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हिमाचल प्रदेश: 10वीं के दो साल बाद बीए डिग्री, हिमाचल कोऑपरेटिव बैंक कर्मचारी की शैक्षणिक टाइमलाइन पर सवाल
Fri, 04 Sep 2026 10:40 AM IST
Ankesh Dogra
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
Published by: Ankesh Dogra
Updated Fri, 04 Sep 2026 10:40 AM IST
सार
हिमाचल प्रदेश स्टेट कोऑपरेटिव बैंक के एक कर्मचारी की शैक्षणिक योग्यता की टाइमलाइन पर सवाल उठे हैं। रिकॉर्ड के अनुसार उन्होंने 1987 में 10वीं पास की और करीब दो साल बाद 1989 में पंजाब विश्वविद्यालय से बीए परीक्षा उत्तीर्ण की। विश्वविद्यालय ने सत्यापन में डिग्री और परीक्षा रिकॉर्ड को सही व इन ऑर्डर बताया है, लेकिन 1989 में बीए परीक्षा के लिए पात्रता का आधार उपलब्ध दस्तावेजों में स्पष्ट नहीं है। बैंक मामले के अन्य पहलुओं की जांच कर रहा है। पढ़ें पूरी खबर...
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सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : AI
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विस्तार
हिमाचल प्रदेश स्टेट कोऑपरेटिव बैंक के एक कर्मचारी की शैक्षणिक योग्यता से जुड़े रिकॉर्ड की टाइमलाइन ने सवाल खड़े किए हैं। उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार कर्मचारी ने वर्ष 1987 में हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड से 10वीं की परीक्षा पास की थी। इसके करीब दो साल बाद अप्रैल 1989 में पंजाब विश्वविद्यालय से बीए परीक्षा पास करने और 15 सितंबर 1989 को डिग्री जारी होने का रिकॉर्ड सामने आया है।
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10वीं और स्नातक परीक्षा के बीच कम समय के अंतर को देखते हुए बैंक प्रबंधन ने संबंधित बीए डिग्री का आधिकारिक सत्यापन कराया। बैंक के प्रधान कार्यालय ने 20 जनवरी 2026 को पंजाब विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक को पत्र भेजकर डिग्री और परीक्षा रिकॉर्ड की पुष्टि मांगी थी।
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विश्वविद्यालय की ओर से 4 फरवरी 2026 को गोपनीय पत्र के माध्यम से बैंक को जवाब भेजा गया। सहायक कुलसचिव (प्रमाण पत्र) की ओर से जारी सत्यापन रिपोर्ट में कर्मचारी के रोल नंबर 42194 और पंजीकरण संख्या 88-ez-13858 का रिकॉर्ड दर्ज है। रिपोर्ट के मुताबिक कर्मचारी ने बैचलर ऑफ आर्ट्स की परीक्षा रेग्यूलेशन 3.2, अप्रैल 1989 के तहत पास की थी। विश्वविद्यालय का जवाब 9 फरवरी को बैंक के प्रधान कार्यालय में दर्ज किया गया।
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डिग्री सही, लेकिन पात्रता का आधार बना सवाल
विश्वविद्यालय ने उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर बीए की डिग्री और परीक्षा रिकॉर्ड को वैध एवं इन ऑर्डर बताया है। हालांकि, उपलब्ध दस्तावेजों से यह स्पष्ट नहीं हो रहा है कि वर्ष 1987 में 10वीं पास करने के बाद कर्मचारी वर्ष 1989 में बीए परीक्षा में बैठने के लिए किस शैक्षणिक पात्रता के आधार पर योग्य हुआ। आरटीआई के तहत 28 अगस्त 2026 को लोक सूचना अधिकारी से प्राप्त प्रमाणित दस्तावेजों के बाद यह पहलू और महत्वपूर्ण हो गया है। सवाल यह है कि उस समय रेग्यूलेशन 3.2 के तहत कोई विशेष पात्रता, समकक्षता अथवा अन्य व्यवस्था लागू थी या नहीं। उपलब्ध रिकॉर्ड में फिलहाल इसका स्पष्ट आधार सामने नहीं आया है।
बैंक ने कराया सत्यापन
हिमाचल प्रदेश स्टेट कोऑपरेटिव बैंक के प्रबंध निदेशक विनय सिंह ने कहा कि मामले की छानबीन के लिए पंजाब विश्वविद्यालय से डिग्री का सत्यापन कराया गया है। विश्वविद्यालय ने उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर संबंधित कर्मचारी की बीए डिग्री को सही और रिकॉर्ड को इन ऑर्डर बताया है। उन्होंने कहा कि मामले के अन्य पहलुओं की जांच की जा रही है। उपलब्ध दस्तावेजों में बीए डिग्री के सत्यापन को लेकर विश्वविद्यालय की ओर से सकारात्मक जवाब दर्ज है। ऐसे में फिलहाल सवाल डिग्री की प्रामाणिकता से अधिक वर्ष 1989 में परीक्षा के लिए निर्धारित शैक्षणिक पात्रता और उसके आधार को लेकर है। इस पहलू पर संबंधित नियम और मूल प्रवेश/पात्रता रिकॉर्ड सामने आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।
विश्वविद्यालय ने उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर बीए की डिग्री और परीक्षा रिकॉर्ड को वैध एवं इन ऑर्डर बताया है। हालांकि, उपलब्ध दस्तावेजों से यह स्पष्ट नहीं हो रहा है कि वर्ष 1987 में 10वीं पास करने के बाद कर्मचारी वर्ष 1989 में बीए परीक्षा में बैठने के लिए किस शैक्षणिक पात्रता के आधार पर योग्य हुआ। आरटीआई के तहत 28 अगस्त 2026 को लोक सूचना अधिकारी से प्राप्त प्रमाणित दस्तावेजों के बाद यह पहलू और महत्वपूर्ण हो गया है। सवाल यह है कि उस समय रेग्यूलेशन 3.2 के तहत कोई विशेष पात्रता, समकक्षता अथवा अन्य व्यवस्था लागू थी या नहीं। उपलब्ध रिकॉर्ड में फिलहाल इसका स्पष्ट आधार सामने नहीं आया है।
बैंक ने कराया सत्यापन
हिमाचल प्रदेश स्टेट कोऑपरेटिव बैंक के प्रबंध निदेशक विनय सिंह ने कहा कि मामले की छानबीन के लिए पंजाब विश्वविद्यालय से डिग्री का सत्यापन कराया गया है। विश्वविद्यालय ने उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर संबंधित कर्मचारी की बीए डिग्री को सही और रिकॉर्ड को इन ऑर्डर बताया है। उन्होंने कहा कि मामले के अन्य पहलुओं की जांच की जा रही है। उपलब्ध दस्तावेजों में बीए डिग्री के सत्यापन को लेकर विश्वविद्यालय की ओर से सकारात्मक जवाब दर्ज है। ऐसे में फिलहाल सवाल डिग्री की प्रामाणिकता से अधिक वर्ष 1989 में परीक्षा के लिए निर्धारित शैक्षणिक पात्रता और उसके आधार को लेकर है। इस पहलू पर संबंधित नियम और मूल प्रवेश/पात्रता रिकॉर्ड सामने आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।