सरकारी महकमों ने ट्रेजरी से निकलवाया बजट, बंद किए अपने पुराने खाते, ये रही वजह
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वित्तीय वर्ष 2017-18 के खत्म होते ही शनिवार को सरकारी महकमों ने ट्रेजरी से बजट निकलवाया और अपने पुराने खाते बंद कर दिए। ऐसा नए वित्त वर्ष के आने के बाद बजट के सरेंडर हो जाने की आशंका के कारण किया गया।
नए वित्तीय वर्ष के आते ही सरकारी विभागों ने नए साल का लेखा-जोखा बंद कर दिया। देर रात तक अधिकारी दफ्तरों में बैठकर अपनी फाइलें निपटाते रहे। वित्त महकमे के आला अधिकारियों से भी विभागीय अधिकारी सलाह मशविरा लेते रहे।
गुड फ्राइडे और रविवार की छुट्टी केे बीच बेशक 31 मार्च 2018 का दिन शनिवार को आया हो। इसके बावजूद सरकारी दफ्तरों में खूब हलचल रही। राज्य सचिवालय में वित्त, योजना समेत तमाम विभागों और अनुभागों में अधिकारी तथा कर्मचारी फाइलों में निगाहें गड़ाए रहे।
जयराम सरकार के पहले बजट के प्रावधान आज से लागू
वे पिछले खाते बंद करने की प्रक्रिया में जुटे रहे। राज्य, जिला और अधीनस्थ कोषागारों से भी अनखर्चे बजट की विभागोें ने निकारी कर इसे अपने-अपने डीडीओ के खातों में डलवाया, जिससे कि वे नया वित्त वर्ष आने के बावजूद पिछली योजनाओं को लागू करने में इस बजट को खर्च कर सके।
जयराम सरकार के पहले वार्षिक बजट के प्रावधान एक अप्रैल से लागू किए जाएंगे। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की ओर से नौ मार्च को प्रदेश विधानसभा में वित्तीय वर्ष 2018-19 का वार्षिक बजट पेश किया। 41 हजार 440 करोड़ रुपये का ये बजट वीरवार को विधानसभा में पास किया गया।
देर रात तक चला बैंकों में कामकाज
वित्तीय वर्ष 2017-18 की समाप्ति पर 31 मार्च को रात 12 बजे तक प्रदेश के बैंकों में कामकाज हुआ। सरकारी राशि के लेनदेन का काम देर रात तक जारी रहा। अधिकांश बैंकों की बड़ी शाखाओं में सरकारी धनराशि के लेनदेन के लिए काउंटर खुले रहे।
सामान्य दिनों की जगह 31 मार्च को बैंकों में क्लीयरिंग का काम भी कई बार चला। राजधानी शिमला में मॉल रोड स्थित कई बैंकों में रात आठ बजे तक काफी चहलपहल रही।
उधर, भारतीय जीवन बीमा निगम सहित बीमा से जुड़े अन्य कार्यालयों में भी देर रात तक कामकाज हुआ। उधर, पहली अप्रैल को रविवार के चलते बैंकों में छुट्टी रहेगी जबकि दो अप्रैल सोमवार को लेखाबंदी के कारण बैंकों में सामान्य कामकाज नहीं होगा।