Independent MLA Case HP: निर्दलीय विधायकों के इस्तीफे के मामले में हाईकोर्ट का फैसला सुरक्षित
निर्दलीय विधायकों के इस्तीफों को मंजूरी न देने के मामले पर हिमाचल हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। इस सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। विधानसभा अध्यक्ष की ओर से सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये इस मामले की पैरवी की।
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने निर्दलीय विधायकों के इस्तीफे के मामले में अदालत में दो घंटे तक सुनवाई चली। हाईकोर्ट ने फैसले को सुरक्षित रख लिया है। मुख्य न्यायाधीश एमएस रामचंद्र राव और न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ की खंडपीठ ने इस मामले को सुना। विधानसभा अध्यक्ष की ओर से सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये इस मामले की पैरवी की। उन्होंने अदालत को बताया कि निर्दलीय विधायकों की ओर से सौंपे गए इस्तीफे को स्वीकार करना या न करना विधानसभा अध्यक्ष के प्रशासनिक कार्यक्षेत्र में आता है।
सिब्बल ने अपनी दलीलों में कहा कि निर्दलीय विधायकों ने 22 मार्च को इस्तीफे सौंपे और 23 मार्च को भाजपा में शामिल होकर 24 मार्च को चार्टर प्लेन से घूमने जाते हैं। ऐसे में इसे स्वेच्छा से दिया गया इस्तीफा कैसे माना जाएगा। निर्दलियों ने जब इस्तीफे सौंपे, तब विपक्ष के नेता जयराम ठाकुर उनके साथ मौजूद थे। उन्होंने अदालत में कहा कि विधानसभा अध्यक्ष इस मामले में कार्रवाई कर सकते हैं। यह मामला विधानसभा स्पीकर के क्षेत्राधिकार में आता है।
सिब्बल ने अदालत को बताया कि स्पीकर की कार्रवाई में न ही राज्यपाल और न ही अदालत दखलअंदाजी कर सकती है। वहीं याचिकाकर्ता की ओर से पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता मनिंद्र सिंह ने इस केस में पैरवी की। उन्होंने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये अदालत में अपनी दलीलें रखीं। उन्होंने कहा कि निर्दलीय विधायकों की ओर से स्वेच्छा से दिए गए इस्तीफे को मंजूर किया जाना चाहिए। इस्तीफा देना और चुनाव लड़ना विधायकों का अधिकार है। उन्होंने अदालत से गुहार लगाई कि निर्दलीय विधायकों की ओर से सौंपे गए इस्तीफे को मंजूर किया जाए। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद इस फैसले को सुरक्षित रख लिया।
बता दें कि इन तीनों निर्दलीय विधायकों ने राज्यसभा चुनाव के दौरान भाजपा के पक्ष में वोट किए थे। इसके बाद इन्होंने अपने-अपने इस्तीफे विधानसभा अध्यक्ष को सौंप दिए थे। विधानसभा अध्यक्ष ने इनके इस्तीफे मंजूर नहीं किए और इन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया। इस्तीफा मंजूर न होने पर तीनों विधायकों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। याचिका में अदालत से गुहार लगाई गई है कि इनके इस्तीफे मंजूर किए जाएं और विधानसभा अध्यक्ष की ओर से जारी किया गया कारण बताओ नोटिस खारिज किया जाए।