तत्तापानी में नहीं लगी आस्था की डुबकी, पाइप के पानी से किया स्नान
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मकर संक्रांति पर प्र्रसिद्ध तीर्थ स्थल तत्तापानी में इस साल आस्था की डुबकी नहीं लगी। वीरवार को तत्तापानी में न खिचड़ी बनी और न ही परशुराम और शनिदेव की पूजा हो सकी। प्रसिद्ध तीर्थ स्थल के जलमग्न होने से वीरवार को चहारदीवारी के भीतर ही लोगों ने तुलादान किया। गर्म पानी के चश्मों को पुल से ही लोग तलाशते रहे।
सैकड़ों श्रद्धालु बिना तुलादान निराश लौट गए। तीर्थ स्थल के जलमग्न होने से पांडों और पंडितों के कारोबार पर भी असर पड़ा है। हर साल मकर संक्रांति पर तत्तापानी में चार सौ से अधिक तुलादान पंडाल लगते थे। लेकिन इस बार गिनकर छह ही पंडाल लगे, वह भी सड़क किनारे।
वीरवार को तत्तापानी पहुंचे भुवनेश्वर शर्मा, दुष्यंत, रूप लाल, चेतन शर्मा, कैलाश शर्मा, अजित ठाकुर, सुमित शर्र्मा ने बताया कि वे मकर संक्रांति पर पूजा-अर्चना और पवित्र स्नान के लिए यहां आए थे लेकिन उचित व्यवस्थाएं न होने के चलते उन्हें निराश होना पड़ा। युवकों ने कहा कि सरकार को जल्द से जल्द यहां अच्छी व्यवस्थाएं करनी चाहिए।
बंद कमरों में करना पड़ा तुलादान
स्थानीय निवासी भूपेंद्र कुमार शर्मा ने बताया कि उनकी कई पुश्तें तत्तापानी में तुलादान करवाती हैं। आस्था को जिंदा रखने के लिए इस बार बंद कमरों में तुलादान करना पड़ा। महिलाएं तो इस बार तुलादान कर ही नहीं पाईं। उन्होंने बताया कि सरकार से कई बार
वैकल्पिक व्यवस्था करने की मांग की गई लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। तत्तापानी में मकर संक्रांति पर टनों के हिसाब से खिचड़ी बनती थी, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हो सका। तुलादान के बाद शनि की पूजा करते थे, जो अब नहीं हुई। शनिदेव मंदिर जलमग्न हो गया है। परशुराम मंदिर भी जलमग्न हो गया है।
तीन जगह था स्नान करने का बंदोबस्त
तत्तापानी में कुछ लोगों ने गर्म पानी के चश्मों का पानी बोर के माध्यम से भी निकाला है। पाइपों के जरिये निकाले गए इस पानी से स्नान करने के लिए बाकायदा स्थान बनाए गए हैं।
प्रति व्यक्ति यहां स्नान करने के 25 रुपये लिए जाते हैं लेकिन वीरवार को मकर संक्रांति के अवसर पर स्नान करने वालों से कोई शुल्क नहीं लिया गया। स्थानीय निवासी हेमदास राणा ने बताया कि उन्होंने दस लाख रुपये खर्च कर बोर किया है।
बोर कर लाए गए गर्म पानी से किया स्नान- तत्तापानी में वीरवार को बोर कर लाए गए गर्म पानी से लोगों ने स्नान किया। क्षेत्र के कुछ लोगों ने गर्म पानी के चश्मों से मशीन लगाकर पानी को बोर कर सड़क किनारे तक पहुंचाया है। इन्हीं जगहों में लोगों ने स्नान किया।