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गोशाला में शुरू की पाठशाला, आज इनकी वजह से लग रहीं स्मार्ट कक्षाएं

Mon, 29 Jan 2018 01:35 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Updated Mon, 29 Jan 2018 01:35 PM IST
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hope torch: nisha sharma of Himachal started school in cowshed

कोटखाई के बगाहर में गोशाला में शुरू हुए एक प्राथमिक स्कूल में अब स्मार्ट क्लासेज से नौनिहालों को पढ़ाया जा रहा है। यहां किसी निजी स्कूल नहीं बल्कि सरकारी स्कूल की बात हो रही है। 

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स्कूल की शिक्षिका निशा शर्मा ने स्कूल प्रबंधन कमेटी की मदद से तीन साल में इस स्कूल की कायापलट दी। एक समय में जहां स्कूल में सात आठ बच्चे पढ़ते थे, आज वहां 33 छात्र हैं। निजी स्कूल छुड़ाकर भी बच्चों का यहां दाखिला किया जा रहा है। 
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प्रदेश में बंद होते सरकारी स्कूलों के बीच बगाहर स्कूल की इस अनूठी मिसाल पर एक डॉक्यूमेंटरी भी बनाई गई है। सोशल मीडिया और यूट्यूब पर ये डाक्यूमेंटरी खूब खूब वायरल हो रही है।
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बगाहर गांव में ये स्कूल चार अप्रैल 2013 को खुला। इस स्कूल में शुरू में सात-आठ बच्चे थे। कक्षाएं गांववासी ब्रह्मानंद शर्मा की गोशाला में लगती थीं, क्योंकि स्कूल के लिए भवन नहीं था। 

गोशाला में ऐसे चलती थी कक्षाएं

hope torch: nisha sharma of Himachal started school in cowshed

मकान के एक ओर गाए बंधी होतीं तो दूसरी ओर के ओबरे यानी गायों के लिए बनाए गए कमरे में कक्षाएं चलतीं। छह फरवरी 2014 को निशा शर्मा ने बतौर जेबीटी शिक्षक इस स्कूल में पहली ज्वाइनिंग दी।

निशा शर्मा और एसएमसी के प्रयासों से 28 मई 2016 को स्कूल भवन भी बन गया। एसएमसी के सहयोग से दो कंप्यूटरोें का प्रबंध भी हो गया। बहुत सा सामान निशा शर्मा अपने पैसे से भी लाईं।

 

अब यहां दो क्लास रुम, एक कार्यालय, एक किचन, विभाग के बनाए दो शौचालय और एसजेवीएन के बनाए हुए दो अन्य शौचालय हैं। स्कूल में एसएमसी ने प्रस्ताव पारित कर नर्सरी और केजी कक्षाएं भी शुरू कीं।

 

यहां पर नर्सरी में छह, केजी में आठ, पहली में नौ, दूसरी में चार, तीसरी में चार, चौथी में कोई नहीं और पांचवीं में दो बच्चे हो गए हैं। यानी 33 बच्चे हो चुके हैं। एक टीजीटी शिक्षक ने गुम्मा के एक निजी स्कूल से बच्चा निकालकर यहां रख लिया है। 

अब स्कूल के बच्चे करने लगे हैं टॉप

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35 वर्षीय निशा शर्मा बताती हैं कि उनके स्कूल के बच्चे हर तरह की स्पर्धा में ब्लॉक, जिला और राज्य स्तर पर टॉप करने लगे हैं। हाल ही में कोटखाई के गुड़िया प्रकरण पर एकांकी पर भी बच्चे प्रदेश भर मेें अव्वल आए।

वे यूट्यूब, एनसाइक्लोपीडिया आदि से इंटरनेट पर भरपूर जानकारी ले रहे हैं। शिक्षिका निशा मूल रूप से शिमला शहर के पास शोघी से हैं, मगर इस ग्रामीण स्कूल के बच्चों के जीवन को नई दिशा देने में ही उनका मन रमा है।

उन्होंने बताया कि उनके साथ एक अन्य शिक्षक डा. जगदीश बशैइक का भी स्कूल को मुख्य धारा में लाने में भरपूर सहयोग रहा है। केंद्रीय गृह मंत्रालय तक ने इस स्कूल पर बनाई गई उनकी डॉक्यूमेंटरी को खूब सराहा है।  

ऐसे शिक्षकों की वजह से ही चल रहे स्कूल : शिक्षा मंत्री 
शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज ने कहा कि बगाहर स्कूल के बारे में वे शिक्षा निदेशक से सोमवार को पूरी जानकारी लेंगे। अगर शिक्षकों की मेहनत से स्कूल में बच्चे अच्छा पढ़ रहे हैं और एनरोलमेंट बढ़ रही है तो ये अच्छी बात है। शिक्षक ही बच्चों को बेहतर बना सकते हैं और प्राइमरी स्कूलों को बंद होने से रोक सकते हैं। ऐसे शिक्षकों की वजह से ही सरकारी स्कूल चल पा रहे हैं। 

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