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HP High Court: सरकार का फैसला खारिज, दो दिनों में अनापत्ति प्रमाणपत्र जारी करने के आदेश
Sat, 29 Jul 2023 07:51 PM IST
Krishan Singh
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
Published by: Krishan Singh
Updated Sat, 29 Jul 2023 07:51 PM IST
सार
न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर ने कहा कि राज्य की नीति सरकार में पद धारण करने वाले व्यक्ति की व्यक्तिगत राय पर आधारित नहीं हो सकती है।
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की ओर से सामूहिक नीतिगत निर्णय न लिए जाने पर कड़ा संज्ञान लिया है। न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर ने कहा कि राज्य की नीति सरकार में पद धारण करने वाले व्यक्ति की व्यक्तिगत राय पर आधारित नहीं हो सकती है। अदालत ने कहा कि राज्य की नीति कोई सांविधानिक पद पर आसीन व्यक्ति की इच्छा या कल्पना पर आधारित नहीं हो सकती है। अदालत ने बिलासपुर के शिवा इंस्टीट्यूट की याचिका को स्वीकार करते हुए यह निर्णय सुनाया। अदालत ने राज्य सरकार के उस निर्णय को खारिज कर दिया, जिसके तहत याचिकाकर्ता संस्थान को एम फार्मेसी कोर्स के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी न करने का निर्णय लिया गया था।
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अदालत ने राज्य सरकार को आदेश दिए कि वह याचिकाकर्ता संस्थान को सोमवार सुबह 11 बजे से पहले अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी करे। अदालत ने पाया कि याचिकाकर्ता संस्थान को अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी करने के लिए सचिव शिक्षा तक के सभी अधिकारियों ने अनुमोदन किया था। लेकिन संबंधित मंत्री ने यह कहकर अनापत्ति प्रमाण जारी करने से इंकार कर दिया कि एम फार्मेसी कोर्स के लिए सीटें खाली रह रही हैं। सरकार ने यह दलील दी थी कि शिक्षा में गुणवत्ता लाने के लिए ऐसे कोर्सों को चलाने की अनुमति नहीं दी जा सकती है जिसमें अधिकतर सीटें खाली ही रहें। अदालत ने कहा कि राज्य सरकार की ऐसी कोई भी नीति लिखित नहीं है कि शैक्षिक संस्थानों में पाठ्यक्रमों में प्रवेश न होने की स्थिति में उन पाठ्यक्रमों को बंद कर दिया जाएगा या शुरू करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
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अदालत को बताया गया कि याचिकाकर्ता संस्थान 7 अगस्त 2015 से बी फार्मेसी का कोर्स चला रहा है। शैक्षणिक सत्र 2023-24 से एम फार्मेसी का कोर्स शुरू करने के लिए संस्थान ने 16 सितंबर 2022 को राज्य सरकार के पास अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी करने के लिए आवेदन किया था। तकनीकी शिक्षा के निदेशक ने संस्थान की जांच करने के लिए कमेटी गठित की। जांच के बाद निदेशक ने संस्थान को अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी करने के लिए अनुमोदन किया था। इसके अतिरिक्त याचिकाकर्ता संस्थान को तकनीकी विश्वविद्यालय ने एम फार्मेसी कोर्स शुरू करने के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी कर दिया था। यही नहीं, भारतीय फार्मेसी परिषद ने भी संस्थान को एम फार्मेसी कोर्स शुरू करने की अनुमति दे दी थी। लेकिन राज्य सरकार ने संस्थान को अनुमति देने से इंकार कर दिया था। अदालत ने सरकार के इस निर्णय के खारिज करते हुए यह निर्णय सुनाया।
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