बोर्ड टॉपर ये बेटी बनना चाहती है सीए, पर फॉर्म तक को नहीं है पैसे
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हिमाचल स्कूल शिक्षा बोर्ड से जमा दो कॉमर्स में प्रदेश भर में दूसरे स्थान पर रहने वाली सिरमौर की सोनिका के सपने पर गरीबी भारी पड़ रही है। बीपीएल परिवार की बेटी चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) बनना चाहती है, लेकिन इंट्रेंस टेस्ट का फार्म खरीदने तक के लिए पैसे नहीं हैं। इकलौते कमाने वाले पिता मजदूरी करते हैं।
रोजाना काम नहीं मिलता। ऐसे में पिता की आर्थिक तंगी और कहीं से उम्मीद की किरण नजर न आते देख सोनिका ने पांवटा कॉलेज में बी-कॉम में दाखिला ले लिया है। इसमें भी परिजनों ने मदद की है। सोनिका के सहपाठी सीए की तैयारी के लिए दिल्ली और चंडीगढ़ में कोचिंग ले रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने दिया था मदद का भरोसा
शुक्रवार को पांवटा में शिवाजी स्पोर्ट्स क्लब के अध्यक्ष मधुकर डोगरी, राजेश सूद, सोनिका के पिता कश्मीर सिंह तथा मां सुनीता देवी ने बताया कि आर्थिक तंगहाली के चलते सोनिका सीए का टेस्ट तक नहीं दे पा रही है। पिता कश्मीर के अनुसार बेटी की पढ़ाई आगे जारी रखना असंभव सा लग रहा है।
वे प्रदेश सरकार से भी गुहार लगा चुके हैं। अमर उजाला ने वर्ष 2015 में मेधावी सम्मान समारोह के दौरान मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह से गरीब छात्रा को मिलवाया था। मुख्यमंत्री ने मौके पर ही छात्रा की मदद करने के आदेश जारी किए थे। सात माह बीत गए छात्रा की मदद करना तो दूर शिक्षा विभाग ने पूछा तक नहीं।
शिमला आने को नहीं था बस किराया
जमा दो में टॉप करने पर सोनिका को हिमाचल के नंबर वन अखबार अमर उजाला ने वर्ष 2015 में शिमला में मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के हाथों सम्मानित भी करवाया है। उस समय सोनिका के पास शिमला आने तक के लिए पैसे नहीं थे।
पार्षद अपने खर्च पर उसे लेकर अमर उजाला के समारोह में आईं थीं। सोनिका को दिल्ली में डॉ. अंबेडकर राष्ट्रीय मेधा पुरस्कार भी मिल चुका है। अमर उजाला ऊना की गरीब उड़नपरी बख्शो देवी के सपनों को भी पंख दे चुका है। नंगे पांव दौड़ने वाली छात्रा की एडमिशन अब बिलासपुर स्पोर्ट्स हॉस्टल में होगी।