पब्लिक की जेब से वसूला जाता है विधायकों का इनकम टैक्स
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विधायक अपने वेतन पर बनने वाला इनकम टैक्स भी पब्लिक की जेब से भरते हैं। कर्ज में डूबी हिमाचल सरकार को अब हर साल प्रति विधायक करीब तीन लाख रुपये का टैक्स चुकाना पड़ेगा। वेतन बढ़ोतरी के बाद अब प्रदेश के 68 विधायकों के नए वेतन पर आयकर का बोझ बढ़कर करीब ढाई करोड़ रुपये हो गया है।
विधानसभा गठन के बाद बेहतर संचालन के लिए विधानसभा सचिवालय ने दि हिमाचल प्रदेश विधानसभा (अलाउंसेज एंड पेंशन आफ मेंबर्स) एक्ट 1971 (सिंतबर 2003) से समय समय पर संशोधन किए हैं। इस नियमावली में विधायकों के हितों को ध्यान में रखते हुए ऐसे तमाम नियम जोड़ दिए गए, जिनसे विधायकों को किसी भी तरह की सुविधा से महरूम न होना पडे़।
चाहे वेतन-पेंशन की बात हो या वाहन के इस्तेमाल, दैनिक भत्ते की। विधायकों की जरूरतों से जुड़े तकरीबन हर बिंदु को इस नियमावली में शामिल किया गया है। इसी एक्ट के अंतर्गत इनकम टैक्स अदायगी भी शामिल है। नियमों के मुताबिक विधायकों का वेतन पर जितना इनकम टैक्स बनता है उसे हिमाचल प्रदेश सचिवालय अदा करता है।
यहां जानिए, विधायकों के इनकम टैक्स का गणित
हाल में हुए वेतन संशोधन के बाद एक विधायक पर सरकार का खर्च करीब दो लाख दस हजार रुपये बनता है। इसमें विधायकों का मूल वेतन ही साठ हजार रुपये हो गया है। आयकर के अंतर्गत आने वाली राशि करीब डेढ़ लाख रुपये महीने बनती है। इसके हिसाब से सालाना करीब 18 लाख रुपये की रकम आयकर में आती है। टैक्स जानकारों के अनुसार इस राशि पर करीब तीन लाख रुपये का आयकर बनेगा।
पहले यह थी व्यवस्था
जिस समय यह व्यवस्था की गई थी उस वक्त विधायकों का मूल वेतन सिर्फ 8 हजार रुपये होता था। उन्हें 5 हजार का प्रतिपूरक भत्ता, विधानसभा क्षेत्र, लिपिकीय व पत्राचार सुविधा के लिए 8 हजार, टेलीफोन भत्ते के रूप में 7 हजार व ऑफिस अलाउंस 5 हजार होता था। बिजली-पानी के बिल का भी भुगतान शामिल था। सब कुछ मिलाकर विधायकों पर सरकार का खर्च करीब 40 हजार रुपये बनता था।
पहले आयकर में नहीं आती थी सैलरी
पहले इस राशि के कुछ हिस्से ही आयकर में आते थे लेकिन कुछ साल पहले एक न्यायिक संस्था ने विधायकों को मिलने वाली राशि को वेतन तो नहीं माना, लेकिन आय के अन्य साधनों की श्रेणी में रखते हुए आयकर के दायरे में ला दिया।