पंचायत चुनाव: सरकार ने दिए दो अहम आदेश
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प्रदेश सरकार ने जिला प्रशासन को पंचायत चुनाव रोस्टर जारी करने के निर्देश जारी कर दिए हैं। सरकार पंचायत चुनाव रोस्टर को गंभीरता से ले रहा है। अगर रोस्टर में गड़बड़ियां पाई गईं तो अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई होगी। मंत्रिमंडल की बैठक में साफ्टवेयर रोस्टर खारिज होने के बाद सरकार ने पंचायत अधिकारियों को मैनुअली रोस्टर तैयार करने को कहा था।
अधिकारियों को फिर से रोस्टर की बारीकियों को देखने के लिए कहा गया है। प्रदेश सरकार पंचायत चुनाव के लिए तैयार है। सरकार चुनाव आयोग की ओर से तिथि घोषित करने का इंतजार कर रही है। हिमाचल में पंचायत चुनाव नवंबर और दिसंबर में होने प्रस्तावित है। प्रदेश में कभी भी पंचायत चुनाव की तिथि घोषित हो सकती है।
हिमाचल में पंचायतों की संख्या घटी
हिमाचल में 3243 पंचायतें थी, इसमें 17 पंचायतें नगर निगम और नगर परिषद में शामिल हुई हैं। धर्मशाला नगर निगम बनने से पंचायतों की संख्या कम हुई है। 8 पंचायतें धर्मशाला नगर निगम में चली गई जबकि अन्य पंचायतें नगर परिषद में शामिल हुई है। मंडी में तीन, ऊना में एक व अन्य जिलों की पंचायतें भी परिषद में शामिल हुई हैं।
पंचायती राज मंत्री अनिल शर्मा का कहना है कि जिला पंचायत कार्यालय में पंचायत चुनाव मैनुअली रोस्टर तैयार है। जिला प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि वह अपने स्तर पर रोस्टर जारी करते रहें। प्रदेश में वार्डों की सीमाएं भी फाइनल कर दी गई हैं।
मैनुअल रोस्टर से चुनावों में धांधली की आशंका
वहीं, भाजपा प्रदेश महामंत्री रणधीर शर्मा ने कहा कि पंचायतीराज संस्थाओं और शहरी निकाय चुनाव के संदर्भ में वीरभद्र सरकार की ओर से लिया गया निर्णय धांधली होने की शंका पैदा कर रहा है। मंत्रिमंडल की बैठक में पंचायतीराज संस्थाओं और शहरी निकाय में आरक्षण लागू करने की प्रक्रिया कंप्यूटर सॉफ्टवेयर की बजाए मैनुअल ही रखना सरकार की सोच को संदेह के घेरे में खड़ा करता है।
भारतीय जनता पार्टी का आरोप है कि आज के तकनीकी युग में कंप्यूटर सॉफ्टवेयर को नकार कर मैनुअल प्रणाली से आरक्षण लागू करने की प्रक्रिया पूरी करने के निर्णय से लगता है कि सरकार इस प्रक्रिया में पारदर्शिता बरतने के बजाए धांधली करना चाहती है। पिछली भाजपा सरकार ने शहरी निकायों में नगर निगम के मेयर, डिप्टी मेयर तथा नगर परिषदों और नगर पंचायतों के अध्यक्षों व उपाध्यक्षों के चुनाव प्रत्यक्ष रूप और पार्टी सिंबल पर करवाए थे।
लेकिन वर्तमान सरकार ने इस एक्ट में संशोधन कर इन पदों के चुनाव अप्रत्यक्ष करवाने का निर्णय लिया, जिससे साबित होता है कि सरकार दल-बदल को बढ़ावा देना चाहती है। भाजपा महामंत्री ने कहा कि शहरी निकायों में महिला आरक्षण तय करने की पद्धति भी सही नहीं है। महिला आरक्षण जनसंख्या के आधार पर तय होना चाहिए, लेकिन सरकार ने महिला आरक्षण तय करने की प्रक्रिया पर्ची सिस्टम से कर दी। जिसकी भारतीय जनता पार्टी कड़ी निंदा करती है।