डीसी, एएसपी मामले में सरकार से जवाबतलब, कोर्ट ने पूछा क्यों किया ट्रांसफर?
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने प्रदेश में सक्रिय खनन माफिया पर शिकंजा कसने में नाकाम रही सरकार के उस रवैये पर कड़ा संज्ञान लिया है जिससे खनन माफिया पर कार्यवाई करने वाले एएसपी बद्दी गौरव सिंह और डीसी ऊना यूनुस को तबादले का सामना करना पड़ा।
मुख्य न्यायाधीश मंसूर अहमद मीर और न्यायाधीश सन्दीप शर्मा की खंडपीठ ने एएसपी बद्दी व डीसी ऊना के तबादला आदेशों के पीछे रहे कारणों को स्पष्ट करने के आदेश दिए।
कोर्ट ने खनन माफियाओं से जुड़ी खबर पर संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार से पूछा है कि उसने उन अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्यवाई की जिनके संरक्षण में खनन माफिया अपना अवैध कारोबार जारी रखे हुए है।
कोर्ट ने इंदौरा के कंदरोरी पुल के ध्वस्त होने के कारण भी स्पष्ट करने को कहा है। कोर्ट ने सरकार से पूछा है कि खनन माफिया पर अंकुश लगाने के लिए उसकी क्या योजना है।
एएसपी के तबादले से जुड़ा रिकॉर्ड मांगा
हाईकोर्ट ने डीसी ऊना और एएसपी गौरव सिंह के तबादला आदेशों से जुड़ा तमाम रिकॉर्ड कोर्ट के समक्ष पेश करने के आदेश भी दिए। यही नहीं कोर्ट ने उस मामले की भी संपूर्ण जानकारी मांगी है जिसके तहत कथित तौर पर विधायक की पत्नी के टिप्पर का चालान किया गया था।
पालमपुर में हो रहे अवैध खनन को लेकर राज्य सरकार से स्टेटस रिपोर्ट तलब की थी लेकिन राज्य सरकार स्टेट्स रिपोर्ट दाखिल करने में नाकाम रही। कोर्ट ने खेद जताया कि राज्य सरकार खनन माफिया पर कार्यवाई करने में उदासीन चली आ रही है।
यही कारण है कि खनन माफियाओं ने अपनी मर्जी से पालमपुर के सुलाना क्षेत्र में सड़क का निर्माण किया जिसे अब तोड़ा जा रहा है। कोर्ट ने खनन माफिया से जुड़े तमाम मामलों की जानकारी हाईकोर्ट के समक्ष रखने के आदेश पारित किए हैं। मामले पर सुनवाई 31 अगस्त को होगी।