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Himachal: आदेशों की अवहेलना पर बागवानी विभाग के सचिव हाईकोर्ट में तलब, संशोधन आवेदन याचिका खारिज

Fri, 10 Jul 2026 05:20 AM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Fri, 10 Jul 2026 05:20 AM IST
सार

 हाईकोर्ट ने बागवानी विभाग में समिति के तहत नियुक्त कर्मचारियों को नियमित करने के मामले में अदालत के आदेशों का अनुपालन न करने पर बागवानी सचिव को व्यक्तिगत रूप से तलब किया है। 

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Horticulture Department Secretary summoned to High Court for non compliance with orders; modification applicat
हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय। - फोटो : अमर उजाला

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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने बागवानी विभाग में समिति के तहत नियुक्त कर्मचारियों को नियमित करने के मामले में अदालत के आदेशों का अनुपालन न करने पर बागवानी सचिव को व्यक्तिगत रूप से तलब किया है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश जिया लाल भारद्वाज की खंडपीठ ने नितिन ठाकुर बनाम हिमाचल प्रदेश और इससे जुड़े अन्य मामलों की सुनवाई करते हुए यह आदेश जारी किया है। अदालत ने राज्य सरकार की ओर से 12 नवंबर 2025 के आदेश को संशोधित करने के लिए दायर आवेदन को खारिज कर दिया है। अदालत के संज्ञान में यह बात आई कि 12 नवंबर 2025 के इसी आदेश को लागू करवाने के लिए अन्य याचिकाएं भी दायर की गई हैं। 

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इसके अलावा पीठ ने कहा कि इन सभी मामलों की सुनवाई एक ही अदालत द्वारा की जाए। इसके लिए रजिस्ट्री को निर्देश दिए गए हैं कि इन सभी संबंधित मामलों को एक साथ संलग्न करें, जिससे 7 अगस्त को होने वाली अगली सुनवाई में इन पर एक साथ विचार किया जा सके। गौरतलब है कि एकल न्यायाधीश ने विभाग को आदेश दिए हैं कि वह अपने विभिन्न संस्थानों में हिमाचल प्रदेश बागवानी विकास समिति के माध्यम से अनुबंध पर नियुक्त सभी याचिकाकर्ताओं को नियमित करे। कोर्ट ने विभाग को आदेश दिए हैं कि वह प्रदेश सरकार की ओर से निर्धारित नियमितीकरण नीति के अनुसार दो वर्ष की अनुबंध सेवा पूरी करने के बाद याचिकाकर्ताओं की अनुबंध सेवाओं को नियमित करे।

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वहीं सरकार का तर्क था कि याचिकाकर्ता बागवानी विभाग के कर्मचारी नहीं हैं, बल्कि सोसायटी के कर्मचारी हैं, जो एक स्वायत्त निकाय है। इस तरह प्रदेश सरकार की ओर से तैयार नियमितीकरण की नीति का लाभ नहीं ले सकते।
हाईकोर्ट ने सरकार की दलीलों को नकारते हुए सभी याचिकाकर्ताओं को नियमित करने के आदेश जारी किए हैं। प्रदेश सरकार ने इसके खिलाफ अपील दायर की। खंडपीठ ने इस आदेश में आंशिक संशोधन करते हुए मुख्य फैसले को बरकरार रखा। सरकार को हाईकोर्ट से जब कोई राहत नहीं मिली, तो प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। वहां पर भी सरकार की स्पेशल लीव पिटीशन खारिज हो गई। इसके बाद ही हिमाचल प्रदेश की खंडपीठ ने यह आदेश पारित किए हैं।

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प्राकृतिक आपदा के कारण टोल ठेकेदार को हुए नुकसान की भरपाई करेगी सरकार
प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह प्राकृतिक आपदा के कारण टोल ठेकेदार को हुए राजस्व नुकसान की भरपाई करे। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने सरकार की ओर से दायर अपील को खारिज करते हुए एकल न्यायाधीश के आदेश को बरकरार रखा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि भले ही वाहन क्षेत्र से बाहर निकल रहे थे, लेकिन पुल टूटने के कारण वे टोल प्लाजा पर आए बिना ही दूसरे रास्तों से निकल गए, जिससे ठेकेदार को सीधा नुकसान हुआ। कोर्ट ने समानता के सिद्धांत को अपनाते हुए कहा कि चूंकि सरकार टोल राशि के भुगतान में देरी होने पर ठेकेदार से टोल शर्त के तहत 15 फीसदी सालाना ब्याज वसूलती है।

इसलिए रिफंड देते समय भी सरकार को ठेकेदार को 15 फीसदी की दर से ही ब्याज देना होगा। हाईकोर्ट ने राज्य कर एवं आबकारी आयुक्त को निर्देश दिया है कि दो सप्ताह के भीतर इस नुकसान की अंतिम पुष्टि कर रिफंड प्रक्रिया को पूरा करें। यह मामला वित्तीय वर्ष 2023-24 के लिए बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़ क्षेत्र के टोल यूनिट से जुड़ा है। यह ठेका केके एसोसिएट्स को लगभग 21.72 करोड़ रुपये की बोली पर आवंटित किया गया था। साल 2023 के मानसून के दौरान भारी बारिश और प्राकृतिक आपदा के कारण पिंजौर-बद्दी नेशनल हाईवे और आसपास के कई मुख्य पुल (लोहगढ़, चर्निया आदि) बह गए या पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए। इस कारण यातायात को डायवर्ट करना पड़ा और वाहनों ने टोल बैरियर को बाईपास कर वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल किया, जिससे ठेकेदार का टोल कलेक्शन बुरी तरह प्रभावित हुआ।

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