हिमाचल हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, निलंबित होंगे हड़ताली कर्मचारी
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हिमाचल हाईकोर्ट ने एचआरटीसी प्रबंधन को आदेश दिए हैं कि जो कर्मचारी बुधवार दोपहर 3:00 बजे तक हड़ताल से वापस ड्यूटी पर नहीं लौटे, उन्हें तुरंत निलंबित कर दिया जाए।
कम्यूनिटी इनिशिएटिव ट्रस्ट ने एक बार फिर कोर्ट को बताया कि एचआरटीसी कर्मचारी कोर्ट के आदेशों की अनुपालना नहीं कर रहे हैं और हड़ताल जारी रखे हुए हैं।
न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायाधीश संदीप शर्मा की खंडपीठ के समक्ष संयुक्त समन्वयन समिति के अध्यक्ष पवन गुलेरिया, उपाध्यक्ष यशपाल सुल्तानपुरी, सचिव नील कमल गुप्ता, प्रवक्ता पृथ्वी राज कैथ, कोषाध्यक्ष ब्रिज लाल शर्मा व कार्यकारी सदस्य हरदयाल सिंह ने अपने वकील के माध्यम से कोर्ट की अवमानना पर माफी मांगी जिसे कोर्ट ने ठुकरा दिया।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जिस तरह एचआरटीसी कर्मियों ने अदालत के आदेशों की अवमानना की, उन परिस्थितियों में उन्हें माफ नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि केवल सजा से बचने के लिए माफी मांगे तो यह माफी नहीं बल्कि कायरतापूर्ण कृत्य बन जाता है। कोर्ट ने हड़ताल जारी रखने वालों को माफ करने से साफ इंकार कर दिया।
एचआरटीसी ने सौंपी 142 नामों की सूची
सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि एचआरटीसी के रीजनल मैनेजर लॉ ने 18 व एमडी ने 142 नामों की सूची कोर्ट को सौंपी है, जिन्होंने रोक के बावजूद हड़ताल जारी रखी। कम्यूनिटी इनिशिएटिव ट्रस्ट ने भी कुछ हड़ताली कर्मचारियों के नाम कोर्ट के समक्ष रखे, जिन्हें कोर्ट ने मामले में प्रतिवादी बनाए जाने के आदेश दिए।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया की जो कर्मचारी हड़ताल से वापस आए कर्मचारियों को तंग करे या उन्हें ड्यूटी ज्वाइन न करने दें तो एचआरटीसी प्रशासन पुलिस सहायता लेने के लिए स्वतंत्र है। अवमानना याचिका की सुनवाई पर अगली सुनवाई मुख्य मामले की सुनवाई के साथ 20 जून को निर्धारित की गई है।
हड़ताल पर जाने वाले कर्मचारियों पर होगी विभागीय कार्रवाई
हड़ताल पर जाने वाले कर्मचारियों पर निगम प्रबंधन विभागीय कार्रवाई करने जा रहा है। फ्रंट में रहने वाले ऐसे 160 कर्मचारियों की लिस्ट तैयार की गई है, जिनके खिलाफ एक्शन लिया जा सकता है। बुधवार को हड़ताल समाप्त होने के बाद परिवहन मंत्री जीएस बाली और परिवहन प्रधान सचिव एचआरटीसी मुख्यालय पहुंचे।
उन्होंने मौके का जायजा लिया। उन्होंने कर्मचारियों से भी बातचीत की। एक घंटे तक परिवहन मंत्री एमडी कार्यालय में अधिकारियों के साथ बैठक करते रहे। उसके बाद सचिवालय चले गए।
मंत्री के एचआरटीसी कार्यालय पहुंचने पर संयुक्त समन्वय समिति के पदाधिकारी मौके पर मौजूद नहीं थे। वह पहले ही हाईकोर्ट चले गए। मंत्री के चले जाने के बाद एमडी दफ्तर में कोर्ट के लिए कागजात तैयार किए गए। इसमें हड़ताल करने वाले कर्मचारियों की सूची तैयार की गई। दो बजे परिवहन निगम के एमडी हाईकोर्ट चले गए।
कर्मचारी बोले, नोटिस से नहीं डरते, हक के लिए की हड़ताल
एचआरटीसी तकनीकी कर्मचारी महासंघ के उपाध्यक्ष, सर्व कर्मचारी महासंघ के महासचिव और संयुक्त समन्वय समिति के प्रदेशाध्यक्ष पवन गुलेरिया ने कहा कि हाईकोर्ट के आदेशों के बाद ही हड़ताल वापस ली गई है। जहां तक विभागीय कार्रवाई की बात है, इसके लिए कर्मचारी तैयार हैं। कर्मचारियों ने अपने हक लेने के लिए यह हड़ताल की है।
अब नहीं कर सकेंगे हड़ताल
एचआरटीसी के कर्मचारी अब हड़ताल नहीं कर सकेंगे। मामला हाईकोर्ट के विचाराधीन है। कर्मचारियों की आस है कि 20 जून तक हाईकोर्ट की ओर से कोई न कोई आदेश जारी हो सकते हैं।
हाईकोर्ट की ओर से हड़ताल पर रोक लगाए जाने के बाद संयुक्त समन्वय समिति को अपना आंदोलन वापस लेना चाहिए था। बाकायदा समिति के पदाधिकारियों को हाईकोर्ट की ओर से जारी नोटिस भी दिया गया लेकिन पदाधिकारियों ने इसे लेने से मना कर दिया। नियमों और कानून के तहत कर्मचारियों की हड़ताल सही नहीं थी।- अशोक तिवारी, एमडी, परिवहन
हड़ताल को लेकर रात भर चला ड्रामा, सुबह काम पर लौटे कर्मचारी
मंगलवार रात भर चली खींचतान और ड्रामे के बाद एचआरटीसी कर्मचारियों ने सुबह करीब साढ़े तीन बजे आखिरकार हड़ताल से हटने का निर्णय ले लिया। हाईकोर्ट के सख्त रुख के बाद वकीलों से मशविरा करने के बाद आंदोलनरत कर्मचारी काम पर लौटने के लिए तैयार हो गए।
एचआरटीसी की संयुक्त समन्वय समिति के पदाधिकारियों ने मंगलवार रात नौ से 12 बजे तक तारादेवी और उसके बाद ओल्ड बस स्टैंड शिमला में बैठक की। इसके बाद कर्मचारी नेता वापस तारादेवी लौट गए। यहां बुधवार तड़के साढ़े तीन बजे तक ड्रामा चलता रहा।
काफी जद्दोजहद के बाद हड़ताल को वापस लेने का फैसला लिया गया। इसके बाद कर्मचारी नेता फिर ओल्ड बस स्टैंड शिमला पहुंचे। उन्होंने हड़ताल वापस लेने की सूचना परिवहन निगम के एमडी को दी। रात को बैठकों के लंबे दौर और खींचतान के बीच हड़ताल को वापस लेने के मामले में संयुक्त समन्वय समिति के पदाधिकारी दो गुटों में बंट गए थे।
हाईकोर्ट के सख्त रुख को देखते हुए एक गुट हड़ताल को वापस लेने के पक्ष में था तो दूसरा गुट आंदोलन को जारी रखने पर अड़ा रहा। पूरी रात यही ड्रामा चलता रहा। रात भर दोनों गुट एक-दूसरे को मनाने में लगे रहे। समिति का कहना है कि हाईकोर्ट के आदेशों के बाद हड़ताल वापस ली गई है। सुबह तड़के चालकों और परिचालकों को रूटों पर बसें चलाने को कहा गया।
लोकल 9 बजे, लांग रूटों पर दोपहर बाद चलीं बसें
शिमला और अन्य शहरों में सुबह 9 बजे लोकल रूटों पर बसें चल सकीं। हालांकि, चालकों-परिचालकों को मीटिंग खत्म होने के बाद इस बारे में सूचित कर दिया था, लेकिन चालक-परिचालक इधर-उधर होने के कारण निर्धारित समय पर नहीं पहुंच सके। दोपहर बाद लांग रूटों पर बसों की आवाजाही शुरू हुई।