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वन भूमि पर अतिक्रमण मामले में हाईकोर्ट सख्त, वन सचिव को दिए ये आदेश

Mon, 05 Feb 2018 11:44 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Updated Mon, 05 Feb 2018 11:44 AM IST
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hp high court ordered to file status report in forest land encroachment cases

हाईकोर्ट ने वन भूमि पर अतिक्रमण को हटाने को लेकर दिए आदेशानुसार स्टेटस रिपोर्ट दायर न करने पर वन सचिव को फिर से ताजा स्टेटस रिपोर्ट दायर करने के आदेश दिए। न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान ने वन विभाग को स्टेटस रिपोर्ट में यह स्पष्ट करने के आदेश दिए कि रविवार और अन्य छुट्टी वाले दिनों में वन भूमि को अवैध कब्जों से मुक्त करने के लिए क्या-क्या किया।

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कोर्ट ने अवैध कब्जाधारियों से वन भूमि को छुड़ाने की मुहिम और छुड़ाई गई भूमि की विस्तृत जानकारी वेब पोर्टल सहित अन्य प्रचार के माध्यम से जनता तक पहुंचाई जाए। हाईकोर्ट ने वन भूमि पर अवैध कब्जों से जुड़े मामलों में वन विभाग को आदेश दिए थे कि वह हर सप्ताह वन भूमि से हटाए गए अतिक्रमण की जानकारी अपनी वेब पोर्टल पर डाले।
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पूरे प्रदेश में यह मुहिम जारी रखे और वन भूमि को अवैध अतिक्रमण से मुक्त कर अपने कब्जे में ले। कोर्ट को दी गई जानकारी में अतिरिक्त मुख्य सचिव वन ने हलफनामे के माध्यम से बताया कि 7 जनवरी से 15 जनवरी तक एक सप्ताह के भीतर 45 मामलों में 409 बीघा के करीब वन भूमि से सेब के पेड़ों को काटकर उसे अवैध कब्जा मुक्त किया गया।
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अदालत को गुमराह करने का भी लगा था आरोप

hp high court ordered to file status report in forest land encroachment cases

यह कार्रवाई शिमला, रामपुर, कुल्लू और मंडी में अमल में लाई गई। रिपोर्ट के अनुसार इस दौरान सबसे ज्यादा वन भूमि पर अतिक्रमण करने वाले रोहड़ू तहसील के गांव अर्हल में भागू राम से 73 बीघा 13 बिस्वा छुड़ाई गई।

वन विभाग पूरे प्रदेश में हटाए गए या हटाए जा रहे वन भूमि से अवैध कब्जों का ब्योरा देने में नाकाम रहा। हालांकि वन विभाग ने बताया कि हटाये गए कब्जों की जानकारी वेब पोर्टल पर डाली जा रही है। अब मामले में अगली सुनवाई 28 फरवरी को होगी। 

पिछली सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा था कि वन विभाग के संबंधित अधिकारी कोर्ट में झूठे आंकड़े पेश कर अदालत को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं। कोर्ट ने वन विभाग के अधिकारियों से यह स्पष्ट करने को कहा था कि जब अदालत ने 5 बीघा से अधिक वन भूमि पर अतिक्रमण करने वाले

कब्जाधारियों के कब्जे तुरंत हटाने के आदेश दिए थे तो उन्होंने अदालत के आदेशों की अनुपालना क्यों नहीं की। कोर्ट ने वन विभाग के प्रधान सचिव को आदेश दिए कि वह अवैध कब्जाधारियों के खिलाफ  की गई कार्रवाई शपथ पत्र के माध्यम से कोर्ट को बताए।

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