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नियम ताक पर रखकर कंपनियों को कर दिया लाखों रुपये का भुगतान

Wed, 10 Jul 2019 12:40 PM IST
अरविन्द ठाकुर विपिन काला, अमर उजाला, शिमला
विपिन काला, अमर उजाला, शिमला Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Wed, 10 Jul 2019 12:40 PM IST
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horticulture department himachal payment to companies
सांकेतिक तस्वीर

नियमों को ताक पर रखकर कंपनियों को लाखों का अग्रिम भुगतान कर दिया गया है। बागवानी में इस्तेमाल होने वाले कीटनाशक और फफूंदनाशक दवाओं की खरीद में कंपनियों के प्रति अफसरशाही ने खासी मेहरबानी दिखाई है। चंडीगढ़ की कंपनियों ने दवाओं की पूरी आपूर्ति तक नहीं की और अफसरों ने एडवांस में भुगतान कर दिया। बागवानी विभाग की ओर से कराए गए ऑडिट के दौरान यह मामला सामने आया है। 

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बागवानी विभाग के सूत्रों से मालूम हुआ है कि अफसरशाही से सांठगांठ कर यह खेल खेला गया है। कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए ऑर्डर की दवा आपूर्ति करने वाली कंपनियों को 30 से 50 लाख रुपये से अधिक का भुगतान किया गया है। बताया जा रहा है कि पिछले कई सालों से कंपनियों और अफसरशाही की मिलीभगत से यह कारनामा किया जा रहा है।
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एक कंपनी को एक करोड़ की दवाई का ऑर्डर दिया गया था। उसे 1.50 करोड़ का भुगतान किया गया। अन्य कंपनी को 70 लाख की दवा का ऑर्डर दिया गया और 90 लाख का भुगतान किया गया है। ऐसे ही कई अन्य कंपनियों के प्रति कृपा दृष्टि दिखाई गई है।

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बताते हैं कि महज दवाओं की आपूर्ति से अधिक अग्रिम भुगतान ही नहीं किया गया, अपितु जो दवाएं बागवानों के नाम खरीदी गई थीं, उनको बागवानों तक नहीं पहुंचाया गया। आज स्थिति ऐसी बनी हुई है कि ये दवाएं सरकारी गोदामों में धूल फांक रही हैं।

बागवान इनका समय पर इस्तेमाल तक नहीं कर पाए। इन दवाओं की मियाद गोदामों में पड़े खत्म हो चुकी है। सरकार ने दवाओं की खरीद के लिए एक उच्च स्तरीय कमेटी बनाई है। दवाओं की कीमत कितनी होगी? यह कमेटी तय करती है। कमेटी की सिफारिशों को भी पूरी तरह दरकिनार किया गया है। 

क्या कहते हैं बागवानी मंत्री महेंद्र सिंह
बागवानी मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर ने कहा कि इस गंभीर मामले की वह जांच करवाएंगे। अगर कोई अफसर दोषी पाया गया तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। 

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