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रिटेंशन पॉलिसी मामले में ये कदम उठाएगी जयराम सरकार, विधानसभा में उठा मामला

Thu, 15 Mar 2018 09:42 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Updated Thu, 15 Mar 2018 09:42 AM IST
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hp govt will file review petition regarding retention policy in high court

रिटेंशन पॉलिसी मामले में ये जयराम सरकार ये कदम उठाएगी। यह मामला विधानसभा सत्र में उठाया गया है। रिटेंशन पॉलिसी के मामले पर शहरी विकास मंत्री सरवीण चौधरी ने कहा कि अवैध भवनों को नियमित किए जाने की पॉलिसी को लेकर प्रदेश सरकार हाईकोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर करेगी।

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हिमाचल में 30 हजार के करीब अवैध भवन हैं। पूर्व सरकार ने अवैध भवनों को नियमित करने के लिए पॉलिसी लाई थी लेकिन कोर्ट ने भवनों को नियमित करने पर रोक लगा दी।
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विधायक अनिरुद्ध सिंह ने विधानसभा में अपने प्रश्न में कहा कि प्रदेश सरकार समय-समय पर अवैध भवनों को नियमित करने की पॉलिसी लाती रही है। यह मामला लाखों लोगों से जुड़ा है। ऐसे में सरकार को चाहिए कि वह इस मामले में अपना पक्ष मजबूती से रखे। 

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एनजीटी के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगी सरकार

hp govt will file review petition regarding retention policy in high court

नेशनल ग्रीन ट्रिूब्यूनल (एनजीटी) के शिमला प्लानिंग एरिया में ढाई मंजिला भवन बनाने के आदेश के खिलाफ सरकार सुप्रीम कोर्ट जाएगी। शहरी विकास मंत्री सरवीण चौधरी ने विधानसभा में यह जानकारी कसुम्पटी कांग्रेस विधायक अनिरुद्ध सिंह और शिमला ग्रामीण कांग्रेस विधायक विक्रमादित्य सिंह की ओर से पूछे

गए प्रश्न के उतर में दी। सुप्रीम कोर्ट में दायर की जाने वाली याचिका में सरकार पुरानी व्यवस्था के तहत 4 मंजिला भवन बनाने की अनुमति मांगेगी।  
शहरी विकास मंत्री चौधरी ने कहा कि शिमला में पहले चार मंजिल प्लस एटिक का निर्माण करने की अनुमति थी, लेकिन

एनजीटी ने चार मंजिला भवन बनाने के बजाए ढाई मंजिला भवन बनाने के निर्देश दिए। इसके बाद सरकार ने इस फैसले को लेकर एनजीटी में पुनर्विचार याचिका दायर की। बीते मंगलवार को यह मामला लगा, लेकिन मामला सुनने के लिए एनजीटी में चार सदस्यीय खंडपीठ नहीं थी।

चूंकि एनजीटी के दो सदस्य सेवानिवृत्त हो गए थे। फुल बैंच न होने के कारण अब प्रदेश सरकार के पास सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने का ही सहारा बचा है। इससे पूर्व विधायक अनिरुद्ध और विक्रमादित्य ने अपने प्रश्न में कहा कि प्रदेश सरकार समय समय पर अवैध भवनों को नियमित करने की पालिसी लाती रही है। उन्होंने सरकार से इस मामले को गंभीरता से लेने की मांग की। 

कानून बदलना विधानसभा के दायरे में 

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विधायक अनिरुद्ध सिंह ने कहा कि पालिसी बनाने और कानून बदलना विधानसभा के दायरे में है। विधानसभा क्या नहीं कर सकती। उन्होंने कहा कि अध्यक्ष चाहे तो वह न्यायाधीश के साथ बात भी कर सकते हैं। 

एडवोकेट जनरल को न बोलने के लिए दिए लाखों
सरवीण ने कहा कि अवैध भवन को नियमित करने के मामले में एडवोकेट जनरल को पैरवी करने में लगाया गया, लेकिन एडवोकेट जनरल ने कोर्ट में एक भी शब्द नहीं बोला है। सरकार ने एडवोकेट जनरल को बिना बोलने के 36 लाख रुपये फीस दे दी। 

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