AFFI: संसद भवन तक पहुंचे बागवान, सरकार से सस्ती दरों पर खाद मुहैया करवाने की उठाई मांग
दिल्ली प्रेस क्लब में प्रेस को संबोधित करते हुए एएफएफआई के प्रतिनिधि और हिमाचल सेब उत्पादक संघ के अध्यक्ष सोहन ठाकुर ने कहा कि केंद्र सरकार से सेब पर आयात शुल्क 100 फीसदी करने की मांग उठाई गई है।
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हिमाचल प्रदेश, कश्मीर और उत्तराखंड के बागवानों के साझा मोर्चा एएफएफआई (एपल फार्मर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया) ने केंद्र सरकार से सस्ती दरों पर बागवानों को खादों की उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग उठाई है। मंगलवार को संसद भवन में एएफएफआई के प्रतिनिधियों ने केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर से मुलाकात कर उन्हें मांगपत्र सौंपा। दिल्ली प्रेस क्लब में प्रेस को संबोधित करते हुए एएफएफआई के प्रतिनिधि और हिमाचल सेब उत्पादक संघ के अध्यक्ष सोहन ठाकुर ने कहा कि केंद्र सरकार से सेब पर आयात शुल्क 100 फीसदी करने की मांग उठाई गई है। पिछले सीजन में अफगानिस्तान के रास्ते ईरान और टर्की का करीब 6 लाख मीट्रिक टन सेब भारत में आयात हुआ है।
जिससे देश के सेब की कीमतों में भारी गिरावट आई है। बीते दो सालों में सेब उत्पादन की लागत दोगुनी हो गई है लेकिन मंडियों में सेब की कीमतों में इजाफा नहीं हुआ है। हिमाचल सरकार बागवानों से सौतेले व्यवहार कर रही है। कार्टन पर जीएसटी की दरों में मनमानी बढ़ोतरी हुई है। खादों, कीटनशाकों, फफूंदनाशकों सहित अन्य बागवानी सहायक वस्तुओं पर अनुदान खत्म कर दिया है। केंद्र सरकार सेे नेफेड और सफल एजेंसियों के जरिये कश्मीर की तर्ज पर सेब खरीद की मांग उठाई गई है। शिमला में सरकार किसानों से शोघी बैरियर पर गैर कानूनी टैक्स वसूल रही है। सोहन ठाकुर ने कहा कि हिमाचल सरकार बागवानों के हितों की रक्षा करने में विफल रही है, इसलिए केंद्र के सामने मांगें रखी गई हैं।
ये भी हैं मांगें
सेब उत्पादकों को दिया जाए विशेष वित्तीय पैकेज
अफगानिस्तान के रास्ते ईरानी सेब का आयात रोकने के लिए खुले व्यापार की नीति में हो संशोधन
खाद, कीटनाशकों, फफूंदनाशकों की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित हो, अनुदान बहाल किया जाए
सूखे, ओलावृष्टि और बर्फबारी से हुए नुकसान का मिले मुआवजा
कश्मीर की तर्ज पर एमआईएस में 60, 44 और 24 रुपये किलो बिके सेब
सरकार की परेशानी बढ़ा सकती है किसानों की एकजुटता
चुनावी साल में किसानों की एकजुटता सरकार की परेशानी बढ़ा सकती है। सेब के मुद्दे पर प्रदेश के किसान बागवान एक हो गए हैं, हिमाचल से दिल्ली तक आवाज उठनी शुरू हो गई है। सरकार भी मामले की गंभीरता को भांप गई है। चुनावी साल में किसान बागवानों की नाराजगी दूर करने के लिए मुख्यमंत्री ने 28 जुलाई को बागवान संगठनों के साथ बैठक बुलाई है।