हिमाचल में उजड़े जंगलों को हरा भरा बनाएंगी तीन हजार समितियां
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हिमाचल में उजड़ चुके वन क्षेत्रों को हरा-भरा बनाने का जिम्मा अब संयुक्त और ग्रामीण वन विकास समितियों को सौंपा जाएगा। सरकार ने सामुदायिक वन संवर्द्धन योजना के तहत इसकी अधिसूचना जारी कर दी है।
इसके तहत स्थानीय महत्व के पेड़ों को उगाकर वनों को बढ़ावा दिया जाएगा। हिमाचल में ऐसी समितियों की संख्या करीब तीन हजार है, जो यह जिम्मेदारी संभालेंगी।
बुधवार को जारी अधिसूचना के मुताबिक हर समूह को करीब 50 हेक्टेयर तक का खुला और उजड़ा वन क्षेत्र दिया जाएगा। जो कम से कम 25 और अधिक से अधिक 35 साल तक इन समितियों के पास रहेगा।
कुछ प्लांटेशन मॉडल इससे भी अधिक समय ले सकते हैं। इन समितियों के लिए भूमि का चयन डीएफओ करेंगे। लैंड बैंक की जमीनी स्तर पर पहले ठीक से पैमाइश होगी।
नर्सरी लगाने पर एक लाख मदद
इस क्षेत्र में कीमती लकड़ियों वाले पेड़ों, उच्च गुणवत्ता वाले फल और चारे की प्रजातियों, उच्च आर्थिक मूल्यों वाले औषधीय पौधोें और गैर वन उत्पाद पौधों की प्रजातियां उगाएंगे। इससे उनकी आय भी बढ़ेगी।
अनारदाना, चिलगोजा, बुरांस के फूल, काफल, चूली, हरड़, आंवला आदि के अलावा टोकरियां बनाने के लिए बांस उगाने को प्रोत्साहन मिलेगा। पहले साल इस योजना को राज्य के दस स्थानों पर लागू किया जाएगा।
वन विभाग हर साल इस योजना पर करीब 10 करोड़ रुपये खर्च करेगा। श्रेणी ए की समितियों को इसके लिए हर साल 10 हजार रुपये तक मदद मिलेगी। अगर नर्सरियां लगानी हों तो ऐसे में समितियों को संबंधित डीएफओ एक लाख रुपये तक की मदद करेंगे।