनवाई 24 मई को होगी।